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Jabalpur: गलत हलफनामा पेश करने पर एसीएस सुलेमान ने मांगी माफी, हाईकोर्ट ने सावधानी बरतने की दी चेतावनी
Sun, 03 Nov 2024 09:45 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
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Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sun, 03 Nov 2024 09:45 PM IST
सार
MP: गलत हलफनामा पेश करने पर हाईकोर्ट में अपनी गलती लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान ने स्वीकार कर ली है। जिसके बाद कोर्ट ने भविष्य में अतिरिक्त सावधानी बरतने का वचन दिया है।
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जबलपुर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के अतिरिक्त मुख्य सचिव मोहम्मद सुलेमान ने गलत हलफनामा पेश करने पर हाईकोर्ट में अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त माफी मांगी। हाईकोर्ट जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने पाया कि अतिरिक्त मुख्य सचिव ने अपने आचरण को सही ठहराने की कोशिश किये बिना माफी मांगी है और भविष्य में अतिरिक्त सावधानी बरतने का वचन दिया है। युगलपीठ ने भविष्य में सावधानी बरतने की चेतावनी के साथ अवमानना कार्यवाही को निरस्त कर दिया।
गौरतलब है कि डॉ एसबी खरे की तरफ से हाईकोर्ट में डॉ दीपरानी असरानी को सिविल सर्जन तथा सीएमएचओ सीधी बनाने जाने को चुनौती दी गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया था कि सिविल सर्जन तथा सीएमएचओ सीधी बनाने जाने की मांग करते हुए अनावेदक डॉ दीपरानी असरानी में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा की तरफ से हाईकोर्ट में हलफनामा पेश किया था कि याचिकाकर्ता डॉ दीपरानी असरानी ने उक्त पद के लिए आवेदन नहीं किया था। इसके बाद उन्हें उक्त पद पर पदस्थ कर दिया गया था। जिस कारण से उन्होने याचिका वापस लेने का आग्रह किया था, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था।
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एकलपीठ ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर पाया कि एसीएस ने आवेदन नहीं करने के संबंध में झूठा हलफनामा पेश किया था। एकलपीठ ने मुख्य सचिव तथा एसीएस मोहम्मद सुलेमान को नोटिस जारी कर
जवाब मांगा था। मुख्य सचिव की तरफ से पेश किये गये जवाब में बिना शर्त माफी बनाते हुए आश्वासन दिया था कि हलफनामा पेश करने के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये जायेगे। एसीएस मोहम्मद सुलेमान के जवाब से एकलपीठ ने असंतुष्ट व्यक्त करते हुए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई के निर्देष दिये थे।
अवमानना कार्रवाई के दौरान एसीएस मोहम्मद सुलेमान की तरफ से बताया गया कि उन्होंने अधीनस्थ अधिकारी के प्राप्त जानकारी के आधार पर उक्त हलफनामा पेश किया था। गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ एक वेतन वृद्धि रोकने तथा निंदा प्रस्ताव पारित करने दंड से दंडित किया गया है। उन्होने अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त न्यायालय से माफी मांगी। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई निरस्त करने के आदेश जारी किये है।
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गौरतलब है कि डॉ एसबी खरे की तरफ से हाईकोर्ट में डॉ दीपरानी असरानी को सिविल सर्जन तथा सीएमएचओ सीधी बनाने जाने को चुनौती दी गयी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान एकलपीठ को बताया गया था कि सिविल सर्जन तथा सीएमएचओ सीधी बनाने जाने की मांग करते हुए अनावेदक डॉ दीपरानी असरानी में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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याचिका की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा की तरफ से हाईकोर्ट में हलफनामा पेश किया था कि याचिकाकर्ता डॉ दीपरानी असरानी ने उक्त पद के लिए आवेदन नहीं किया था। इसके बाद उन्हें उक्त पद पर पदस्थ कर दिया गया था। जिस कारण से उन्होने याचिका वापस लेने का आग्रह किया था, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया था।
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एकलपीठ ने रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर पाया कि एसीएस ने आवेदन नहीं करने के संबंध में झूठा हलफनामा पेश किया था। एकलपीठ ने मुख्य सचिव तथा एसीएस मोहम्मद सुलेमान को नोटिस जारी कर
जवाब मांगा था। मुख्य सचिव की तरफ से पेश किये गये जवाब में बिना शर्त माफी बनाते हुए आश्वासन दिया था कि हलफनामा पेश करने के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये जायेगे। एसीएस मोहम्मद सुलेमान के जवाब से एकलपीठ ने असंतुष्ट व्यक्त करते हुए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई के निर्देष दिये थे।
अवमानना कार्रवाई के दौरान एसीएस मोहम्मद सुलेमान की तरफ से बताया गया कि उन्होंने अधीनस्थ अधिकारी के प्राप्त जानकारी के आधार पर उक्त हलफनामा पेश किया था। गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ एक वेतन वृद्धि रोकने तथा निंदा प्रस्ताव पारित करने दंड से दंडित किया गया है। उन्होने अपनी गलती स्वीकार करते हुए बिना शर्त न्यायालय से माफी मांगी। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई निरस्त करने के आदेश जारी किये है।
