मैहर: पहली बारिश में 55 लाख का पुल धराशायी, एक सप्ताह पहले ही धंसने लगे थे पिलर; अब टूटा स्लैब
मैहर में बुढेरुआ-जरियारी मार्ग पर 55 लाख रुपये की लागत से बना पुल पहली बारिश में धराशायी हो गया। एक सप्ताह पहले पिलरों में धंसाव दिखा था। पुल टूटने से दो दर्जन से अधिक गांवों का आवागमन प्रभावित हुआ है और तकनीकी जांच की मांग उठी है।
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बुढेरुआ-जरियारी मार्ग पर बरगी नहर के ऊपर करीब 55 लाख रुपये की लागत से बनाया गया पुल पहली ही बारिश में धराशायी हो गया। पुल टूटने से क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क प्रभावित हो गया है। बताया जा रहा है कि पुल के पिलरों में करीब एक सप्ताह पहले ही चार इंच तक धंसाव दिखाई देने लगा था, लेकिन समय रहते इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। अब पुल का स्लैब टूटकर नीचे जा गिरा है।
पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद निर्माण की गुणवत्ता और इस्तेमाल की गई सामग्री को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मौके पर टूटे स्लैब में बाहर निकली सरियों को देखकर ग्रामीण निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि पुल निर्माण में स्वीकृत ड्राइंग और तकनीकी मापदंडों के अनुरूप सरियों का इस्तेमाल नहीं किया गया।
16 एमएम की सरिया नहीं मिलने का दावा
मौके पर टूटे स्लैब में दिखाई दे रही सरियों को लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें 10 से 12 एमएम की सरिया का इस्तेमाल हुआ है, जबकि 16 एमएम की सरिया एक भी दिखाई नहीं दे रही है। इसके अलावा सरियों के बीच की दूरी भी निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं होने की बात कही जा रही है। हालांकि सरिया और अन्य निर्माण सामग्री की वास्तविक गुणवत्ता तथा क्षमता का निर्धारण तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगा।
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निर्माण तकनीक पर भी उठे सवाल
पुल निर्माण को लेकर कई तकनीकी खामियों के आरोप भी सामने आए हैं। आरोप है कि पुल में पेडिस्ट्रल की व्यवस्था नहीं की गई और एबटमेंट भी उचित तरीके से तैयार नहीं किया गया। स्लैब की कास्टिंग के बाद उसके नीचे की मिट्टी को निर्धारित तरीके से कॉम्पैक्ट नहीं किए जाने की बात भी कही जा रही है।
इसके अलावा पुल पर रेलिंग या रेल गार्ड नहीं लगाए जाने और स्लैब की कास्टिंग के बाद पर्याप्त स्लोप नहीं दिए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण के दौरान इन तकनीकी पहलुओं पर ध्यान दिया गया होता तो पहली ही बारिश में पुल की यह स्थिति नहीं होती।
बारिश ने खोली निर्माण की गुणवत्ता की पोल?
क्षेत्र में हुई पहली तेज बारिश के बाद पुल के धराशायी होने से निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस पुल पर लाखों रुपये खर्च किए गए, वह पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त हो गया। ऐसे में इसकी गुणवत्ता की जांच बेहद जरूरी है।
फिलहाल पुल टूटने के कारण बुढेरुआ-जरियारी मार्ग से जुड़े दो दर्जन से अधिक गांवों के लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से पुल निर्माण की तकनीकी जांच कराने, जिम्मेदारी तय करने और आवागमन के लिए जल्द वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
तकनीकी जांच के बाद सामने आएगी वास्तविकता
पुल निर्माण में निर्धारित मापदंडों का पालन हुआ था या नहीं, सरियों की गुणवत्ता और मात्रा कितनी थी तथा पुल के धंसने की वास्तविक वजह क्या रही, यह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। यदि जांच में निर्माण में अनियमितता या मानकों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है।
