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मध्यप्रदेश: 43 साल की महिला की कोरोना से मौत, डॉक्टर बोले- शव को पीपीई किट पहनाकर ले जाओ

Sat, 26 Sep 2020 12:39 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 26 Sep 2020 12:39 PM IST
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MP 43 year old lady died of coronavirus doctors gave ppe kit to children in icu ambulance
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

कोरोना काल में मानवता के भी मरने के कई उदाहरण देखने को मिल रहे हैं। निजी अस्पताल हों या सरकारी, सभी जगह बेपरवाह सिस्टम अब लोगों को मार रहा है। कोलार की सर्वधर्म कॉलोनी निवासी 43 साल की संतोष रजक इसका ताजा शिकार हुईं हैं। वे दो दिनों तक आईसीयू बेड के लिए भटकती रहीं। जैसे-तैसे उन्हें बेड तो मिल गया लेकिन इलाज नहीं हो पाया। आखिर में गुरुवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। बीते 14 दिन में उनकी बेटी प्रियंका और बेटे हर्ष पर जो बीता उसे उन्हीं की जुबानी पढ़िए-

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मौत के बाद पीपीई किट देकर कहा- शव को पहनाओ और ले जाओ
संतोष रजक की बेटी ने बताया कि 12 सितंबर की शाम लगभग छह बजे मां को सांस लेने में परेशानी हुई तो हर्ष उन्हें सिद्धांता अस्पताल ले गया। यहां दिल का दौरा पड़ने के लक्षण बताए तो हम रात 10 बजे बंसल अस्पताल ले गए। यहां कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई, लेकिन यहां कोविड आईसीयू बेड नहीं होने पर अगले दिन दोपहर में हमें एंबुलेंस से जेके अस्पताल भेज दिया।
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बंसल में एक रात के इलाज का 41 हजार रुपये बिल भरा। जेके में भी आईसीयू बेड खाली नहीं थे, तो उन्होंने भर्ती नहीं किया। हमने जेपी अस्पताल फोन लगाकर आईसीयू बेड के बारे में पूछा तो पता चला यहां बेड खाली नहीं हैं। फिर हमें जेके से हमीदिया भेजा तो वहां रात नौ बजे तक बेड नहीं मिला। 
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यह भी पढ़ें- स्कूल पहुंच गई कोरोना पॉजिटिव शिक्षिका, स्टाफ क्वारंटीन


फोन पर पता चला की पीपुल्स अस्पताल में बेड खाली हैं तो हम वहां चले गए। यहां मरीज को भर्ती करने से पहले पांच दिन के 50 हजार रुपये जमा कराए। ये इलाज महंगा पड़ता इसलिए 14 सितंबर की सुबह कलेक्टर अविनाश लावनिया को आवेदन दिया। उनके दखल के बाद मां को दोपहर में जेपी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती किया गया। लेकिन इलाज के नाम पर खानापूर्ति हुई। 

रात में अक्सर ऑक्सीजन की सप्लाई बंद हो जाती। तब न डॉक्टर सुनते और न ही स्टाफ। 12 दिन इलाज के बाद गुरुवार को मां की मौत हो गई। तब भी किसी ने हाथ नहीं लगाया। हमें आईसीयू में बुलाकार पीपीई किट थमा दी और कहा खुद पहन लो और अपनी मां को पहना दो। मेरे भाई ने पीपीई किट पहनकर मां को पैकिंग बैग में रखा। फिर हम उन्हें एंबुलेंस से भदभदा विश्राम घाट लेकर गए।

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