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MP: 10 माह की बच्ची से मां को रोज 2 घंटे मिलने की अनुमति, हाईकोर्ट ने पुलिस सुरक्षा में मुलाकात के दिए निर्देश

Tue, 21 Jul 2026 08:57 AM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 21 Jul 2026 08:57 AM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 10 माह की बच्ची को बाल कल्याण समिति के सुपुर्द किए जाने के मामले में अहम अंतरिम राहत देते हुए उसकी मां को पुलिस की मौजूदगी में प्रतिदिन दो घंटे बच्ची से मिलने की अनुमति दी है। कोर्ट ने जन्म संबंधी दस्तावेजों की तीन दिन में जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए हैं।

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The woman claiming to be the mother can meet the child for two hours daily
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर

विस्तार

एक महिला ने पुलिस द्वारा उसकी 10 माह की मासूम बच्ची को जबरन बाल कल्याण समिति के सुपुर्द किए जाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि उसकी बच्ची केवल 10 माह की है। हाईकोर्ट के जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने महिला को पुलिस की मौजूदगी में अगली सुनवाई तक प्रतिदिन दो घंटे बच्ची से मिलने की अनुमति प्रदान की है।

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साथ ही, याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत बच्ची के जन्म प्रमाण-पत्र और दमोह जिला अस्पताल द्वारा जारी डिस्चार्ज टिकट की तीन दिन के भीतर जांच कर रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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दमोह निवासी पीड़िता की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि वह नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता थी। दुष्कर्म के कारण गर्भवती होने पर उसने करीब 10 माह पहले दमोह जिला अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया था। अकेली होने के कारण वह अपने और बच्ची के पालन-पोषण के लिए एक किन्नर के घर में काम करने लगी। इसी दौरान दूसरे किन्नर समूह ने बच्ची को बेचने का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने उसकी बच्ची को जबरन बाल कल्याण समिति, दमोह के सुपुर्द कर दिया।

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याचिकाकर्ता ने बच्ची को वापस पाने के लिए बाल कल्याण समिति से संपर्क किया। समिति ने बच्ची के जन्म से संबंधित दस्तावेज मांगे, जिस पर उसने जन्म प्रमाण-पत्र और जिला अस्पताल द्वारा जारी डिस्चार्ज टिकट प्रस्तुत कर दिए। इसके बावजूद बाल कल्याण समिति ने बच्ची को सौंपने से इनकार कर दिया, जिसके बाद महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

समय देने का आग्रह किया था
सरकार की ओर से बताया गया कि बाल कल्याण समिति ने याचिकाकर्ता के बच्ची की मां होने पर संदेह व्यक्त किया है। सरकार का कहना था कि ऐसा कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि याचिकाकर्ता ही बच्ची की जैविक मां है। हालांकि, याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज शासकीय हैं, इसलिए उनकी जांच के लिए समय देने का आग्रह किया गया।

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एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता को प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक अपनी बच्ची से मिलने की अनुमति दी जाए। बच्ची की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह मुलाकात सागर महिला थाने में पदस्थ महिला आरक्षक की मौजूदगी में कराई जाएगी। सागर पुलिस अधीक्षक को महिला आरक्षक नामित करने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा, न्यायालय ने दमोह पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि वे बाल कल्याण समिति को पूरा सहयोग उपलब्ध कराएं और आवश्यकता पड़ने पर कर्मचारी भी उपलब्ध कराएं। साथ ही सरकार को निर्देशित किया गया है कि याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की तीन दिन के भीतर जांच कर रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को निर्धारित की गई है।

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