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Jabalpur News: फर्जी किसानों के नाम पर 40 लाख की सरकारी राशि हड़पी, 9 लोगों पर एफआईआर हुई दर्ज

Wed, 03 Jun 2026 09:24 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 03 Jun 2026 09:24 PM IST
सार

कृषि विभाग की जांच में बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड द्वारा फर्जी किसान सदस्य, जाली बैंक खाते और नकली दस्तावेजों के जरिए 39.67 लाख रुपये की सरकारी राशि हड़पने का खुलासा हुआ। पुलिस ने 6 डायरेक्टर समेत 9 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है।

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The government was duped of lakhs of rupees by declaring fake farmers as members.
अपराध - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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फर्जी दस्तावेज, जाली बैंक खाते और नकली किसान सदस्यों के जरिए शासन से करीब 39.67 लाख रुपये की राशि हासिल करने का मामला सामने आया है। कृषि विभाग की जांच में खुलासा होने के बाद पाटन थाना पुलिस ने रायसेन जिले की बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड के 6 डायरेक्टर और 3 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

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जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022-23 के दौरान कंपनी ने अनाज उपार्जन कार्य से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्रता संबंधी नियमों को पूरा दिखाने हेतु फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत किए। नियमों के अनुसार कंपनी के पास कम से कम 50 लाख रुपये की नगद राशि या क्रेडिट लिमिट तथा वास्तविक किसान सदस्य होना आवश्यक था। जांच में पता चला कि कंपनी ने अपनी वित्तीय क्षमता दर्शाने के लिए आईसीआईसीआई बैंक के एक खाते का विवरण प्रस्तुत किया था। सत्यापन के दौरान बैंक ने स्पष्ट किया कि संबंधित खाता कंपनी के नाम पर था ही नहीं। आरोप है कि कंपनी ने सरकारी लाभ प्राप्त करने के लिए गलत बैंक जानकारी का उपयोग किया।
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कृषि विभाग ने कंपनी द्वारा प्रस्तुत किसान सदस्यों की सूची की भी जांच की। सूची में दर्ज कई किसानों से मोबाइल फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कंपनी की सदस्यता से इनकार कर दिया। कई सदस्यों के पते, शेयर राशि और अन्य आवश्यक विवरण भी रिकॉर्ड में नहीं मिले। इससे जांच एजेंसियों को संदेह हुआ कि फर्जी या अनजान किसानों को कागजों में सदस्य बनाकर कंपनी को पात्र दर्शाया गया।


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नियुक्तियों में भी मिली अनियमितताएं
जांच में कंपनी के प्रबंधक मनीष चौरसिया, लेखापाल कमलेश साहू और कंप्यूटर ऑपरेटर नीलेश विश्वकर्मा की नियुक्तियों में भी गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। रिकॉर्ड में ऐसी कोई बैठक, एजेंडा या प्रस्ताव नहीं मिला जिसमें इन नियुक्तियों को स्वीकृति दी गई हो। नियुक्ति पत्रों पर तारीख तक दर्ज नहीं थी और विभिन्न दस्तावेजों पर हस्ताक्षरों में भी अंतर पाया गया। राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, जबलपुर की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने प्रासंगिक व्यय, हैंडलिंग और कमीशन के नाम पर 39 लाख 67 हजार 781 रुपये की सरकारी सब्सिडी और सहायता राशि प्राप्त की थी। जांच में यह राशि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त करना पाया गया।

शिकायत के बाद हुई जांच
इस मामले की शिकायत किसान मजदूर महासंघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ठाकुर ने प्रशासन से की थी। कलेक्टर के निर्देश पर कराई गई उच्च स्तरीय जांच में पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। इसके बाद किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सहायक संचालक रवि कुमार आम्रवंशी ने पुलिस को शिकायत सौंपी। पाटन थाना पुलिस ने कंपनी के डायरेक्टर सचिन दुबे, रंजना पांडे, संदीप दुबे, अंशुल बर्मन, नेहा पांडे और उमा सिंह सहित प्रबंधक मनीष चौरसिया, लेखापाल कमलेश साहू और कंप्यूटर ऑपरेटर नीलेश विश्वकर्मा के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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