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मध्य प्रदेश: लाखों का मकान आंगनबाड़ी के लिए दे रहा एक पिता, विभाग ने नहीं लिया तो सीएम से की शिकायत
Wed, 15 Dec 2021 08:15 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 15 Dec 2021 08:15 PM IST
सार
सीहोर में एक पीड़ित पिता ने महिला बाल विकास विभाग को अपना पक्का मकान आंगनबाड़ी के लिए दान करने की सूचना मकान पर चिपका दी है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मकान अधिगृहीत नहीं किए जाने पर सीएम हेल्प लाइन पर शिकायत भी दर्ज कराई है।
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आंगनबाड़ी के लिए दान देना चाहते हैं मकान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एक पीड़ित पिता ने महिला बाल विकास विभाग को अपना पक्का मकान आंगनबाड़ी के लिए दान करने की सूचना मकान की दीवार पर चिपका दी है। पिता का यह कदम चर्चा में बना हुआ है। पीड़ित पिता ने 100 रूपये के स्टांप पर इस बात की नोटरी के साथ घोषणा भी की है। यही नहीं महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा मकान अधिगृहीत नहीं किए जाने पर सीएम हेल्प लाइन 181 पर शिकायत भी दर्ज कराई है।
इस अजीब मामले को लेकर स्वयं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी उलझन में बने हुए हैं। विभाग के पास इस तरह से मकान लेने की कोई पॉलिसी नहीं है।
समाज से त्रस्त हूं, इसलिए उठाया यह कदम
सीहोर शहर के खटीक मोहल्ला अम्बेडकर नगर वार्ड क्रमांक 11 में स्थित मकान में रहने वाले जानी सोनकर ने कहा कि मैंने 22 साल पहले अन्य समाज की महिला से प्रेम विवाह कर लिया था। तब मुझे समाज से बेदखल कर दिया गया था। बड़ी बेटी की शादी भी समाज में होने नहीं दी। जिस के बाद कुछ दरिंदों ने मिलकर मेरी नाबालिग बेटी की आबरू लूट ली। मुझे भी छुरा मारकर लहूलुहान कर दिया। कानून ने गुनाहगारों को जमानत दे दी। जिसके बाद घर में हमारा अब दम घुट रहा है। अब मोहल्ले में इज्जत नहीं बची है। मुझे मेरी पत्नी व बच्चों को ताने देकर मानसिक प्रताडऩा दी जा रही है।
बच्चियां बने होशियार, घटनाओं की नहीं हो शिकार, इसलिए दान कर रहे मकान
इस मकान को हमें बेचना नहीं है, किसी को निजी रूप से देना भी नही है। इसलिए 35 गुना 60 क्षेत्रफल वाला करीब 25 लाख का मकान शासन को आंगनबाड़ी खोलने के लिए दे रहे हैं। जिससे बच्चों और महिलाओं के लिए बेहतर काम हो सकें, और बच्चियां बचपन से ही होनहार बनें। अनुसूचित जाति के परिवार के साथ हुई घटना में शासन के द्वारा दी जाने वाली मदद राशि भी हम लेना नहीं चाहते हैं। इसे भी वापस शासन को बच्चियों के कल्याण के लिए देना चाहते हैं। पुलिस प्रशासन ने घटना के समय पूरा सहयोग किया है। कानून और सरकार से कोई नाराजगी नहीं है। बस मुख्यमंत्री से एक ही प्रार्थना है। जमानत पर छूटे आरोपियों को कड़ी सजा दिलाई जाए।
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विभाग उलझन में... क्या करें
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी प्रफुल्ल खत्री ने बताया कि सीधे पट्टे का मकान विभाग इस तरह से दान नहीं ले सकता है। इस मामले में हम वरिष्ठ अधिकारियों से सलाह ले रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन पर भी जवाब भेजा गया है। दानदाता अगर बिना विभागीय नामातंरण के ही मकान कार्यालय या फिर आंगनबाड़ी के लिए उपलब्ध कराता है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है।
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इस अजीब मामले को लेकर स्वयं महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी उलझन में बने हुए हैं। विभाग के पास इस तरह से मकान लेने की कोई पॉलिसी नहीं है।
समाज से त्रस्त हूं, इसलिए उठाया यह कदम
सीहोर शहर के खटीक मोहल्ला अम्बेडकर नगर वार्ड क्रमांक 11 में स्थित मकान में रहने वाले जानी सोनकर ने कहा कि मैंने 22 साल पहले अन्य समाज की महिला से प्रेम विवाह कर लिया था। तब मुझे समाज से बेदखल कर दिया गया था। बड़ी बेटी की शादी भी समाज में होने नहीं दी। जिस के बाद कुछ दरिंदों ने मिलकर मेरी नाबालिग बेटी की आबरू लूट ली। मुझे भी छुरा मारकर लहूलुहान कर दिया। कानून ने गुनाहगारों को जमानत दे दी। जिसके बाद घर में हमारा अब दम घुट रहा है। अब मोहल्ले में इज्जत नहीं बची है। मुझे मेरी पत्नी व बच्चों को ताने देकर मानसिक प्रताडऩा दी जा रही है।
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बच्चियां बने होशियार, घटनाओं की नहीं हो शिकार, इसलिए दान कर रहे मकान
इस मकान को हमें बेचना नहीं है, किसी को निजी रूप से देना भी नही है। इसलिए 35 गुना 60 क्षेत्रफल वाला करीब 25 लाख का मकान शासन को आंगनबाड़ी खोलने के लिए दे रहे हैं। जिससे बच्चों और महिलाओं के लिए बेहतर काम हो सकें, और बच्चियां बचपन से ही होनहार बनें। अनुसूचित जाति के परिवार के साथ हुई घटना में शासन के द्वारा दी जाने वाली मदद राशि भी हम लेना नहीं चाहते हैं। इसे भी वापस शासन को बच्चियों के कल्याण के लिए देना चाहते हैं। पुलिस प्रशासन ने घटना के समय पूरा सहयोग किया है। कानून और सरकार से कोई नाराजगी नहीं है। बस मुख्यमंत्री से एक ही प्रार्थना है। जमानत पर छूटे आरोपियों को कड़ी सजा दिलाई जाए।
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विभाग उलझन में... क्या करें
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला अधिकारी प्रफुल्ल खत्री ने बताया कि सीधे पट्टे का मकान विभाग इस तरह से दान नहीं ले सकता है। इस मामले में हम वरिष्ठ अधिकारियों से सलाह ले रहे हैं। सीएम हेल्पलाइन पर भी जवाब भेजा गया है। दानदाता अगर बिना विभागीय नामातंरण के ही मकान कार्यालय या फिर आंगनबाड़ी के लिए उपलब्ध कराता है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है।
