भोपाल: ख़ौफ की वजह बनी पुलिस की मॉरल पुलिसिंग

एस. नियाज़ी/ भोपाल से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए Updated Sun, 02 Feb 2014 01:07 PM IST
moral policing
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के चिनार पार्क के नज़ारे आजकल कुछ बदले से है। यहां दोपहर में नज़र आने वाली लड़के-लड़कियों की भीड़ अब काफ़ी कम हो चुकी है। अलबत्ता चेहरे को दुपट्टे से छुपाये कुछ लड़कियां जरूर लड़कों के साथ मौजूद है। शहर के नौजवान लड़के लड़कियों में आजकल "निर्भया पेट्रोलिंग मोबाइल" का ख़ौफ छाया हुआ है।

लड़कियों की हिफाज़त के नाम पर शुरू की गई निर्भया पेट्रोलिंग मोबाइल ने अब शहर के ज्यादातर पार्कों और सार्वजनिक स्थानों में बैठे लड़के- लड़कियों को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया है।

भोपाल महिला पुलिस के द्वारा चलाई जा रही निर्भया पेट्रोलिंग मोबाइल ने कुछ वक़्त पहले इस पार्क में अचानक धावा बोल दिया, जिससे यहां बैठे लड़के लड़कियों में अफरातफ़री मच गई।

कुछ तो पार्क से भागने में कामयाब हो गए लेकिन जो लड़के पकड़ में आये उनसे उठक-बैठक लगवाई गई और लड़कियों से उनके परिवार वालों से बात कराई गई।

भोपाल निर्भया मोबाइल पेट्रोलिंग मोबाइल

इस अभियान का निशाना बने समीर ने बीबीसी को बताया, “आज के वक़्त में लड़के और लड़कियों की दोस्ती आम है और कोई गुनाह भी नही है। लेकिन इस तरह से आकर पूछताछ करना और उसके बाद हमसे बदतमीज़ी करने का अधिकार इन्हें किसने दिया है। हम पार्क में बैठकर बातचीत ही कर रहे थे, कोई ग़लत काम तो नही कर रहे थे।”

निर्भया पेट्रोलिंग मोबाइल की शुरुआत दिल्ली में चलती बस में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई युवती की याद में भोपाल में 16 दिसंबर, 2013 को की गई थी। इसका मक़सद शहर में महिलाओं और लड़कियों के ख़िलाफ हो रहे अपराधों पर रोक लगाना और अपराध के स्थान पर फ़ौरन पहुंचकर अपराधी को गिरफ़्तार करना था।

इस टीम की मदद लेने के लिये इनके नंबर लोगों को उपलब्ध कराए गए ताकि किसी भी अनहोनी के वक्त इन्हें बुलाया जा सकें। ये टीम सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक गश्त करती है और इसमें छह महिलायें शामिल है।

भटकाव

लेकिन अब ये टीम अपने मक़सद से भटकती हुई नज़र आ रही है। चिनार पार्क में दुपट्टे से मुंह छुपाए बैठी एक लड़की ने अपना नाम न बताने की शर्त पर कहा, “ जब सड़क पर लड़के लड़कियों को छेड़ते है या बदतमीज़ी करते है, तब हमें ये फ़ोर्स नज़र नही आती है। लेकिन हां पार्क या किसी स्थान में लड़के और लड़कियां दिख जाएं तो ये उनके ख़िलाफ़ फ़ौरन कारवाई करती है।”

बालाघाट से पढ़ाई के लिये आई सुमन किशोर भी हाल में निर्भया पेट्रोलिंग का निशाना बन चुकी है। वो कहती है, “ मेरे चेहरे से कपड़ा हटवाया गया और उसके बाद मेरे साथ पूछताछ की गई जैसे मैंने कोई चोरी की हो।”

बलात्कार के विरोध में प्रदर्शन

निर्भया पेट्रोलिंग मोबाइल की अगुवाई कर रही नमिता साहू कहती है, “हम किसी भी तरह से उन्हें परेशान नहीं कर रहे है, लेकिन हमारी कोशिश होती है कि अगर कोई लड़की ऐसे स्थान पर बैठी है जहां उसके साथ कोई अनहोनी हो सकती है तो हम उसे वहां से हटवाते है।”

दूसरी ओर भोपाल के पुलिस उप महानिरीक्षक श्रीनिवास वर्मा का कहना है कि इस गश्ती दल को समझा दिया गया है कि किसी को बेवजह परेशान न किया जाए।

श्रीनिवास वर्मा ने बीबीसी को बताया, “हमने उन्हें बुला कर बताया है कि पुलिस का काम किसी भी तरह से मॉरल पोलिसिंग का नहीं है। अगर लड़के-लड़कियां पार्क या दूसरे सार्वजनिक स्थान में बैठे हुए हैं तो पुलिस को इससे दिक़्कत नहीं होनी चाहिए।"

नाराज़गी

निर्भया पेट्रोलिंग मोबाइल के कामकाज से मध्य प्रदेश महिला आयोग भी नाराज़ है। महिला आयोग की अध्यक्ष उपमा राय कहती है, “न तो ये इनका काम है और न ही इन्हें इसका अधिकार है। पुलिस बल अपने कार्यक्षेत्र से बाहर जाकर काम कर रहा है। हमारे पास कोई भी शिकायत आती है तो हम तुरंत इनके ख़िलाफ कारवाई करेंगे।”

कुछ लोग पुलिस की इस कारवाई का समर्थन कर रहे है। संस्कृति बचाओ मंच के प्रमुख चंद्रशेखर तिवारी कहते है, “निर्भया पेट्रोलिंग मोबाइल’ बहुत अच्छा काम कर रही है। मुझे लगता है कि जिस तरह युवा जोड़े शहर के पार्कों में अलिंगन करते नज़र आते हैं, उससे बुजुर्गों के लिए वहां जाना मुश्किल होता जा रहा है।”

bhopal

बलात्कार में अव्वल

देश में सबसे अधिक बलात्कार मध्यप्रदेश में होते हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो के आकड़ों से पता चलता है कि 2012 में देश भर में बलात्कार के 24,923 मामले सामने आए थे। इन में से 3,425 मामले अकेले मध्य प्रदेश के है।

सामाजिक कार्यकर्ता रोली शिवहरे कहती है, “मध्य प्रदेश कई वर्षों से महिलाओं के ख़िलाफ अपराधों में नंबर वन बना हुआ है। लेकिन सरकार कुछ नहीं कर पा रही है। कुछ गंभीर कदम उठाने के बजाए यहां के मंत्री लड़कियों के कपड़ों को ही इसके लिए जिम्मेदार मानते आए है।”

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