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Indore News: सीमांकन के बगैर हो गए आसपास निर्माण, गर्मी शुरू होते ही सूख गया पिपलियाहाना तालाब

Mon, 01 Apr 2024 06:37 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Mon, 01 Apr 2024 06:37 PM IST
सार

ट्रीटमेंट प्लांट से ढाई लाख लीटर पानी तालाब में छोड़ने की कवायद नगर निगम ने की। इसके लिए एक प्लांट भी तालाब के पास बनाया, लेकिन हकीकत यह है कि प्लांट पूरे समय काम नहीं करता। बीच-बीच में उसे बंद कर दिया जाता है।

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Indore News: Construction took place around without demarcation, Pipliyana pond dried up as soon as summer sta
अप्रैल में ही सूूख गया पिपलियाहाना तालाब। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इंदौर का पिपलियाहाना तालाब अप्रैल माह शुरू होने से पहले ही सूख गया है। पहले इसमेें वर्ष भर पानी रहता था। इस तालाब को जीवित रखने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कई निर्देश दिए थे। उसका पालन नहीं हुआ। सिर्फ जिला कोर्ट की बिल्डिंग 50 फीट पीछे की गई,लेकिन तालाब के प्राकृतिक बहाव हो रहे निर्माणों की अनदेखी की गई। तालाब के पास जो एसटीपी प्लांट लगाया गया है। वह भी 24 घंटे काम नहीं करता हैै। इस वजह से तालाब जल्दी सूख रहा है और आसपास के क्षेत्रों का भूजल स्तर भी कम हो रहा है।

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पिपलियाहाना तालाब 50 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में फैला हुआ है और उसका केचमेंट एरिया और चैनल भी था, लेकिन बीते 15 वर्षों मेें तालाब के केचमेंट एरिया पर स्कीम-140 की सड़क बना दी गई। इसके अलावा एक बस्ती तालाब की जमीन पर बस गई।

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गोयल नगर का कुछ हिस्सा भी तालाब की जमीन पर है। वर्ष 2017 में आधे तालाब के हिस्से में जिला कोर्ट की बिल्डिंग के लिए लोक निर्माण विभाग ने रिटेनिंग वाॅल बना दी थी। लोहे और सीमेंट कांक्रिट की मोटी दीवार के कारण तब तालाब में पानी नहीं भर पाया था। इसके बाद रहवासियों और शहर के गणमान्य नागरिकों ने तालाब के लिए आंदोलन किए।
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मामला एनजीटी और हाईकोर्ट तक पहुंचा। इसके बाद कोर्ट बिल्डिंग पीछे हटाकर बनाने का फैसला लिया। तब एनजीटी ने तालाब का सीमांकन करने और तालाब की चैनलों पर निर्माण न होने के आदेश भी दिए थे, लेकिन उसका पालन जिम्मेदार संस्थानों ने नहीं किया।

पूरे समय नहीं मिलता प्लांट का पानी

ट्रीटमेंट प्लांट से ढाई लाख लीटर पानी तालाब में छोड़ने की कवायद नगर निगम ने की। इसके लिए एक प्लांट भी तालाब के पास बनाया, लेकिन हकीकत यह है कि प्लांट पूरे समय काम  नहीं करता। बीच-बीच में उसे बंद कर दिया जाता है और तालाब में हर दिन ढाई लाख लीटर पानी नहीं मिलता। यदि प्लांट 24 घंटे काम करता तो तालाब में पानी नहीं सूखता। ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता अाधा एमएलडी है। उसे नगर निगम को एक एमएलडी करना चाहिए।-अजय सिंह नरुका, पूर्व सभापति नगर निगम

तालाब का सीमांकन जरुरी

हमने तालाब की जमीन बचाई। रहवासियों के साथ जल सत्याग्रह किया। एनजीटी ने प्रशासन का तालाब का सीमांकन कराने के लिए कहा था, ताकि यह पता चल सके कि तालाब की जमीन पर कितना अवैध निर्माण हो चुका है। तालाब केे प्राकृतिक बहाव को रोक दिया गया है। जब तक उसे ठीक नहीं किया जाएगा। तालाब मेें पानी वर्षभर नहीं रह सकता है।

आसपास की 30 काॅलोनियों का भूजल स्तर बढ़ाता है तालाब

-तालाब लबालब होने पर आसपास की 30 से ज्यादा काॅलोनियों का भूजल स्तर मेंटेन रहता है। अप्रैल मई माह में भी आसपास के क्षेत्रों के बोरिंग नहीं सूखते है।

-तालाब में वर्षभर पानी रहे तो तालाब पर्यटन स्थल का रुप भी ले सकता है। पहले यहां नाव चलाने की योजना थी। तत्कालीन महापौर परिषद सदस्य समीर चिटनीस ने तालाब को संवारने की योजना पर काम भी शुरू किया था।

- तालाब की पाल पर ग्रीन बेेल्ट भी हो सकता है विकसित। हरियाली रहने से तापमान कम रहता है।

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