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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Madhya Pradesh Vidhan Sabha Chunav result 2018: Who will be CM Kamalnath or Jyotiraditya

मध्यप्रदेश में किसके सिर सजेगा मुख्यमंत्री का ताज- कमलनाथ, ज्योतिरादित्य या कोई तीसरा?

Wed, 12 Dec 2018 03:32 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Dec 2018 03:32 PM IST
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Madhya Pradesh Vidhan Sabha Chunav result 2018: Who will be CM Kamalnath or Jyotiraditya
कौन बनेगा मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री? - फोटो : Amar Ujala
अब जब ये तय हो चुका है कि सपा-बसपा के सहारे कांग्रेस मध्यप्रदेश में सरकार बनाने जा रही है तो अगला सवाल ये उठता है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी। क्या वो पार्टी का वरिष्ठ चेहरा और तजुर्बेकार कमलनाथ होंगे या ये जिम्मेदारी युवा और राजनीतिक विरासत साथ लेकर चलने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया को दी जाएगी। 
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कमलनाथ 

कमलनाथ, छिंदवाड़ा से सांसद हैं। वो नौ बार यहां से चुने गए।  कुछ महीने पहले जब अरुण यादव से पार्टी की कमान छीनकर कमलनाथ को दी गई तो इसको लेकर काफी चर्चा हुई। कुछ धड़ों में नाराजगी भी दिखी। लेकिन आज पीछे मुड़कर देखा जाए तो ये पार्टी के लिए खरा सौदा साबित हुआ। कमलनाथ ने पूरे प्रदेश में घूम-घूमकर अलग-अलग तबकों से बात की, मुलाकात की। जहां जरूरत थी वहां लोगों को समझाया। पुराने रिश्ते फिर खंगाले। नए रिश्तों को बनाने की कोशिश की। हालांकि, इन कोशिशों में कुछ वायरल होते वीडियो ने स्पीड ब्रेकर का काम भी किया लेकिन कांग्रेस की गाड़ी धीमे-धीमे ही सही आगे खिसकती रही। 
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कमलनाथ छिंदवाड़ा से शानदार जीत हासिल करते हुए 34 साल की उम्र में लोकसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह पूरी तरह छिंदवाड़ा के हो गए। वह इस सीट से 9 बार जीते, हालांकि 1997 में सिर्फ एक बार उन्हें सुंदरलाल पटवा के हाथों हार मिली।
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केंद्रीय मंत्री रहते उन्होंने छिंदवाड़ा में कई काम कराए जिसका प्रतिसाद उन्हें हर बार चुनाव में जीत के रूप में मिला। 2014 में भी उन्होंने तब चुनाव जीता जब कांग्रेस की हालत बेहद बुरी थी और वह महज 44 सीटों पर ही सिमट गई थी।
 

ज्योतिरादित्य सिंधिया

मध्यप्रदेश में इस जीत के बाद ज्योतिरादित्य के तेवर वैसे ही हैं जो एक बड़े मुकाबले में फतह के बाद होते हैं। उन्होंने कहा कि अब वो फूलमाला पहन सकते हैं। दरअसल, सिंधिया ने शपथ ली थी कि जब तक वो भाजपा सरकार को हटा नहीं देते, सिर्फ सूत की माला पहनेंगे। 

सिंधिया युवा हैं, उर्जा से भरे हैं। पिता माधवराव सिंधिया की विरासत के साथ आते हैं। इस बार उनके कंधों पर बतौर चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष, एक बड़ी जिम्मेदारी थी। जिस तरह का प्रचार अभियान चलाने में कांग्रेस कामयाब रही, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि सिंधिया ने अपनी जिम्मेदारी बखबूी निभाई। गुना से सांसद, सिंधिया अपनी हर रैली में शिवराज पर मारक हमलों के लिए चर्चित रहे। उन्हें 'कलियुग का कंस मामा' कह कर जोरदार हमला किया। 


पिता माधवराव सिंधिया की मौत के ढाई महीने बाद, साल 2001 में 17 दिसंबर को ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल हुए थे। तब सिंधिया की उम्र 30 साल के करीब थी। 17 दिसंबर, 2001 को ज्योतिरादित्य अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस मुख्यालय- 24 अकबर रोड पहुंचे थे। धीरे-धीरे वो मध्यप्रदेश में पार्टी का अहम चेहरा बन गए। राजसी ठसक जाते-जाते थोड़ा वक्त जरूर लगा, जो अब भी यदाकदा दिख जाती है लेकिन वो जनता से कुछ हद तक राब्ता कायम करने में कामयाब रहे। उन्हें पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी का करीबी भी माना जाता है।

इन दो चेहरों में चुनाव दिखता तो सीधा है लेकिन इतना सीधा है नहीं। एक तरफ तजुर्बा और सियासी सूझबूझ है तो दूसरी तरफ जोश, जज्बा और ऊर्जा। 
 
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