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जबलपुर: प्रदेश में संचालित सभी 674 नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट एक सप्ताह में पेश करो, हाईकोर्ट ने दिए आदेश

Tue, 19 Apr 2022 09:14 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Tue, 19 Apr 2022 09:14 PM IST
सार

दौरान कौंसिल की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने 55 कॉलेजों से सिर्फ सात कॉलेजों को अनावेदक बनाया है। याचिकाकर्ता को अपनी आपत्ति कौंसिल के समक्ष प्रस्तुत करना था, परंतु उसने ऐसा नहीं किया। हाईकोर्ट ने प्रदेश में संचालित सभी नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए हैं।

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Jabalpur: Present the inspection report of all 674 nursing colleges operating in the state in a week, the High Court ordered
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में सिर्फ कागजों में नर्सिंग कॉलेज संचालित होने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई करते हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पी के कौरव की युगलपीठ ने प्रदेश में संचालित सभी नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश जारी किए हैं। युग्रलपीठ ने इसके लिए मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल को एक सप्ताह का समय प्रदान करते हुए अगली सुनवाई 26 अप्रैल को निर्धारित की है।
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लॉ स्टूडेंट्स एसोशिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2000-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलजों की मान्यता दी थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है।
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याचिका पर हुई पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सख्त रूख अपनाते हुए मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल को जवाब पेश करने के लिए एक सप्ताह का समय प्रदान किया था। याचिका की सुनवाई के दौरान कौंसिल की तरफ से पेश किए गए जवाब में कहा गया कि याचिकाकर्ता ने 55 कॉलेजों से सिर्फ सात कॉलेजों को अनावेदक बनाया है। याचिकाकर्ता को अपनी आपत्ति कौंसिल के समक्ष प्रस्तुत करना था, परंतु उसने ऐसा नहीं किया। याचिका की सुनवाई के बाद युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक वागरेजा ने पैरवी की।
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