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Jabalpur News: जंगली हाथियों को कंट्रोल करने वाले एक्सपर्ट के नाम हाईकोर्ट में पेश, सरकार को मिला समय
Wed, 27 Nov 2024 08:43 AM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 27 Nov 2024 08:43 AM IST
सार
हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय पर्यावरण विभाग की गाइडलाइंस के अनुसार जंगली हाथियों को पकड़ने का कदम अंतिम उपाय के रूप में होना चाहिए। लेकिन, मध्य प्रदेश में इसे पहले विकल्प के रूप में अपनाया जा रहा है।
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high court
विस्तार
जंगली हाथियों को नियंत्रित करने वाले विशेषज्ञों की सूची याचिकाकर्ता की ओर से हाईकोर्ट में पेश की गई। सरकार की ओर से हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ को बताया गया कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विचार करने के लिए अध्यक्ष सहित छह अन्य विशेषज्ञ सदस्यों की कमेटी बनाई गई है। याचिकाकर्ता के सुझाव के अनुसार, अन्य प्रदेशों के विशेषज्ञों की मदद प्राप्त करने पर विचार-विमर्श के लिए समय मांगा गया। युगलपीठ ने सरकार को समय प्रदान करते हुए अगली सुनवाई 15 दिसंबर को निर्धारित की है।
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बता दें कि छत्तीसगढ़ से जंगली हाथियों के झुंड मध्य प्रदेश के जंगलों में प्रवेश करते हैं, जिससे किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और घरों में तोड़फोड़ की घटनाएं बढ़ रही हैं। कुछ मामलों में जंगली हाथियों द्वारा किए गए हमलों में लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है।
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रायपुर निवासी नितिन सिंघवी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय पर्यावरण विभाग की गाइडलाइंस के अनुसार, जंगली हाथियों को पकड़ने का कदम अंतिम उपाय के रूप में होना चाहिए, लेकिन मध्य प्रदेश में इसे पहले विकल्प के रूप में अपनाया जा रहा है।
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जंगली हाथियों को प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर फॉरेस्ट (पीसीसीएफ) वाइल्डलाइफ के आदेश पर ही पकड़ा जा सकता है। जंगली हाथी संरक्षित वन्य प्राणियों की प्रथम सूची में आते हैं। पकड़े जाने के बाद इन्हें टाइगर रिजर्व में भेजकर प्रशिक्षण दिया जाता है। ट्रेनिंग के दौरान हाथियों को यातनाओं का सामना करना पड़ता है। याचिका की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि पिछले 30 वर्षों में पकड़े गए हाथियों का पूरा विवरण पेश किया जाए। सरकार की ओर से पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि वर्ष 2017 से अब तक 10 जंगली हाथियों को पकड़ा गया है, जिनमें से दो हाथियों को छोड़ा जाना है। एक हाथी को छोड़ने के लिए विदेश से कॉलर आई बुलाई गई है।
हाथियों के प्रशिक्षण और मृत्यु का मामला
पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में हाथियों की मौत का मामला उठाते हुए बताया था कि प्रदेश में हाथियों को नियंत्रित करने के लिए कोई विशेषज्ञ नहीं है। इस पर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को सुझाव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। मंगलवार को याचिकाकर्ता की ओर से विशेषज्ञों के नामों की सूची पेश की गई। सरकार की ओर से युगलपीठ को संबंधित जानकारी प्रदान की गई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने पैरवी की।
