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मध्यप्रदेश: उज्जैन में शुरू हुआ संस्कृत फिल्म फेस्टिवल, सात दिनों तक दिखाई जाएंगी अलग-अलग संस्कृत फिल्में
Wed, 23 Feb 2022 01:50 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Wed, 23 Feb 2022 01:50 PM IST
सार
मध्यप्रदेश के उज्जैन में पहली बार संस्कृत फिल्म फेस्टिवल शुरू हुआ है। यह सात दिनों तक चलेगा। सात दिन तक अलग-अलग संस्कृत फिल्में दिखाई जाएंगी। मप्र के मंत्री मोहन यादव ने कहा है कि महाकवि कालिदास व सम्राट विक्रमादित्य पर संस्कृत फिल्म बनाई जाएगी।
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संस्कृत फिल्म फेस्टिवल के शुभारंभ अवसर पर संबोधित करते मंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अगर आप संस्कृत को पसंद करते हैं और संस्कृत फिल्में देखना चाहते हैं तो उज्जैन चले आइये। यहां राष्ट्रीय संस्कृत चलचित्र उत्सव (फिल्म फेस्टिवल) की शुरुआत हुई है। मध्यप्रदेश में पहली बार इस तरह का आयोजन हो रहा है। कालिदास संस्कृत अकादमी के अभिरंग नाट्यगृह में चल रहे इस उत्सव का आयोजन महर्षि पाणिनि संस्कृत एवं वैदिक विश्वविद्यालय और कालिदास संस्कृत अकादमी संस्कृति परिषद द्वारा किया जा रहा है।
संस्कृत चलचित्र उत्सव का शुभारंभ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने संस्कृत नाट्य विधा को समर्पित नांदी वाक्य और विश्वविद्यालय कुलगान के गायन से हुआ। शुभारंभ में जीवी अय्यर द्वारा निर्देशित फिल्म शंकराचार्य का प्रदर्शन किया गया। यह फिल्म संस्कृत सीख रहे बटुक और कुछ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, प्राध्यापकों एवं संस्कृत जानने-समझने वालों ने देखी। कला समीक्षकों के अनुसार इस फिल्म का निर्माण 1983 में हुआ था। इसका संगीत एम. बालमुरली कृष्ण ने दिया था, जो पूरी फिल्म को बांधे रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके महत्वपूर्ण पात्र जो दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ते हैं, वे हैं जीएल अय्यर, एमवी नारायण राव, लीला नारायण राव और सर्वदमन डी. बैनर्जी आदि। आदिशंकराचार्य के जीवन दर्शन को समझने के लिए यह फिल्म मील का पत्थर है। इसमें संस्कृत उच्चारण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
कालिदास और सम्राट विक्रमादित्य पर बनाई जाएगी संस्कृत फिल्म
सात दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का शुभारंभ करते हुए मप्र के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन की संस्कृति एवं संस्कृत भाषा को समाज में पुनः प्रतिष्ठित करने और प्रयोग रूप से व्यवहार उपयोगी बनाने में महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय और कालिदास संस्कृत अकादमी की भूमिका महत्वपूर्ण है। संस्कृत फिल्म निर्माण में मप्र और उज्जैन भी अपना योगदान देगा। महाकवि कालिदास और सम्राट विक्रमादित्य पर संस्कृत फिल्म बनाई जाएगी। अध्यक्षता कर रहे पाणिनि विवि के कुलपति आचार्य विजयकुमार सीजी ने कहा कि मप्र में ऐसे आयोजन संस्कृत भाषा, साहित्य, संस्कृत नाट्य व अभिनय के क्षेत्र में कौशल विकास के साथ साथ रोजगार के अवसर भी उत्पन्न करेंगे। विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कार्यपरिषद सदस्य राजेंद्र झालानी, सुरेश वाडिया, डॉ. विद्या जोशी, किरण शर्मा का सम्मान किया। इस दौरान कुलसचिव डॉ. दिलीप सोनी, समन्वयक व कालिदास अकादमी के निदेशक डॉ. संतोष पंड्या, डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. मनमोहन उपाध्याय, डॉ. तुलसीदास परोहा, डॉ. शुभम शर्मा, डॉ. अखिलेश द्विवेदी, डॉ. संकल्प मिश्र ने भागीदारी की।
