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मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने दो मामलों में स्वसंज्ञान लेकर संबंधितों से समय-सीमा में जवाब मांगा

Wed, 15 Dec 2021 06:43 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 15 Dec 2021 06:43 PM IST
सार

आदिवासी बालिका को उपचार नहीं मिल पाने पर आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन ने मुख्य सचिव व स्वास्थ्य सचिव से पूछा- ऐसे गरीब व्यक्तियों के इलाज की क्या व्यवस्था है? साथ ही एक अन्य मामले में भी जानकारी मांगी है।
 

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Madhya Pradesh Human Rights Commission took cognizance in two cases and sought response from the concerned in time-limit
अदालत ने आरोपियों पर 22-22 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। - फोटो : Social Media

विस्तार

आदिवासी बालिका को उपचार नहीं मिल पाने पर आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति नरेन्द्र कुमार जैन ने मुख्य सचिव व स्वास्थ्य सचिव से पूछा- ऐसे गरीब व्यक्तियों के इलाज की क्या व्यवस्था है? साथ ही एक अन्य मामले में भी जानकारी मांगी है।
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जानकारी के अनुसार विदिशा जिले के गंजबासौदा में बीते मंगलवार को ग्राम चैरावर टपरा निवासी मंगल आदिवासी ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें उन्होंने अपनी पुत्री लक्ष्मी आदिवासी के पेट में जन्मजात छिद्र होने के कारण उसके इलाज की व्यवस्था कराए जाने की मांग की थी।
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मंगल ने बताया कि मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण कर पाता है। उसके पास न तो गरीबी रेखा का राशन कार्ड है, न ही आयुष्मान कार्ड है। उसकी एक पुत्री के जन्म के समय डॉक्टरों ने कहा था कि जब पुत्री दो-ढाई साल की हो जाएगी, तब इस का ऑपरेशन संभव हो सकेगा। चूंकि उसकी पुत्री अब दो-ढाई साल की हो गई है। इसलिए अब उसकी पुत्री को ऑपरेशन की आवश्यकता है। परंतु वह इतना सक्षम नहीं है कि अपनी पुत्री का ऑपरेशन करा सके।
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मामले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने मुख्य सचिव मप्र शासन, सचिव मप्र शासन, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, भोपाल सहित कलेक्टर एवं मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी, विदिशा से एक माह में तथ्यात्मक प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने मुख्य सचिव तथा स्वास्थ्य सचिव से यह भी पूछा है कि ऐसे गरीब व्यक्तियों के इलाज की क्या व्यवस्था है?
 
जीप पर लगा मानवों का ‘छत्ता‘
मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने आज एक समाचार पत्र में झाबुआ जिले से प्रकाशित एक छायाचित्र पर संज्ञान लिया है। छपी तस्वीर में ग्रामीण इलाकों में परिवहन की विकट समस्या बयां की गई है। फोटो में दिख रहा है कि झाबुआ जिले के रानापुर क्षेत्र में लोक परिवहन की सुविधाएं नहीं होने से ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली छात्र-छात्राओं को भी रोजाना जान जोखिम में डालकर अत्यंत विपरीत दशाओं में यात्राएं करनी पड़ती है।


मले में संज्ञान लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने परिवहन आयुक्त, ग्वालियर सहित पुलिस अधीक्षक एवं जिला परिवहन अधिकारी, झाबुआ से तीन सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है। आयोग ने इन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रकाशित छायाचित्र वाले वाहन पर कार्रवाई कर आयोग को रिपोर्ट भेजें। साथ ही इनसे यह भी पूछा है कि ऐसे वाहनों पर नियंत्रण कैसे और कौन करता है?
 
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