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MP: कोविड-19 के प्रतिबंध का उल्लंघन करने मामले में भाजपा विधायक को राहत, पुलिस ने प्रस्तुत किया था आरोप-पत्र
Thu, 19 Dec 2024 10:41 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
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Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Thu, 19 Dec 2024 10:41 PM IST
सार
भाजपा विधायक बिसाहू लाल साहू की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उनके खिलाफ अनूपपुर कोतवाली में साल 2020 में कोविड 19 के प्रतिबंध नियम का उल्लंघन करने के मामले में आईपीसी की धारा 188 और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 के तहत अपराध दर्ज किया है।
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जबलपुर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला डिजिटल
विस्तार
अनूपपुर से विधायक व पूर्व मंत्री बिसाहूलाल सिंह को राहत प्रदान कर दी है। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने पुलिस द्वारा तीन साल बाद आरोप-पत्र दायर करने के खिलाफ उनके खिलाफ न्यायालय में लंबित अपराधिक प्रकरण को निरस्त करने के आदेश जारी किये है।
भाजपा विधायक बिसाहू लाल साहू की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उनके खिलाफ अनूपपुर कोतवाली में साल 2020 में कोविड 19 के प्रतिबंध नियम का उल्लंघन करने के मामले में आईपीसी की धारा 188 और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 के तहत अपराध दर्ज किया है। अपराध दर्ज होने के तीन साल बाद अगस्त 2023 में न्यायालय के समक्ष आरोप-पत्र पेश किया गया था।
एमपी-एमएलए जबलपुर ट्रायल कोर्ट के आरोप-पत्र देर से दायर करने जाने के कारण प्रकरण निरस्त करने का आवेदन प्रस्तुत किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 473 का हवाला देते हुए आवेदन को खारिज कर दिया था। जिसके कारण उक्त याचिका दायर की गयी है। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान देर से आरोप-पत्र प्रस्तुत करने पर अधिकारियों द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण में कहा गया है कि याचिकाकर्ता संबंधित समय पर कैबिनेट मंत्री थे और एक सार्वजनिक नेता होने के कारण वे उपलब्ध नहीं थे। याचिकाकर्ता ने जांच अधिकारी के साथ सहयोग नहीं किया ,जिसके कारण जांच पूरी करने में देर हुई। अभियोजन पक्ष के पास आरोप पत्र प्रस्तुत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
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एकलपीठ ने स्पष्टीकरण पर संतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता उपलब्ध नहीं था और जांच में सहयोग नहीं कर रहा था। ऐसी स्थिति में जांच पूरी कर उसकी अनुपस्थिति में भी आरोप पत्र पेश किया जा सकता था। इसके लिए तीन साल तक इंतजार किया गया। सीआरपीसी की धारा 468 के प्रावधानों के अनुसार, आरोप पत्र दाखिल करने की समय सीमा का अनिवार्य रूप से पालन किया जाना चाहिए। एकलपीठ ने ट्रायल कोर्ट में लंबित प्रकरण को निरस्त करते हुए अपने आदेश में कहा है कि सीआरपीसी की धारा 473 के तहत शक्ति का प्रयोग करते समय न्यायालय को बहुत सतर्क रहना चाहिए और उक्त शक्ति का प्रयोग असाधारण और विशेष परिस्थितियों में किया जाना चाहिए।
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भाजपा विधायक बिसाहू लाल साहू की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उनके खिलाफ अनूपपुर कोतवाली में साल 2020 में कोविड 19 के प्रतिबंध नियम का उल्लंघन करने के मामले में आईपीसी की धारा 188 और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 51 के तहत अपराध दर्ज किया है। अपराध दर्ज होने के तीन साल बाद अगस्त 2023 में न्यायालय के समक्ष आरोप-पत्र पेश किया गया था।
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एमपी-एमएलए जबलपुर ट्रायल कोर्ट के आरोप-पत्र देर से दायर करने जाने के कारण प्रकरण निरस्त करने का आवेदन प्रस्तुत किया गया था। ट्रायल कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 473 का हवाला देते हुए आवेदन को खारिज कर दिया था। जिसके कारण उक्त याचिका दायर की गयी है। एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान देर से आरोप-पत्र प्रस्तुत करने पर अधिकारियों द्वारा दिये गये स्पष्टीकरण में कहा गया है कि याचिकाकर्ता संबंधित समय पर कैबिनेट मंत्री थे और एक सार्वजनिक नेता होने के कारण वे उपलब्ध नहीं थे। याचिकाकर्ता ने जांच अधिकारी के साथ सहयोग नहीं किया ,जिसके कारण जांच पूरी करने में देर हुई। अभियोजन पक्ष के पास आरोप पत्र प्रस्तुत करने के अलावा कोई विकल्प नहीं था।
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एकलपीठ ने स्पष्टीकरण पर संतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता उपलब्ध नहीं था और जांच में सहयोग नहीं कर रहा था। ऐसी स्थिति में जांच पूरी कर उसकी अनुपस्थिति में भी आरोप पत्र पेश किया जा सकता था। इसके लिए तीन साल तक इंतजार किया गया। सीआरपीसी की धारा 468 के प्रावधानों के अनुसार, आरोप पत्र दाखिल करने की समय सीमा का अनिवार्य रूप से पालन किया जाना चाहिए। एकलपीठ ने ट्रायल कोर्ट में लंबित प्रकरण को निरस्त करते हुए अपने आदेश में कहा है कि सीआरपीसी की धारा 473 के तहत शक्ति का प्रयोग करते समय न्यायालय को बहुत सतर्क रहना चाहिए और उक्त शक्ति का प्रयोग असाधारण और विशेष परिस्थितियों में किया जाना चाहिए।
