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Indore News: 194 करोड़ से होगा भूमि सर्वेक्षण, शहर की संपत्ति के रिकार्ड अपडेट होंगे, धोखाधड़ी रुकेगी
Mon, 03 Mar 2025 09:15 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Mon, 03 Mar 2025 09:15 PM IST
सार
Indore News: इंदौर में पहली बार शहरी भूमि रिकॉर्ड्स को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए नक्शा परियोजना शुरू की गई है। देश के 152 शहरों में यह पायलट प्रोजेक्ट एक साल तक चलेगा, इस परियोजना से संपत्ति धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।
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INDORE NEWS
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
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विस्तार
इंदौर समेत देश के 152 और प्रदेश के 10 शहरों में नक्शा परियोजना की शुरुआत हो चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले सप्ताह रायसेन से इसकी शुरुआत की, जहां ड्रोन उड़ाकर इस परियोजना को हरी झंडी दी गई। इस पहले शहरी भूमि सर्वेक्षण के लिए 194 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे शहरी संपत्तियों का रिकॉर्ड अपडेट रहेगा और उसे डिजिटल किया जाएगा। इस पहल से भूमि प्रशासन में पारदर्शिता आएगी और जमीनों से जुड़ी धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी।
नक्शा परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहरी भूमि रिकॉर्ड का निर्माण और उनके प्रबंधन में सुधार करना है। अभी देशभर के विभिन्न राजस्व न्यायालयों में लाखों प्रकरण लंबित हैं, जो भूमि विवादों से जुड़े हैं। जिस प्रकार ग्रामीण आबादी को लाभ देने के लिए इस तरह की पहल की गई थी, उसी तरह नक्शा परियोजना शहरी भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम कदम है। इससे नागरिकों के संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। यह पायलट प्रोजेक्ट देश के 26 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा, जिसमें कुल 152 शहर शामिल किए गए हैं। पहली बार देश में शहरी भूमि रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण संभव होगा, जिससे संपत्ति से जुड़ी धोखाधड़ी पर रोक लगेगी और भूमि रिकॉर्ड्स में पारदर्शिता आएगी। यह परियोजना डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत केंद्रीय भूमि संसाधन विभाग द्वारा शुरू की गई है।
शहरी भूमि रिकॉर्ड के निर्माण और प्रबंधन में सहायता मिलेगी
इस योजना के तहत 141 जिलों के 152 शहरों में आधुनिक भूमि सर्वेक्षण होगा, जिससे शहरी भूमि रिकॉर्ड के निर्माण और प्रबंधन में सहायता मिलेगी। यह सर्वेक्षण अत्याधुनिक जीआईएस तकनीक के माध्यम से किया जाएगा, जिससे सटीक और व्यापक भू-स्थानिक डेटाबेस तैयार होगा। हवाई और जमीनी सर्वेक्षण को जोड़कर भूमि प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इससे संपत्ति स्वामित्व के रिकॉर्ड व्यवस्थित और पारदर्शी होंगे, जिससे शहरी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने में सहायता मिलेगी। साथ ही, शहरी क्षेत्रों के लिए भू-स्थानिक मैपिंग करने से अदालतों में लंबित मामलों के समाधान, कानूनी दस्तावेजों की सटीकता और ऐतिहासिक भूमि डेटा विश्लेषण में भी सहायता मिलेगी। इस पहल से संपत्ति कर संग्रहण में भी सुधार होगा, जिससे शहरी निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।
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आसानी से मिलेगा लोन
