फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   MP High Court Slams Trial Court for Finding Contrary to FSL Report, Acquits Murder Accused

एमपी: एफएसएल रिपोर्ट के उलट निष्कर्ष पर हाईकोर्ट की ट्रायल कोर्ट को फटकार, हत्या मामले में आरोपी दोषमुक्त

Sat, 05 Sep 2026 12:59 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sat, 05 Sep 2026 12:59 PM IST
सार

जबलपुर हाईकोर्ट ने दमोह के एक हत्या मामले में ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को निरस्त करते हुए आरोपी को दोषमुक्त कर दिया। युगलपीठ ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड में उपलब्ध एफएसएल रिपोर्ट के विपरीत निष्कर्ष दर्ज किया था। 

विज्ञापन
MP High Court Slams Trial Court for Finding Contrary to FSL Report, Acquits Murder Accused
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

हत्या के एक आपराधिक प्रकरण की सुनवाई करने वाली ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड में उपलब्ध एफएसएल रिपोर्ट के खिलाफ अपने आदेश में गलत निष्कर्ष का उल्लेख किया। अपील की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की युगलपीठ, जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस ए.के. सिंह ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट अपनी जिम्मेदारी ठीक ढंग से और सावधानीपूर्वक निभाने में नाकाम रही है। युगलपीठ ने आजीवन कारावास की सजा को निरस्त करते हुए अपीलकर्ता को दोषमुक्त कर दिया। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि संवेदनशील मामलों को संभालने के लिए संबंधित ट्रायल कोर्ट के पीठासीन अधिकारी के आदेश को मूल्यांकन के लिए हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाए, ताकि वे मामले में उचित निर्णय ले सकें।
विज्ञापन


हाईकोर्ट में अपील की गई थी दायर
अपीलकर्ता लोटन लोधी की ओर से दमोह जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश उदय सिंह मरावी द्वारा 31 अक्टूबर 2025 को हत्या के अपराध में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा से दंडित किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी। अपील में कहा गया था कि घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। तीन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर उसे सजा से दंडित किया गया था। तीनों परिस्थितियों की कड़ी आपस में मेल नहीं खाती है।
विज्ञापन


मुख्य गवाह के बयान और मेमोरेंडम में मिला विरोधाभास
युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि मुख्य गवाह छोटेलाल अहिरवार का कहना था कि मुन्ना अहिरवार उसके चाचा थे। चाचा और अपीलकर्ता 22 मार्च 2024 को घर के चबूतरे पर बैठे थे। चाचा ने उसे 100 रुपये दिए और शराब लाने को कहा। गवाह दुकान बंद होने के कारण बिना शराब लिए वापस लौट आया और रुपये वापस चाचा को लौटा दिए थे। इसके बाद चाचा और अपीलकर्ता साथ में चले गए थे। वह भी घर जाकर खाना खाकर सो गया था। अगले दिन उसे पता चला कि उसके चाचा लखन सिंह के दरवाजे पर मृत पड़े हुए हैं। मुख्य गवाह के बयान अपीलकर्ता के मेमोरेंडम के विपरीत पाए गए। अपीलकर्ता के अनुसार, छोटेलाल अहिरवार ने हल्ले की दुकान से शराब की दो क्वार्टर खरीदी थीं। धारा 161 के तहत बयान घटना के 13 दिन बाद दर्ज किए गए थे। अभियोजन पक्ष ने इस देरी का कोई कारण नहीं बताया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  राजगढ़: 21 साल के ‘बिट्टू तबाही’ ने उठाया अजनार नदी को बचाने का बीड़ा, कचरा-पॉलिथीन साफ कर बदली तस्वीर


बरामद मोबाइल और कॉल डिटेल्स पर भी उठे सवाल
पुलिस के अनुसार, अपीलकर्ता के घर से 100-100 रुपये के तीन नोट तथा पांच हजार रुपये का एक मोबाइल हैंडसेट बरामद किया गया था। परिजनों द्वारा मोबाइल सेट के मृतक का होने का दावा नहीं किया गया। कंज्यूमर एप्लीकेशन फॉर्म में मोबाइल हैंडसेट में सिम नंबर या सिम कार्ड न होने के बारे में कोई जिक्र नहीं है। उसमें आईएमईआई नंबर का जिक्र नहीं था, बल्कि सिर्फ सिम नंबर का उल्लेख था। वह सिम भी मुन्ना अहिरवार के बेटे के पास से जब्त किया गया था। कॉल डिटेल्स की बात है तो यह सही है कि दोनों ने एक-दूसरे को कॉल किए थे, लेकिन रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि जब्त किए गए हैंडसेट से दोनों के बीच बातचीत हुई थी या बरामद सिम का इस्तेमाल किया गया था।

एफएसएल रिपोर्ट के उलट दर्ज किया गया निष्कर्ष
इसके अलावा, एफएसएल रिपोर्ट के अनुसार अपीलकर्ता के पास से जब्त की गई चीजों में इंसानी खून नहीं पाया गया था। मृतक के कपड़ों में इंसानी खून पाया गया था। ट्रायल कोर्ट ने गलत तरीके से दर्ज किया कि अपीलकर्ता से जब्त की गई चीजों पर इंसानी खून मिला था। युगलपीठ ने कहा कि यह निष्कर्ष गलत है और एफएसएल रिपोर्ट के खिलाफ है। ट्रायल कोर्ट द्वारा ऐसी बात दर्ज की गई, जो रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं थी। युगलपीठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए अपीलकर्ता को दी गई आजीवन कारावास की सजा को निरस्त करते हुए उक्त आदेश जारी किए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed