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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore: Salute to the martyrdom of martyr Colonel Ashutosh Sharma, saplings planted on the occasion of birthday

इंदौर: कर्नल आशुतोष शर्मा की शहादत को सलाम, जन्मदिन के मौके पर रोपे गए पौधे

Sat, 03 Jul 2021 11:17 PM IST
सुरेंद्र जोशी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 03 Jul 2021 11:17 PM IST
सार

राष्ट्रीय राइफल्स के शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा के जन्मदिन के मौके पर तीन जुलाई को इंदौर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें उनके प्रेरक व्यक्तित्व व कृतित्व का स्मरण किया गया। 

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Indore: Salute to the martyrdom of martyr Colonel Ashutosh Sharma, saplings planted on the occasion of birthday
Martyr Colonel Ashutosh Sharma - फोटो : self

विस्तार

राष्ट्रीय राइफल्स के शहीद कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा की जयंती पर शनिवार को उनकी याद में वन एमपी स्क्वाड्रन, एनसीसी के इंदौर के नेहरू स्टेडियम स्थित परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। पौधारोपण के साथ ही अन्य कार्यक्रम में उनकी शहादत व प्रेरणादायी व्यक्तित्व का स्मरण किया गया। 

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कर्नल शर्मा के भाई राहुल शर्मा ने बताया कि हर साल तीन जुलाई को दोस्त और परिवारजन अपने प्रिय आशु का जन्मदिन मनाते थे। दो मई, 2020 को 21 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर ने अपने जवानों के साथ विशिष्ट वीरता का परिचय दिया, अंतिम सांस और रक्त की आखिरी बूंद तक आतंकियों से लड़ाई लड़ी। भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपरा में अपना जीवन लगा दिया, इसी बलिदान ने कर्नल आशुतोष शर्मा को राष्ट्रीय हीरो बना दिया।
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कर्नल आशुतोष शर्मा ने स्वेच्छा से 21 आरआर (राष्ट्रीय राइफल्स) की कमान संभाली थी क्योंकि उनका मानना था कि उनकी भागीदारी और प्रतिबद्धता, आतंकवाद से ग्रस्त उत्तरी कश्मीर में उपयोगी बदलाव लाएगी। सद्भावना के इस कदम से उन्हें न केवल भारतीय सेना में सीनियर्स और साथी अधिकारियों से सराहना मिली बल्कि हंदवाड़ा के लोगों ने भी इस जीवट सिपाही को सराहा।
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कर्नल आशुतोष शर्मा को तीन बार सेना पदक से सम्मानित किया गया और उनकी जांबाज यूनिट की भारतीय थलसेना के सेनाध्यक्ष भी सराहना की। शहीद कर्नल आशुतोष शर्मा इंफ्रेंट्री के जांबाज कमांडिग ऑफिसर थे और हर दिन किसी भी कठिन परिस्थिति का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहते थे। जिस दिन उन्होंने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उस दिन भी वे निर्दोष नागरिकों की जान बचाने के लिए मौके पर पहुंचे थे और अपने जवानों की अगुवाई कर रहे थे। 

कर्नल आशुतोष के जीवन का एक ही नारा था-राष्ट्र सर्वप्रथम। कर्नल शर्मा अपने पीछे मां, पत्नी, बेटी, भाई-बहन और कई दोस्त छोड़ गए। कर्नल आशुतोष शर्मा ने अपनी मातृभूमि के लिए जीवन का हर पल जिया और अपनी मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी। कभी हार न मानने वाला उनका जीवट रवैया आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। कर्नल आशुतोष को गणतंत्र दिवस के अवसर पर 26 जनवरी 2021 को तीसरी बार वीरता के लिए सेना पदक से सम्मानित किया गया।


हंदवाड़ा मुठभेड़ में दी थी शहादत
कर्नल आशुतोष शर्मा को दो मई 2020 को खुफिया रिपोर्ट के जरिए मालूम पड़ा कि कश्मीर के हंदवाड़ा के पास चंगिमुल्ला गांव में एक घर के अंदर आतंकवादी छिपे हैं और उन्होंने नागरिकों को बंधक बना लिया है। इसके बाद तुरंत कर्नल शर्मा ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ घेराबंदी और तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान नागरिकों को बचा लिया गया। 18 घंटे तक चले ऑपरेशन में दोनों आतंकियों को ढेर कर दिया गया, लेकिन अपने अंतिम रण के दौरान कर्नल आशुतोष शर्मा शहीद हो गए। इस मुठभेड़ में चार अन्य भारतीय सुरक्षा बल के जवान भी शहीद हुए थे। पांच सालों में कर्नल शर्मा पहले कमांडिंग ऑफिसर थे, जिन्होंने एक मुठभेड़ में अपनी जान गंवाई थी।

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