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इंदौरः यूट्यूब पर देखकर जांघ पर लगाया इंजेक्शन, चली गई जान, फॉरेंसिक रिपोर्ट ने डॉक्टरों को चौंकाया
Tue, 03 Nov 2026 01:20 PM IST
अर्जुन रिछारिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Tue, 03 Nov 2026 01:20 PM IST
सार
यूट्यूब पर वीडियो देखकर दर्द निवारक दवा का गलत तरीके से इंजेक्शन लगाने से नेपाली युवक की ओवरडोज से मौत हो गई। एमजीएम मेडिकल कॉलेज की डॉ. प्रज्ञा सिसोदिया के इस केस पर आधारित शोधपत्र को राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में पहला स्थान मिला।
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डॉ. प्रज्ञा सिसोदिया और टीम।
- फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
विस्तार
इंदौर के विजय नगर क्षेत्र में अगस्त 2025 में एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां इंटरनेट पर उपलब्ध भ्रामक जानकारी का गलत इस्तेमाल एक नेपाली युवक की जान जाने का कारण बन गया। युवक ने यूट्यूब पर वीडियो देखने के बाद दर्द निवारक दवा का असामान्य और खतरनाक तरीके से इस्तेमाल किया। उसने टैबलेट को चम्मच में गर्म करके सिरिंज के जरिए अपनी जांघ की फेरोमल आर्टरी में इंजेक्शन लगाया। दवा की अत्यधिक मात्रा (ओवरडोज) के शरीर में जाने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस संवेदनशील मामले पर तैयार फॉरेंसिक और वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित शोधपत्र को अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। यह शोधपत्र एमजीएम मेडिकल कॉलेज इंदौर के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग की डॉ. प्रज्ञा सिसोदिया द्वारा प्रस्तुत किया गया है।
घटनास्थल से मिले दवाओं के स्ट्रिप, चम्मच और सिरिंज
अगस्त 2025 में घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम युवक के किराए के कमरे पर पहुंची। गहन जांच के दौरान कमरे से दर्द निवारक दवाओं की 2 खाली स्ट्रिप, पाउडर के अवशेष लगा हुआ एक चम्मच, लाइटर और एक इस्तेमाल की गई सिरिंज बरामद की गई। इन भौतिक साक्ष्यों के आधार पर विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि युवक ने दवा का असामान्य रूप से सेवन किया था। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, संबंधित दर्द निवारक दवा का उपयोग बेहद गंभीर स्थितियों में केवल योग्य डॉक्टर की सलाह और चिकित्सकीय निगरानी में ही किया जाता है। बिना किसी डॉक्टर की सलाह के इसका स्वयं इस्तेमाल करना जानलेवा साबित हो सकता है।
मोबाइल की यूट्यूब सर्च हिस्ट्री से खुला राज
मामले की विस्तृत जांच के लिए पुलिस ने मृतक युवक का मोबाइल फोन जब्त कर उसकी डिजिटल गतिविधियों की जांच की। मोबाइल की यूट्यूब सर्च हिस्ट्री खंगालने पर कई ऐसे वीडियो और सामग्रियां मिलीं, जिनमें टैबलेट को चम्मच पर गर्म कर सिरिंज के माध्यम से शरीर में इंजेक्ट करने का तरीका बताया गया था। इस डिजिटल साक्ष्य ने जांच टीम को एक स्पष्ट दिशा दी। वैज्ञानिक जांच में यह पूरी तरह साबित हो गया कि युवक ने इंटरनेट पर दिखाए गए जानलेवा तरीके को अपनाया और दवा की ओवरडोज के कारण उसकी जान चली गई।
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भ्रामक ऑनलाइन जानकारी के खतरों पर वैज्ञानिक शोधपत्र
इस दुखद मामले को डॉ. प्रज्ञा सिसोदिया ने अपने शोध अध्ययन का मुख्य विषय बनाया। उनके शोधपत्र का शीर्षक 'Accidental Death Due to Internet Abuse of Therapeutic Drug: The Emerging Threat: A Case Report' रखा गया। इस पत्र में इंटरनेट पर बिना किसी प्रमाणिकता के मौजूद अधूरी या भ्रामक जानकारियों के आधार पर दवाओं के इस्तेमाल से पैदा होने वाले जानलेवा खतरों का गहन फॉरेंसिक और वैज्ञानिक विश्लेषण पेश किया गया। शोध में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि ऑनलाइन उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारियों का बिना डॉक्टरी समझ के प्रयोग कितना घातक हो सकता है।
राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में शोधपत्र को मिला प्रथम पुरस्कार
फॉरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में देशभर के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य और पोस्ट ग्रेजुएट छात्र शामिल हुए थे। कॉन्फ्रेंस की पेपर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता में डॉ. प्रज्ञा सिसोदिया के शोधपत्र को सर्वश्रेष्ठ घोषित करते हुए पहला स्थान प्रदान किया गया। उन्होंने अपना यह महत्वपूर्ण शोध कार्य फॉरेंसिक विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. बजरंग कुमार सिंह, डॉ. जेएस तोमर तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों के कुशल निर्देशन और मार्गदर्शन में पूरा किया।
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घटनास्थल से मिले दवाओं के स्ट्रिप, चम्मच और सिरिंज
अगस्त 2025 में घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम युवक के किराए के कमरे पर पहुंची। गहन जांच के दौरान कमरे से दर्द निवारक दवाओं की 2 खाली स्ट्रिप, पाउडर के अवशेष लगा हुआ एक चम्मच, लाइटर और एक इस्तेमाल की गई सिरिंज बरामद की गई। इन भौतिक साक्ष्यों के आधार पर विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि युवक ने दवा का असामान्य रूप से सेवन किया था। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, संबंधित दर्द निवारक दवा का उपयोग बेहद गंभीर स्थितियों में केवल योग्य डॉक्टर की सलाह और चिकित्सकीय निगरानी में ही किया जाता है। बिना किसी डॉक्टर की सलाह के इसका स्वयं इस्तेमाल करना जानलेवा साबित हो सकता है।
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मोबाइल की यूट्यूब सर्च हिस्ट्री से खुला राज
मामले की विस्तृत जांच के लिए पुलिस ने मृतक युवक का मोबाइल फोन जब्त कर उसकी डिजिटल गतिविधियों की जांच की। मोबाइल की यूट्यूब सर्च हिस्ट्री खंगालने पर कई ऐसे वीडियो और सामग्रियां मिलीं, जिनमें टैबलेट को चम्मच पर गर्म कर सिरिंज के माध्यम से शरीर में इंजेक्ट करने का तरीका बताया गया था। इस डिजिटल साक्ष्य ने जांच टीम को एक स्पष्ट दिशा दी। वैज्ञानिक जांच में यह पूरी तरह साबित हो गया कि युवक ने इंटरनेट पर दिखाए गए जानलेवा तरीके को अपनाया और दवा की ओवरडोज के कारण उसकी जान चली गई।
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भ्रामक ऑनलाइन जानकारी के खतरों पर वैज्ञानिक शोधपत्र
इस दुखद मामले को डॉ. प्रज्ञा सिसोदिया ने अपने शोध अध्ययन का मुख्य विषय बनाया। उनके शोधपत्र का शीर्षक 'Accidental Death Due to Internet Abuse of Therapeutic Drug: The Emerging Threat: A Case Report' रखा गया। इस पत्र में इंटरनेट पर बिना किसी प्रमाणिकता के मौजूद अधूरी या भ्रामक जानकारियों के आधार पर दवाओं के इस्तेमाल से पैदा होने वाले जानलेवा खतरों का गहन फॉरेंसिक और वैज्ञानिक विश्लेषण पेश किया गया। शोध में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया कि ऑनलाइन उपलब्ध चिकित्सकीय जानकारियों का बिना डॉक्टरी समझ के प्रयोग कितना घातक हो सकता है।
राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में शोधपत्र को मिला प्रथम पुरस्कार
फॉरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी की राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में देशभर के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के विभागाध्यक्ष, फैकल्टी सदस्य और पोस्ट ग्रेजुएट छात्र शामिल हुए थे। कॉन्फ्रेंस की पेपर प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता में डॉ. प्रज्ञा सिसोदिया के शोधपत्र को सर्वश्रेष्ठ घोषित करते हुए पहला स्थान प्रदान किया गया। उन्होंने अपना यह महत्वपूर्ण शोध कार्य फॉरेंसिक विभाग के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. बजरंग कुमार सिंह, डॉ. जेएस तोमर तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ फैकल्टी सदस्यों के कुशल निर्देशन और मार्गदर्शन में पूरा किया।
