मध्यप्रदेश चुनाव परिणाम: क्या जनता ने भाजपा को पूरी तरह नकार दिया, वोट शेयर ये बताते हैं
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पांचों राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आ गए हैं। लोकसभा चुनाव 2019 से पहले इन चुनावों को सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है। पांच में से तीन राज्यों में कांग्रेस ने भाजपा को करारी मात दी है। कांग्रेस ने इन चुनावों में जोरदार प्रदर्शन किया और भाजपा के हाथ से मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान छीन लिया है। मध्यप्रदेश में भाजपा लगातार 15 वर्षों से शासन कर रही थी। लेकिन इस बार जनता ने कांग्रेस को सत्ता सौंपी है। लेकिन अहम सवाल यह है कि जनता ने कांग्रेस का कितना साथ दिया और भाजपा से कितनी दूरी बनाई। आइए आंकड़ों के जरिए समझते हैं पूरी तस्वीर।
पूर्ण बहुमत से दो कदम दूर रही कांग्रेस
मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस ने भाजपा से ज्यादा सीटें जीती हैं। हालांकि यहां कांग्रेस बहुमत से बस दो कदम दूर रह गई। कांग्रेस 114 सीटों के साथ पहले स्थान पर आई और 109 सीटों के साथ भाजपा दूसरे नंबर की पार्टी बनी। वहीं बहुजन समाजवादी पार्टी (बसपा) को 2, समाजवादी पार्टी (सपा) को 1 और 4 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों के खाते में आई। 230 विधानसभा सीटों वाली राज्य विधानसभा में बहुमत के लिए 116 सीटों की जरूरत होती है।
वोट प्रतिशत क्या रहा
| पार्टी | मत प्रतिशत |
| भाजपा | 41.0 |
| कांग्रेस | 40.09 |
| निर्दलीय | 5.8 |
| बसपा | 5.0 |
| जीजीपी | 1.8 |
| सपा | 1.3 |
| नोटा | 1.4 |
क्या जनता ने भाजपा को नकार दिया
अगर हम वोट प्रतिशत पर नजर डालें तो पाएंगे 2013 के विधानसभा चुनाव के मुकाबले में 2018 में निश्चित तौर पर भाजपा का मत प्रतिशत कम हुआ है और कांग्रेस की हिस्सेदारी बढ़ी है। इस चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के मिले मत प्रतिशत में बहुत ज्यादा का अंतर नहीं है। भाजपा को कांग्रेस से 0.1 फीसदी मत ज्यादा मिले हैं।
चुनाव आयोग के आंकड़ों पर गौर पर करें तो जनता के रुख का अंदाजा लगता है। साल 2003 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 44.88 फीसदी वोट मिले थे। वहीं 2018 में ये आंकड़ा 41 फीसदी हो गया है। यानि भाजपा को वोट शेयर में 3.87 का नुकसान हुआ है।
वहीं कांग्रेस को साल 2003 के विधानसभा चुनाव में 36.38 फीसदी वोट मिले थे। जो 2018 में बढ़कर 40.9 फीसदी हो गया है। यानि कांग्रेस को 4.52 फीसदी वोट शेयर का फायदा हुआ है। जनता का कांग्रेस पर भरोसा बढ़ा है।
पिछले साल से कितना अंतर
| पार्टी | मत प्रतिशत - 2013 | मत प्रतिशत - 2018 |
| भाजपा | 44.87 | 41.0 |
| कांग्रेस | 36.38 | 40.9 |
| निर्दलीय | 5.38 | 5.8 |
| बसपा | 6.29 | 5.0 |
| जीजीपी | 1 | 1.8 |
| सपा | 0.3 | 1.3 |
| नोटा | - | 1.4 |
इस साल अन्य राजनीतिक दलों को मिले वोट प्रतिशत पर नजर डालें तो निर्दलीय प्रत्याशियों को 5.8 फीसदी मत मिले, जो पिछले चुनाव में मिले 5.38 फीसदी मत से 0.42 फीसदी ज्यादा है। बसपा को वोट शेयर में 1.29 फीसदी का नुकसान हुआ है। इस बार बसपा को 5 फीसदी मत मिले हैं जबकि पिछले चुनाव में 6.29 फीसदी मत मिले थे। गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने 0.8 फीसदी वोट शेयर के नुकसान के साथ 1.8 फीसदी हासिल किए। पिछले चुनाव में सपा को 0.3 फीसदी मत मिले थे जबकि इस चुनाव में सपा को एक फीसदी वोट शेयर का फायदा मिला और उसने 1.3 फीसदी मत हासिल किए। इस चुनाव में 1.4 फीसदी लोगों ने नोटा के अधिकार का इस्तेमाल किया यानि किसी भी राजनीतिक दल के उम्मीदवार को अपना वोट नहीं दिया।
