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MP News: जवाब पेश न करने पर हाईकोर्ट ने लगाई 10 हजार रुपये की कॉस्ट, गलती करने वाले अधिकारी से वसूली के निर्देश
Sun, 22 May 2022 08:53 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sun, 22 May 2022 08:53 AM IST
सार
हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस विशाल धगट की युगलपीठ ने जवाब पेश नहीं करने पर दस हजार रुपये की कॉस्ट लगाई है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि गलती करने वाले अधिकारी से कॉस्ट की राशि वसूली जाये।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कई अवसर देने के बाद भी जवाब पेश नहीं किए जाने को गंभीरता से लेते हुए 10 हजार रुपये की कॉस्ट लगाई है और गलती करने वाले अधिकारी से वसूल करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस विशाल धगट की युगलपीठ ने जवाब पेश नहीं करने पर दस हजार रुपये की कॉस्ट लगाई है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि गलती करने वाले अधिकारी से कॉस्ट की राशि वसूली जाये।
दमोह निवासी सेवकराम की तरफ से दायर याचिका में कोरोना काल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत की गयी नियुक्तियों को चुनौती दी गयी थी। याचिका में आरोप लगाते हुए कहा गया था कि नियुक्तियों में प्रचलित आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया है। इसके अलावा जमकर भ्रष्टाचार भी किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि मैरिट लिस्ट में होने के बावजूद भी उससे पचास हजार रुपये की रिश्वत मांगी गयी थी। रिश्वत नहीं देने पर वरीयत क्रम में 129 नम्बर पीछे वाले को नियुक्ति प्रदान कर दी गयी।
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प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोई ने नियुक्ति याचिका के अंतिम आदेश के अधीन रहने के आदेश जारी किये थे। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने पाया कि कई अवसर दिये जाने के बावजूद भी जवाब पेश नहीं किया गया है। युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए दस हजार रुपये की कॉस्ट लगाते हुए उक्त आदेश जारी किये।
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हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस विशाल धगट की युगलपीठ ने जवाब पेश नहीं करने पर दस हजार रुपये की कॉस्ट लगाई है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि गलती करने वाले अधिकारी से कॉस्ट की राशि वसूली जाये।
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दमोह निवासी सेवकराम की तरफ से दायर याचिका में कोरोना काल में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत की गयी नियुक्तियों को चुनौती दी गयी थी। याचिका में आरोप लगाते हुए कहा गया था कि नियुक्तियों में प्रचलित आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया है। इसके अलावा जमकर भ्रष्टाचार भी किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि मैरिट लिस्ट में होने के बावजूद भी उससे पचास हजार रुपये की रिश्वत मांगी गयी थी। रिश्वत नहीं देने पर वरीयत क्रम में 129 नम्बर पीछे वाले को नियुक्ति प्रदान कर दी गयी।
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प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोई ने नियुक्ति याचिका के अंतिम आदेश के अधीन रहने के आदेश जारी किये थे। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने पाया कि कई अवसर दिये जाने के बावजूद भी जवाब पेश नहीं किया गया है। युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए दस हजार रुपये की कॉस्ट लगाते हुए उक्त आदेश जारी किये।