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23 से 28 तक दिखाई जाएंगी ये फिल्में
चलचित्र उत्सव में 23 फरवरी को निर्देशक विनोद मंकर की फिल्म प्रियमानसम् दिखाई जाएगी। 24 फरवरी को निर्देशक पीके अशोकन की फिल्म अनुरक्ति, 25 फरवरी को निर्देशक सुरेश गायत्री की फिल्म मधुरस्मितम्, 26 फरवरी को निर्देशक निधीश गोपी की फिल्म प्रतिकृति, 27 फरवरी को निर्देशक जीवी अय्यर की फिल्म भगवद गीता, 28 फरवरी को निर्देशक सुरेश शास्त्री की फिल्म मुद्राराक्षसम् दिखाई जाएगी। सभी फिल्में शाम 5.30 बजे शुरू होंगी।
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संस्कृत चलचित्र उत्सव का शुभारंभ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने संस्कृत नाट्य विधा को समर्पित नांदी वाक्य और विश्वविद्यालय कुलगान के गायन से हुआ। शुभारंभ में जीवी अय्यर द्वारा निर्देशित फिल्म शंकराचार्य का प्रदर्शन किया गया। यह फिल्म संस्कृत सीख रहे बटुक और कुछ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों, प्राध्यापकों एवं संस्कृत जानने-समझने वालों ने देखी। कला समीक्षकों के अनुसार इस फिल्म का निर्माण 1983 में हुआ था। इसका संगीत एम. बालमुरली कृष्ण ने दिया था, जो पूरी फिल्म को बांधे रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके महत्वपूर्ण पात्र जो दर्शकों पर अपनी छाप छोड़ते हैं, वे हैं जीएल अय्यर, एमवी नारायण राव, लीला नारायण राव और सर्वदमन डी. बैनर्जी आदि। आदिशंकराचार्य के जीवन दर्शन को समझने के लिए यह फिल्म मील का पत्थर है। इसमें संस्कृत उच्चारण पर विशेष ध्यान दिया गया है।
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कालिदास और सम्राट विक्रमादित्य पर बनाई जाएगी संस्कृत फिल्म
सात दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का शुभारंभ करते हुए मप्र के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उज्जैन की संस्कृति एवं संस्कृत भाषा को समाज में पुनः प्रतिष्ठित करने और प्रयोग रूप से व्यवहार उपयोगी बनाने में महर्षि पाणिनि संस्कृत विश्वविद्यालय और कालिदास संस्कृत अकादमी की भूमिका महत्वपूर्ण है। संस्कृत फिल्म निर्माण में मप्र और उज्जैन भी अपना योगदान देगा। महाकवि कालिदास और सम्राट विक्रमादित्य पर संस्कृत फिल्म बनाई जाएगी। अध्यक्षता कर रहे पाणिनि विवि के कुलपति आचार्य विजयकुमार सीजी ने कहा कि मप्र में ऐसे आयोजन संस्कृत भाषा, साहित्य, संस्कृत नाट्य व अभिनय के क्षेत्र में कौशल विकास के साथ साथ रोजगार के अवसर भी उत्पन्न करेंगे। विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कार्यपरिषद सदस्य राजेंद्र झालानी, सुरेश वाडिया, डॉ. विद्या जोशी, किरण शर्मा का सम्मान किया। इस दौरान कुलसचिव डॉ. दिलीप सोनी, समन्वयक व कालिदास अकादमी के निदेशक डॉ. संतोष पंड्या, डॉ. सीमा शर्मा, डॉ. मनमोहन उपाध्याय, डॉ. तुलसीदास परोहा, डॉ. शुभम शर्मा, डॉ. अखिलेश द्विवेदी, डॉ. संकल्प मिश्र ने भागीदारी की।
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23 से 28 तक दिखाई जाएंगी ये फिल्में
चलचित्र उत्सव में 23 फरवरी को निर्देशक विनोद मंकर की फिल्म प्रियमानसम् दिखाई जाएगी। 24 फरवरी को निर्देशक पीके अशोकन की फिल्म अनुरक्ति, 25 फरवरी को निर्देशक सुरेश गायत्री की फिल्म मधुरस्मितम्, 26 फरवरी को निर्देशक निधीश गोपी की फिल्म प्रतिकृति, 27 फरवरी को निर्देशक जीवी अय्यर की फिल्म भगवद गीता, 28 फरवरी को निर्देशक सुरेश शास्त्री की फिल्म मुद्राराक्षसम् दिखाई जाएगी। सभी फिल्में शाम 5.30 बजे शुरू होंगी।
