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MP News: गोटमार मेले में पत्थर मारते दिखे पांढुर्ना विधायक, कहा- परंपरा गांव वाले जैसे चाहेंगे वैसे जारी रहेगी
Sun, 28 Aug 2022 10:51 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sun, 28 Aug 2022 10:51 AM IST
सार
पांढुर्ना में आयोजित गोटमार मेले में पहली बार जनप्रतिनिधि भी पत्थर फेंकते नजर आए। दरअसल पोला के पर्व के दूसरे दिन आयोजित होने वाले पारंपरिक गोटमार मेले में शनिवार को पांढुर्ना विधायक नीलेश उइके भी लोगों के साथ मिलकर पत्थर बरसाते नजर आए।
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गोटमार मेले में पत्थर फेंकते विधायक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छिंदवाड़ा जिले के पांढुर्ना में आयोजित गोटमार मेले में पहली बार जनप्रतिनिधि भी पत्थर फेंकते नजर आए। दरअसल पोला के पर्व के दूसरे दिन आयोजित होने वाले पारंपरिक गोटमार मेले में शनिवार को पांढुर्ना विधायक नीलेश उइके भी लोगों के साथ मिलकर पत्थर बरसाते नजर आए। गोटमार मेले में 3 बजे के आसपास क्षेत्रीय विधायक नीलेश उइके अपने सुरक्षा गार्ड के साथ पहुंचे एवं क्षेत्र के निवासियों के साथ परंपरा का निर्वहन करते हुए पांच पत्थर मारकर विश्व विख्यात परंपरा के इस मेले का हिस्सा बने।हर बार की तरह इस बार भी लोगों ने उत्साह के साथ गोटमार मेले में भाग लिया। पत्थर बाजी के दौरान 200 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं।
परंपरा के नाम पर बीते कई वर्षों से पांढुर्ना और साबर गांव के बीच ये खूनी खेल जारी है। जिला प्रशासन कई बार इस खेल का स्वरूप बदलने के लिए जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर लगातार बैठकें आयोजित करता आ रहा है। लेकिन हाल ही में मेले में खुद जनप्रतिनिधि परंपरा के नाम पर जारी खूनी खेल का हिस्सा बनते दिखे। जिसे देखकर अब माना जा रहा है कि जब जनप्रतिनिधि खुद खेल में भाग ले रहे हैं तो इसके स्वरूप को बदलना मुश्किल है।
विधायक निलेश उइके ने गोटमार मेले में पांढुर्णा पक्ष की ओर से पत्थरबाजी की। उन्होंने इस दौरान बताया कि वह क्षेत्रवासियों के साथ खड़े हैं एवं दशकों पूर्व की सभी परंपराओं में वह जनता जो चाहती है वही होना चाहिए इसका निर्वाहन करा रहे हैं । इससे पहले भाजपा विधायक स्वर्गीय रामराव कवडेटी भी गोटमार मेले को बंद करने को लेकर आयोजित की गई बैठक में विरोध किया था और कलेक्टर को यह कह दिया था कि यदि गोटमार मेला बंद किया जाएगा तो सबसे पहले पत्थर वही मारेंगे।
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गोटमार मेले की शुरुआत कब हुई इसके को लेकर सटीक जानकारी नहीं है, लेकिन इस खूनी खेल में अब तक ग्रामीणों के अनुसार गांव के 19 लोग जान गवां चुके हैं। वहीं, जिन जनप्रतिनिधियों को ऐसे जानलेवा खेल को बंद कराना चाहिए यदि वे ही इस खेल में शामिल होकर इसे परंपरा के निर्वाह का नाम देंगे तो गोटमार मेले का स्वरूप शायद कभी बदला नहीं जा सकेगा।
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परंपरा के नाम पर बीते कई वर्षों से पांढुर्ना और साबर गांव के बीच ये खूनी खेल जारी है। जिला प्रशासन कई बार इस खेल का स्वरूप बदलने के लिए जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर लगातार बैठकें आयोजित करता आ रहा है। लेकिन हाल ही में मेले में खुद जनप्रतिनिधि परंपरा के नाम पर जारी खूनी खेल का हिस्सा बनते दिखे। जिसे देखकर अब माना जा रहा है कि जब जनप्रतिनिधि खुद खेल में भाग ले रहे हैं तो इसके स्वरूप को बदलना मुश्किल है।
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विधायक निलेश उइके ने गोटमार मेले में पांढुर्णा पक्ष की ओर से पत्थरबाजी की। उन्होंने इस दौरान बताया कि वह क्षेत्रवासियों के साथ खड़े हैं एवं दशकों पूर्व की सभी परंपराओं में वह जनता जो चाहती है वही होना चाहिए इसका निर्वाहन करा रहे हैं । इससे पहले भाजपा विधायक स्वर्गीय रामराव कवडेटी भी गोटमार मेले को बंद करने को लेकर आयोजित की गई बैठक में विरोध किया था और कलेक्टर को यह कह दिया था कि यदि गोटमार मेला बंद किया जाएगा तो सबसे पहले पत्थर वही मारेंगे।
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गोटमार मेले की शुरुआत कब हुई इसके को लेकर सटीक जानकारी नहीं है, लेकिन इस खूनी खेल में अब तक ग्रामीणों के अनुसार गांव के 19 लोग जान गवां चुके हैं। वहीं, जिन जनप्रतिनिधियों को ऐसे जानलेवा खेल को बंद कराना चाहिए यदि वे ही इस खेल में शामिल होकर इसे परंपरा के निर्वाह का नाम देंगे तो गोटमार मेले का स्वरूप शायद कभी बदला नहीं जा सकेगा।