यह योजना संपत्ति लेन-देन और ऋण प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल बनाएगी। साथ ही, रियल एस्टेट सेक्टर को भी इससे काफी लाभ मिलेगा। डिजिटल भूमि प्रबंधन प्रणाली से आम नागरिकों का भरोसा बढ़ेगा और संपत्ति धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आएगी। इस सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश के 9 जिलों के 10 शहरों को शामिल किया गया है, जिनमें शाहगंज, छनेरा, अलीराजपुर, देपालपुर, धार कोठी, मेघनगर, माखन नगर, विदिशा, सांची और उन्हेल प्रमुख हैं। सटीक भूमि डेटा से बेहतर प्लानिंग, बुनियादी ढांचे का विकास, शहरी विस्तार, परिवहन योजनाओं और आवासीय परियोजनाओं को गति मिलेगी। इसके अलावा, आपदा प्रबंधन योजनाओं को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। शुरुआत में यह पायलट प्रोजेक्ट 26 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में एक वर्ष तक संचालित किया जाएगा। इसके बाद अन्य जिलों और शहरों तक इसका विस्तार किया जाएगा। इस परियोजना से शहरी भूमि प्रशासन अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगा, जिससे देशभर में भूमि संबंधी मामलों को सुव्यवस्थित करने में सहायता मिलेगी।
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नक्शा परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहरी भूमि रिकॉर्ड का निर्माण और उनके प्रबंधन में सुधार करना है। अभी देशभर के विभिन्न राजस्व न्यायालयों में लाखों प्रकरण लंबित हैं, जो भूमि विवादों से जुड़े हैं। जिस प्रकार ग्रामीण आबादी को लाभ देने के लिए इस तरह की पहल की गई थी, उसी तरह नक्शा परियोजना शहरी भूमि रिकॉर्ड के आधुनिकीकरण की दिशा में एक अहम कदम है। इससे नागरिकों के संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। यह पायलट प्रोजेक्ट देश के 26 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा, जिसमें कुल 152 शहर शामिल किए गए हैं। पहली बार देश में शहरी भूमि रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण संभव होगा, जिससे संपत्ति से जुड़ी धोखाधड़ी पर रोक लगेगी और भूमि रिकॉर्ड्स में पारदर्शिता आएगी। यह परियोजना डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत केंद्रीय भूमि संसाधन विभाग द्वारा शुरू की गई है।
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शहरी भूमि रिकॉर्ड के निर्माण और प्रबंधन में सहायता मिलेगी
इस योजना के तहत 141 जिलों के 152 शहरों में आधुनिक भूमि सर्वेक्षण होगा, जिससे शहरी भूमि रिकॉर्ड के निर्माण और प्रबंधन में सहायता मिलेगी। यह सर्वेक्षण अत्याधुनिक जीआईएस तकनीक के माध्यम से किया जाएगा, जिससे सटीक और व्यापक भू-स्थानिक डेटाबेस तैयार होगा। हवाई और जमीनी सर्वेक्षण को जोड़कर भूमि प्रशासन को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। इससे संपत्ति स्वामित्व के रिकॉर्ड व्यवस्थित और पारदर्शी होंगे, जिससे शहरी योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने में सहायता मिलेगी। साथ ही, शहरी क्षेत्रों के लिए भू-स्थानिक मैपिंग करने से अदालतों में लंबित मामलों के समाधान, कानूनी दस्तावेजों की सटीकता और ऐतिहासिक भूमि डेटा विश्लेषण में भी सहायता मिलेगी। इस पहल से संपत्ति कर संग्रहण में भी सुधार होगा, जिससे शहरी निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।
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यह योजना संपत्ति लेन-देन और ऋण प्राप्ति की प्रक्रिया को सरल बनाएगी। साथ ही, रियल एस्टेट सेक्टर को भी इससे काफी लाभ मिलेगा। डिजिटल भूमि प्रबंधन प्रणाली से आम नागरिकों का भरोसा बढ़ेगा और संपत्ति धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आएगी। इस सर्वेक्षण में मध्यप्रदेश के 9 जिलों के 10 शहरों को शामिल किया गया है, जिनमें शाहगंज, छनेरा, अलीराजपुर, देपालपुर, धार कोठी, मेघनगर, माखन नगर, विदिशा, सांची और उन्हेल प्रमुख हैं। सटीक भूमि डेटा से बेहतर प्लानिंग, बुनियादी ढांचे का विकास, शहरी विस्तार, परिवहन योजनाओं और आवासीय परियोजनाओं को गति मिलेगी। इसके अलावा, आपदा प्रबंधन योजनाओं को भी अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। शुरुआत में यह पायलट प्रोजेक्ट 26 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में एक वर्ष तक संचालित किया जाएगा। इसके बाद अन्य जिलों और शहरों तक इसका विस्तार किया जाएगा। इस परियोजना से शहरी भूमि प्रशासन अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगा, जिससे देशभर में भूमि संबंधी मामलों को सुव्यवस्थित करने में सहायता मिलेगी।
