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Indore: इंदौर के समीप गौतमपुरा में खेला गया हिंगोट युद्ध, एक-दूसरे पर फेंके जलते हुए तीर

Fri, 01 Nov 2024 07:38 PM IST
अभिषेक चेंडके न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: अभिषेक चेंडके Updated Fri, 01 Nov 2024 07:38 PM IST
सार

पीठ पर बंधे तरकश से हिंगोट निकाले जाते है और उसे जलाकर दूसरी सेना की तरफ फेंका जाता है। यह युद्ध शुक्रवार को भी अंधेरा होने तक खेला गया। इसमें न कोई हारा न कोई जीता। अंधेरा होते ही युद्ध को विराम दिया।

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Indore:Hingot war played in Depalpur near Indore, burning arrows thrown at each other
हिंगोट युद्ध - फोटो : amar ujala

विस्तार

इंदौर से करीब 60 किलोमीटर देपालपुर तहसील के गौतमपुरा में दीपावली के दूसरे दिन शुक्रवार को हिंगोट युद्ध खेलने की परंपरा को फिर निभाया गया। इस अनूठी परंपरा के हजारों दर्शक साक्षी बने। कलंगी और तुर्रा नाम की सेनाएं आमने सामने थीं और उनके हाथों में थे जलते हुए हिंगोट, जो एक दूसरे पर फेंके गए। इस युद्ध की तैयारी बीते 10 दिनों से की जा रही थी।

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दोनों सेनाओं ने बारुद भरकर हिंगोट तैयार किए थे, जो शुक्रवार को एक-दूसरे पर बरसाए गए। इस दौरान दोनों टीमों के कुछ योद्धा घायल भी हुए। जलते हुए हिंगोट दर्शक दीर्घा में भी गिरे, लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई। शुक्रवार शाम को दोनों सेनाएं खुले मैदान में थीं। योद्धा खेल भावना का परिचय देते हुए पहले एक दूसरे के गले मिले फिर आमने सामने होकर हिंगोट युद्ध लड़ने के तैयार हो गए। यह हिंगोट पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध है और सैकड़ों वर्षों से खेला जा रहा है। इस युद्ध को देखने के लिए हजारों की संख्या में आसपास के गांवों के लोग जुटे।

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अंधेरा होते ही युद्ध थम गया
हिंगोट युद्ध गौतमपुरा और समीप के रुणजी गांव के ग्रामीण खेलते हैं। गौतमपुरा की सेना का नाम तुर्रा होता है और रुणजी गांव की सेना कलंगी कहलाती है। जलते हिंगोट से बचने के लिए योद्धा साफा पहनते है। इसके अलावा जलते हुए हिंगोट से बचने के लिए हाथ में ढाल भी रखते है। कुछ नौजवान युवक हेलमेट पहनकर भी युद्ध के मैदान में उतरते हैं। पीठ पर बंधे तरकश से हिंगोट निकाले जाते हैं और उसे जलाकर दूसरी सेना की तरफ फेंका जाता है। यह युद्ध शुक्रवार को भी अंधेरा होने तक खेला गया। इसमें न कोई हारा न कोई जीता। अंधेरा होते ही युद्ध को विराम दिया गया और थके मांदे योद्धा एक दूसरे से गले मिलकर अपने-अपने गांवों की तरफ लौटे।

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फल को सूखाकर भरते हैं बारुद
हिंगोट युद्ध की तैयारी के लिए अखरोट के आकार के इसके फल को सूखाकर अंदर उसमें बारुद भरी जाती है। युद्ध के लिए गौतमपुरा के रहवासी पेड़ों से हिंगोट तोड़कर महीनों पहले जमा कर लेते हैं। हिंगोट सीधी दिशा में चले, इसके लिए हिंगोट में बांस की पतली किमची लगाकर तीर जैसा बना दिया जाता है। योद्धा हिंगोट सुलगाकर दूसरे दल के योद्धाओं पर फेंकते हैं। सुरक्षा के लिए दोनों दलों के योद्धाओं के हाथ में ढाल भी रहती है।


 

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