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अद्भुत मिलन की रातः फूलों की पालकी में हरि से मिलने पहुंचे महाकाल, सौंपा सृष्टि का कार्यभार

Thu, 18 Nov 2021 01:41 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Thu, 18 Nov 2021 01:41 PM IST
सार

बुधवार की रात उज्जैन में अद्भुत मिलन हुआ। भगवान महाकाल श्री हरि से मिलने पहुंचे। हरि हर मिलन को देखने के लिए भक्त व्याकुल थे। देर रात को हरि हर मिलन सवारी निकली। कलेक्टर एसपी ने पालकी उठाई। पुलिस बैंड ने सलामी दी। 

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Night of wonderful meeting: Mahakal arrived to meet Hari in a palanquin of flowers, entrusted the task of creation
हरि-हर मिलन यात्रा के समापन हरि और हर का मिलन। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कार्तिक अगहन मास में निकलने वाली महाकाल की सवारी के अंतर्गत बुधवार का दिन बेहद खास रहा। देर रात करीब 11 बजे भगवान महाकाल श्रीहरि से मिलने पहुंचे। गाजे बाजे के साथ महाकाल भगवान की सवारी निकली जो प्रमुख मार्गों से होते हुए गोपाल मंदिर पहुंची। यहां हरि-हर मिलन की अद्भुत छटा बिखरी और भक्त भावविभौर हो गए। श्री हरि को सृष्टि का कार्यभार सौंपकर महाकाल ने देर रात को प्रस्थान किया।
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फूलों की पालकी में विराजे महाकाल - फोटो : अमर उजाला
कार्तिक अगहन मास के प्रति सोमवार को महाकाल की सवारी निकाली जाती है। इन सवारियों के अलावा एक विशेष  सवारी निकलती है जिसे हरि-हर मिलन कहा जाता है। बुधवार रात करीब 11 बजे हरि-हर मिलन हुआ। महाकाल मंदिर से निकलकर सवारी गोपाल मंदिर पहुंची। चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में भगवान महाकाल फूलों से सजी पालकी में विराजे। कलेक्टर आशीष सिंह और एसपी सत्येंद्र कुमार शुक्ल सहित अन्य अधिकारी व महाकाल मंदिर समिति के प्रशासक सवारी के आगे चल रहे थे। कलेक्टर एसपी ने पालकी को उठाया। पुलिस बैंड ने सलामी दी और अलग अलग मार्गों से होते हुए सवारी गोपाल मंदिर पहुंची। मंदिर पहुंचते ही पालकी का भव्य स्वागत किया गया। गोपाल मंदिर में भगवान द्वारकाधीश और महाकाल की विधि-विधान से पूजा अर्चना की। भगवान महाकाल का पूजन हरिप्रिया तुलसी दल से तथा भगवान विष्णु को शिवप्रिय बिल्व पत्र अर्पित किए गए। इस प्रकार दोनों की प्रिय वस्तुओं का एक-दूसरे को भोग लगाया गया।

श्री हरि को सौंपते हैं सृष्टि का भार
हरि-हर मिलन के पीछे की कहानी पुराणोक्त है। पुराणों के अनुसार देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी तक भगवान विष्णु पाताल लोक में राजा बली के यहां विश्राम करने जाते हैं, इसलिए उस समय संपूर्ण सृष्टि की सत्ता का भार शिव के पास होता है। वैकुंठ चतुर्दशी को भगवान महाकाल हरि से मिलने जाते हैं और सृष्टि का कार्यभार उन्हें सौंपते हैं। इसके तहत महाकालेश्वर मंदिर के सभा-मंडप से भगवान महाकालेश्वर की सवारी हरि-हर मिलन हेतु गोपाल मंदिर जाती है। भगवान महाकालेश्वर एवं द्वारकाधीश का पूजन होता है। इस अद्भुत मिलन के साक्षी बनने के लिए नगरवासी आतुर रहते हैं और सवारी का स्वागत कर इस मिलन के दर्शन करते हैं।
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