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भोपाल पुलिस कमिश्नर का इंटरव्यू: मकरंद देउस्कर बोले- स्मार्ट पुलिसिंग की तरफ बढ़ रहे हम, अपराधों में आई कमी

Sun, 03 Apr 2022 04:23 PM IST
Anand Pawar आनंद पवार
Updated Sun, 03 Apr 2022 04:23 PM IST
सार

राजधानी भोपाल में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हुए करीब 4 महीने हो चुके हैं। इस दौरान कौन से अपराध में कमी आई, पुलिस के नए प्रयोग कितने कारगर हो रहे हैं। इसको लेकर भोपाल पुलिस कमिश्नर मकरंद देउस्कर क्या बोले। पढ़िए इंटरव्यू

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Interview: What Bhopal commissioner Makrand Deuskar said about the crime of women in Bhopal, read
भोपाल पुलिस कमिश्नर मकरंद देउस्कर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू हुए करीब 4 महीने हो चुके हैं। इस दौरान कौन से अपराध में कमी आई, पुलिस के नए प्रयोग कितने कारगर हो रहे हैं। इसको लेकर भोपाल पुलिस कमिश्नर मकरंद देउस्कर क्या बोले। पढ़िए इंटरव्यू
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भोपाल में पुलिस कमिश्नर प्रणाली के परिणाम कब तक देखने को मिलेंगे?
देउस्कर- मेरा मानना है कि हम लोग जो बदलाव कर पाए हैं, उसमें हम जिम्मेदार पुलिसिंग की तरफ बढ़ पाए हैं। आदतन अपराधियों के अपराध में हम कमी लाने में सफल हो रहे हैं। इसके अलावा कम्युनिटी को पुलिस से जोड़ने के प्रयास शुरू कर पाए हैं। जिसके भविष्य में अच्छे रिजल्ट देखने को मिलेंगे।
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अभी भी अपराध बढ़ रहे हैं? क्या कारण है?
देउस्कर- यदि आंकड़े देखें तो अपराधों में कमी आ रही है। बॉडी अफेंसेस से जुडे अपराध में कमी आ रही है। थानों में अदम चेक में कमी आ रही है। डायल-100 में हम लोग काफी कमी महसूस कर रहे हैं। हत्या के मामले भी पिछले साल की तुलना में कम ही हैं।
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महिलाओं के साथ होने वाले अपराध की क्या स्थिति है?
देउस्कर- दुष्कर्म, बच्चियों के गुम होने के मामलों में हम पिछले साल के बराबर हैं। हम कई माध्यम से अपराधियों में अपराध करने का भय पैदा करने को लेकर कदम उठा रहे हैं। इसके अलावा जनता को भी विभिन्न प्लेटफार्म से जागरूक करने का प्रयास किया जा रहा है।
 
थाना स्तर पर परफॉर्मेंस लिया जा रहा है। यह कितना कारगर है।
देउस्कर- हमारी कोशिश है कि हम पुलिस को एक सेवा के रूप में जनता को दें। इसी उद्देश्य ये इसकी शुरुआत की गई है। हम थानों से एंड यूजर से फीडबैक ले रहे हैं, उनके साथ किस प्रकार का व्यवहार किया गया और किस प्रकार से उनको ट्रीट किया गया है। ताकि हमें भी स्वतंत्र रूप से थानों में क्या हो रहा है, उसका फीडबैक भी मिल पाए। साथ ही आम जनता को अहसास हो कि उनका फीडबैक भी मायने रखता है।

फीडबैक में क्या प्रमुख परेशानी लोगों ने बताई?
देउस्कर- दो-ढाई महीने के फीडबैक में हमारे पास 17 शिकायतें आई हैं। औसत रेटिंग पूरे जिले की देखें तो 3.5 जाता है। जिसकी दूसरे प्रोफेशनल सर्विस से जैसे अमेजन- फ्लिपकार्ट की सेवा से तुलना करें तो उनका औसत 4.2 के आसपास जाता है। हमें अभी सुधार की गुंजाइस दिख रही है। इसके लिए थाना प्रभारियों को प्रेरित किया जा रहा है कि वे अधीनस्थों को प्रशिक्षित करें।
 
पुलिस जनता के प्रति संवेदनशील बने, लेकिन बदमाश-गुंडो में डर भी बने। ऐसी छवि पुलिस की कब बनेगी।
देउस्कर- यह प्रयास पुलिस विभाग करता ही है, परंतु कमियां हैं। उन कमियों को बेहतर पर्यवेक्षण के माध्यम से पूरा करने का प्रयास कर रहे हैं।

 
कमिश्नर सिस्टम लागू होने से अधिकारों को लेकर कोई टकराव या असुविधा आपके सामने आई? 
देउस्कर- यह कोई इश्यू नहीं है। मध्य प्रदेश में ऐसा नहीं रहा है। यह अभी भी कोई मुद्दा नहीं है।
 
शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने डीएम को भेज रहे हैं?
देउस्कर- आर्म्स एक्ट के लिए कुछ फॉर्मिलिटी अभी शेष हैं। सेंट्रल गवर्नमेंट से लॉगिन पासवर्ड मिलना शेष है। हमने उसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रक्रिया के पूरे होने के बाद ही संभव होगा।
 
दूसरे राज्यों में कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस कर्मियों को साप्ताहिक अवकाश दिया जा रहा है। काम के घंटे निर्धारित हैं। यहां कब से।
देउस्कर- ऐसा नहीं है कि बाकी राज्यों में साप्ताहिक अवकाश या निर्धारित घंटे स्थापित कर पाए हैं, क्योंकि अधिकतर जगह पर पुलिस कर्मियों की कमी रहती है। फिलहाल अभी हमारा पूरा सेटअप हो रहा है। इसमें काम बढ़ा है तो पुलिसकर्मियों पर बोझ भी बढ़ा है। आने वाले भविष्य में सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।
 
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