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Jabalpur: ओबीसी वर्ग को जनसंख्या अनुपात के अनुसार दिया जाए आरक्षण, जवाब पेश नहीं करने पर HC ने सरकार को फटकारा

Fri, 04 Apr 2025 11:00 AM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Fri, 04 Apr 2025 11:00 AM IST
सार

एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक एंड सोशल जस्टिस की तरफ से दायर याचिका में मांग की गई है कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का लाभ प्रदान किया जाए। सरकार इसे लेकर अपना जवाब पेश नहीं कर रही है। 

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OBC category should be given reservation in proportion to population
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

ओबीसी वर्ग को उसकी जनसंख्या के अनुपात अनुसार आरक्षण प्रदान किए जाने की मांग करते हुए जबलपुर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने अनावेदकों को जवाब पेश करने की अंतिम मोहलत प्रदान की है। युगलपीठ ने चेतावनी दी है कि अगली सुनवाई में जवाब पेश नहीं करने पर 15 हजार रुपये की कॉस्ट लगाई जाएगी। याचिका पर अगली सुनवाई 16 जून को होगी।

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एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक एंड सोशल जस्टिस की तरफ से दायर याचिका में मांग की गई है कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का लाभ प्रदान किया जाए। साल 2011 की जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश में एससी की 15.6 प्रतिशत, एसटी की 21.14 प्रतिशत, ओबीसी की 50.9 प्रतिशत, मुस्लिम की 3.7 प्रतिशत और शेष 8.66 प्रतिशत अनारक्षित वर्ग की जनसंख्या है। प्रदेश में वर्तमान में एससी को 16 प्रतिशत, एसटी को 20 प्रतिशत और ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है, जबकि ओबीसी वर्ग की आबादी 51 प्रतिशत है। इसलिए ओबीसी वर्ग को प्रदेश में जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का पालन नहीं हुआ
याचिका में कहा गया था कि इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देशित किया था कि ओबीसी वर्ग की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थितियों का नियमित रूप से परीक्षण करने के लिए स्थायी आयोग गठित किया जाए। आयोग तो बना, लेकिन ओबीसी वर्ग के उत्थान के लिए कार्य नहीं किया जा रहा है।

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सरकार का जवाब नहीं आया
याचिका पर विगत एक साल में 11 बार सुनवाई हो चुकी है, लेकिन सरकार की तरफ से अब तक कोई जवाब पेश नहीं किया गया है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद 15 हजार के जुर्माने की चेतावनी के साथ राज्य सरकार को जवाब पेश करने की अंतिम मोहलत दी है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने पैरवी की।

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