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भोपाल: गिद्ध के अंडों को सेने के लिए कृत्रिम ऊष्मायन सुविधा विकसित करने पर हो रहा विचार
Sun, 22 Nov 2020 06:58 PM IST
योगेश साहू
पीटीआई, भोपाल।
पीटीआई, भोपाल।
Published by: योगेश साहू
Updated Sun, 22 Nov 2020 06:58 PM IST
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गिद्ध (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
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मध्य प्रदेश वन विभाग गिद्धों की आबादी को बढ़ाने के लिए यहां स्थित गिद्ध सरंक्षण एवं प्रजनन केंद्र में लगातार प्रयासरत है। इसके तहत यहां गिद्ध के अंडों को सेने के लिए कृत्रिम ऊष्मायन (इन्क्युबेशन) सुविधा विकसित करने पर विचार किया जा रहा है।
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भोपाल स्थित वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के उप निदेशक ए के जैन ने रविवार को बताया कि 2019 में मध्य प्रदेश में की गई पक्षी गणना के मुताबिक प्रदेश में 8,397 गिद्ध थे, जो भारत के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है।
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उन्होंने कहा कि धरती को साफ रखने में गिद्धों की महत्वपूर्ण भूमिका है, क्योंकि वे मरे हुए जानवरों को खाते हैं। लगभग दो दशक पहले इनकी संख्या काफी कम हो गई थी और इस प्रजाति के विलुप्त होने का खतरा पैदा हो गया था।
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उन्होंने बताया कि भोपाल के केरवा इलाके में वर्ष 2013 में गिद्ध सरंक्षण और प्रजनन केंद्र बनाया गया था और इसे बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और मध्य प्रदेश सरकार द्वारा संयुक्त तौर पर संचालित किया जा रहा है।
जैन ने बताया कि अंडों को सेने के लिए कृत्रिम ऊष्मायन सुविधा के वास्ते लगभग चार से पांच लाख रुपये की लागत से तीन या चार कमरों की जरुरत होगी। हम संरक्षण और प्रजनन केंद्र में इस सुविधा को विकसित करने के बारे में गंभीरता से विचार कर रहे हैं।’’ उन्होंने बताया कि प्रसव पूर्व और नवजात गिद्धों की मृत्यु दर लगभग 70 प्रतिशत है। इस प्रकार यह सुविधा इन पक्षियों की आबादी को बढ़ाने में सहायक होगी।
उन्होंने कहा कि केंद्र में नई सुविधा से हम इन पक्षियों की जीवित रहने की दर को बढ़ाकर 50-60 प्रतिशत करने की आशा रखते हैं। ऊष्मायन से मां की गोद की तरह अंडों से निकले चूजों को गर्माहट मिलती है। यह एक आधुनिक जीवन रक्षक उपकरण है। जैन ने बताया कि प्रजनन केंद्र की शुरुआत में गिद्धों के 23 जोड़ों (46 गिद्ध) को यहां लाया गया था और कई गिद्धों की मौत की बाद भी अब यहां इनकी संख्या बढ़कर 55 हो गई है।
