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हाईकोर्ट: बयान दर्ज करने में देरी गवाही खारिज करने का आधार नहीं, हत्या में दोषसिद्धि का फैसला बरकरार
Thu, 24 Sep 2026 08:05 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2026 08:05 PM IST
सार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने हत्या मामले में पांच दोषियों की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने कहा कि गवाहों के बयान दर्ज करने में देरी मात्र से गवाही खारिज नहीं की जा सकती। अदालत ने प्रत्यक्षदर्शी गवाही, पोस्टमार्टम, बरामदगी और अन्य साक्ष्यों को अभियोजन के पक्ष में माना।
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मप्र हाईकोर्ट
विस्तार
हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि बयान दर्ज करने में देरी गवाही को खारिज किए जाने का आधार नहीं है। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ हत्या के अपराध में दोषसिद्धि के फैसले को बरकरार रखा है।
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छिंदवाड़ा जिला न्यायालय द्वारा हत्या के आरोप में लाल चंद्र, रूप चंद्र सहित पांच आरोपियों को दोषी करार देकर आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया गया था। अभियोजन के अनुसार मामला 11 जनवरी 2013 को सामने आया, जब हर्रई थाना क्षेत्र के जंगल स्थित श्मशान स्थल के पास एक व्यक्ति का अधजला शव मिला। डीएनए जांच के माध्यम से शव की पहचान कोमल गिरी के रूप में हुई। शव को जलाकर कथित रूप से साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया गया था। पोस्टमार्टम में शरीर पर कई चोटें मिलीं और चिकित्सकीय राय के अनुसार मृत्यु सिर तथा छाती पर लगी अनेक चोटों के कारण हुई थी। अपीलकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया कि गवाहों के बयान घटना के लगभग एक सप्ताह बाद दर्ज किए गए हैं।
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एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि केवल बयान दर्ज होने में देरी अपने आप में गवाही को खारिज करने का आधार नहीं है। विशेषकर जब गवाहों ने देरी का स्पष्टीकरण दिया है। उनका बयान अन्य साक्ष्यों से समर्थित है। सामान की बरामदगी सहित अन्य साक्ष्य अभियोजन की कहानी से मेल खाते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पहचान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य मिलकर अभियोजन के मामले को समर्थन देते हैं। एकलपीठ ने अपील को खारिज करते हुए सजा के फैसले को बरकरार रखा है।
