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Jabalpur: फर्जी नर्सिंग कॉलेज मामले में फिर बढ़ी सुनवाई, अगली सुनवाई 16 जनवरी को
Fri, 18 Nov 2022 10:10 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Fri, 18 Nov 2022 10:10 PM IST
सार
मध्य प्रदेश में फर्जी तथा नियम विरुद्ध तरीके से संचालित नर्सिंग कॉलेजों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। शुक्रवार को होने वाली सुनवाई टल गई। याचिका पर अगली सुनवाई 16 जनवरी को निर्धारित की गई है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश में फर्जी तथा नियम विरुद्ध तरीके से संचालित नर्सिंग कॉलेजों को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने अनावेदक कॉलेज की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित नहीं होने के कारण सुनवाई बढ़ाने का आग्रह किया गया। युगलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई 16 जनवरी को निर्धारित की है।
बता दें कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलजों को मान्यता दी गई थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारित मापदंड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है।
नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है। याचिका में साथ ऐसे कॉलेज की सूची तथा फोटो प्रस्तुत किए गए थे।
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हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेज के मान्यता संबंधित ओरिजनल दस्तावेज पेश किए गए थे। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को दस्तावेज के निरीक्षण की अनुमति प्रदान की थी। निरीक्षण के बाद याचिकाकर्ता ने दस्तावेजों से 37,759 पेज गायब होने की जानकारी हाईकोर्ट को दी थी। इसके अलावा 80 कॉलेज ऐसे हैं जिसमें एक व्यक्ति उसकी समय में कई स्थानों में काम कर रहा है। दस कॉलेज में एक ही व्यक्ति एक समय में प्राचार्य है और उन कॉलेजों के बीच की दूरी सैकड़ों किलोमीटर है। टीचिंग स्टाफ भी एक समय में पांच-पांच कॉलेज में एक ही समय में सेवा दे रहा था। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को डिजिटल डाटा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे।
मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार ने शपथ -पत्र के साथ कार्रवाई रिपोर्ट पेश करते हुए बताया था कि जबलपुर तथा इंदौर के क्षेत्राधिकारी में आने वाले 94 नर्सिंग कॉलेज को निरीक्षण के बाद रिन्यूवल जारी नहीं किया गया है। नोटिस जारी करने के बावजूद भी इंफ्रास्ट्रक्चर तथा संसाधन के संबंध में जानकारी पेष करने करने वाले 93 नर्सिंग कॉलेज का रिन्यूवल निरस्त कर दिया गया है। निरीक्षण व सत्यापन के बाद साल 2021-22 में 49 नए कॉलेजों को अनुमति जारी की गई है। याचिकाकर्ता ने युगलपीठ को बताया कि जिन नए नर्सिंग कॉलेज को अनुमति प्रदान की गई है, उसमें से कई कॉलेज निर्धारित मापदंड को पूर्ण नहीं कर रहे हैं। याचिकाकर्ता द्वारा 10 कॉलेज के संबंध में शपथ-पत्र के साथ जानकारी पेश की थी। याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि एक शटर में फर्जी फैकल्टी के साथ कॉलेज खोले गए हैं। जिसे गंभीरता से लेते हुए युगलपीठ ने मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को तत्काल निलंबित कर प्रशासक नियुक्त करने के आदेश जारी किए थे।
याचिका पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अनावेदक कॉलेज के आग्रह का याचिकाकर्ता की तरफ से विरोध करते हुए कहा गया कि पिछली सुनवाई के दौरान नर्सिंग कौंसिल के अधिवक्ता की अनुपस्थिति के कारण याचिका पर सुनवाई टल गई थी। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।
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बता दें कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलजों को मान्यता दी गई थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारित मापदंड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है।
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नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है। याचिका में साथ ऐसे कॉलेज की सूची तथा फोटो प्रस्तुत किए गए थे।
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हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेज के मान्यता संबंधित ओरिजनल दस्तावेज पेश किए गए थे। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को दस्तावेज के निरीक्षण की अनुमति प्रदान की थी। निरीक्षण के बाद याचिकाकर्ता ने दस्तावेजों से 37,759 पेज गायब होने की जानकारी हाईकोर्ट को दी थी। इसके अलावा 80 कॉलेज ऐसे हैं जिसमें एक व्यक्ति उसकी समय में कई स्थानों में काम कर रहा है। दस कॉलेज में एक ही व्यक्ति एक समय में प्राचार्य है और उन कॉलेजों के बीच की दूरी सैकड़ों किलोमीटर है। टीचिंग स्टाफ भी एक समय में पांच-पांच कॉलेज में एक ही समय में सेवा दे रहा था। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को डिजिटल डाटा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए थे।
मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार ने शपथ -पत्र के साथ कार्रवाई रिपोर्ट पेश करते हुए बताया था कि जबलपुर तथा इंदौर के क्षेत्राधिकारी में आने वाले 94 नर्सिंग कॉलेज को निरीक्षण के बाद रिन्यूवल जारी नहीं किया गया है। नोटिस जारी करने के बावजूद भी इंफ्रास्ट्रक्चर तथा संसाधन के संबंध में जानकारी पेष करने करने वाले 93 नर्सिंग कॉलेज का रिन्यूवल निरस्त कर दिया गया है। निरीक्षण व सत्यापन के बाद साल 2021-22 में 49 नए कॉलेजों को अनुमति जारी की गई है। याचिकाकर्ता ने युगलपीठ को बताया कि जिन नए नर्सिंग कॉलेज को अनुमति प्रदान की गई है, उसमें से कई कॉलेज निर्धारित मापदंड को पूर्ण नहीं कर रहे हैं। याचिकाकर्ता द्वारा 10 कॉलेज के संबंध में शपथ-पत्र के साथ जानकारी पेश की थी। याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि एक शटर में फर्जी फैकल्टी के साथ कॉलेज खोले गए हैं। जिसे गंभीरता से लेते हुए युगलपीठ ने मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को तत्काल निलंबित कर प्रशासक नियुक्त करने के आदेश जारी किए थे।
याचिका पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अनावेदक कॉलेज के आग्रह का याचिकाकर्ता की तरफ से विरोध करते हुए कहा गया कि पिछली सुनवाई के दौरान नर्सिंग कौंसिल के अधिवक्ता की अनुपस्थिति के कारण याचिका पर सुनवाई टल गई थी। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने पैरवी की।
