एमपी हाईकोर्ट सख्त: यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे की राख में पारा होने का आरोप, हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट
यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को जलाने के बाद बची राख में पारा होने के आरोप पर हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सात दिनों में राख की जांच रिपोर्ट पेश करने और सभी पक्षों को प्रतियां देने के निर्देश दिए।
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भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के जहरीले कचरे को जलाने के बाद निकली राख में पारा होने के आरोप को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की युगलपीठ ने जहरीले कचरे को जलाने के बाद बची राख की जांच रिपोर्ट सात दिनों के भीतर पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के जहरीले कचरे के विनिष्टीकरण की मांग को लेकर आलोक प्रताप सिंह ने वर्ष 2004 में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की मृत्यु हो जाने के कारण हाईकोर्ट अब इस मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे का विनिष्टीकरण पीथमपुर, जिला धार में किया गया था।
पिछली सुनवाई के दौरान हस्तक्षेपकर्ताओं ने यूनियन कार्बाइड परिसर से जहरीला कचरा हटाए जाने के बावजूद आसपास के कई वार्डों में आम जनता को दूषित और जहरीला पानी सप्लाई किए जाने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा था कि दूषित पानी की सप्लाई स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए युगलपीठ ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति के जरिए पानी के नमूने लेकर उनकी विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे।
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सुनवाई के दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पानी की जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश की गई। संबंधित पक्षों ने रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए समय देने का आग्रह किया। इसी दौरान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया कि यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड के जहरीले कचरे को जलाने के बाद बची राख में पारे का विश्लेषण किया गया है और उसमें प्रदूषण पाया गया है।
बताया गया कि राख का विनिष्टीकरण वर्तमान में मानव बस्तियों के काफी करीब स्थित ट्रीटमेंट, स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी (TSDF), पीथमपुर, जिला धार में किया जा रहा है। वहीं, सरकार की ओर से बताया गया कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार सभी पैरामीटर निर्धारित सीमा के भीतर हैं।
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिवक्ता की ओर से मौखिक रूप से दिए गए बयान पर भरोसा नहीं किया जा सकता। बोर्ड को सात दिनों के भीतर राख के संबंध में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी, ताकि कोर्ट उस पर विचार कर सके। युगलपीठ ने जांच रिपोर्ट की प्रतियां दस दिनों के भीतर सभी पक्षकारों को उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि वे अपना पक्ष रख सकें।
