Indore: इंदौर में कचरा कलेक्ट करने वाली गाडि़यां ज्यादा, कचरा ट्रांसफर स्टेशन कम, लगने लगी कतारें
शहर में सुबह छह बजे से दस बजे तक छह सौ गाडि़यां डोर-टू-डोर कचरा एकत्र करती है। पांच माह पहले इनकी संख्या 546 थी, लेकिन अब छह सौ से ज्यादा हो चुकी है। यह गाडि़यां निकट के स्टेशनों पर कचरा खाली करने जाती हैै।
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देशभर मेें सफाई में लगातार सात बार से सरताज बने इंदौर की सफाई व्यवस्था फिर पटरी पर आ गई है, लेकिन अब कचरा ट्रांसफर स्टेशनों की कमी शहर में नजर आने लगी है। डोर टू डोर कचरा गाडि़यों की संख्या पहले से बढ़ गई, लेकिन स्टेशनों की संख्या बीते सात सालों से दस से आगे नहीं बढ़ पाई। इस कारण अब स्टेशनों पर कचरा गाडि़यों को स्टेशनों पर कतार में लगकर इंतजार करना पड़ रहा है और वे दूसरी मर्तबा काॅलोनियों में देरी से जा रही है।
शहर में सुबह छह बजे से दस बजे तक छह सौ गाडि़यां डोर-टू-डोर कचरा एकत्र करती है। पांच माह पहले इनकी संख्या 546 थी, लेकिन अब छह सौ से ज्यादा हो चुकी है। यह गाडि़यां निकट के स्टेशनों पर कचरा खाली करने जाती हैै।
फिर यहां से बड़े वाहनों मेें कचरा देवगुराडि़या के ट्रेंचिंग ग्राउंड मेें जाता है। वहां कचरे का निपटना किया जाता हैै। फिलहाल आईटी पार्क, कबीटखेड़ी, पलासिया, सिरपुर स्टेशन पर कचरा गाडि़यों की कतार नजर आने लगी है। कर्मचारियों को आधे घंटे तक कतार मेें खड़े रहकर इंतजार करना पड़ता हैै। इस कारण वे दोबारा काॅलोनी में देरी से पहुंचते है। देरी के कारण रहवासी भी नाराज हो जाते हैै। मेयर पुष्य मित्र भार्गव का कहना है कि जल्दी ही शहर मेें नए स्टेशनों की संख्या बढ़ाई जाएगी और पुराने स्टेशनों की क्षमता भी बेहतर करेंगे।
रोज निकलता है 1200 टन कचरा
इंदौर में रोज 1200 टन कचरा निकलता है। शहर में एक भी कचरा पेटी नहीं है। शत प्रतिशत कचरा डोर टू डोर कचरा कलेक्शन वाहनों के जरिए पहले ट्रांसफर स्टेशन पहुंचता है, फिर वहां सेे ट्रेंचिंग ग्राउंड तक बड़े वाहनों में जाता है। इंदौर के एक कचरा ट्रांसफर स्टेशन की क्षमता 100 से 150 टन कचरे के संग्रहण की है।
