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Indore news: प्रोफेसर ने बनाया ऐसा पंखा जो फांसी लगाने की कोशिश करते ही आ जाएगा नीचे, तीन साल में हुआ तैयार
Wed, 18 May 2022 06:21 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Wed, 18 May 2022 06:21 PM IST
सार
इंदौर के एक प्रोफेसर ने ऐसा पंखा बनाया जो फांसी लगने से रोकेगा। जैसे ही कोई व्यक्ति फांसी लगाने के लिए पंखे के लटकेता वैसे ही पंखा नीचे आ जाएगा। बाद में वापस ऊपर चला जाएगा। तीन साल में यह पंखा तैयार हुआ है।
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यह है वह पंखा जो प्रोफेसर ने किया है तैयार
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
अक्सर सुनने में आता है कि फांसी लगाने के लिए लोग पंखे का इस्तेमाल करते हैं। आत्महत्या के अधिकांश मामलों में पंखे से लटककर फांसी लगाने की बात सामने आती है। इसके चलते इंदौर के प्रोफेसर ने ऐसा पंखा तैयार किया है जो फांसी लगाते ही नीचे आ जाएगा। सुनने में अजीब लगे मगर ये सच है। आइये जानते हैं कि कैसे तैयार हुआ है ये पंखा और क्या है इसकी खासियत।
दरअसल इंदौर के एसजीएसआईटीएस के पूर्व प्रोफेसर व डायरेक्टर डॉ. पीके चांदे ने यह पंखा बनाया है। तीन साल की मेहनत के बाद यह पंखा तैयार हुआ है। प्रोफेसर डॉ. चांदे ने बताया कि 1892 में जर्मन इंजीनियर फिलिप एच डीएही ने सीलिंग फेन बनाया था, तब किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि हवा देने वाला यह पंखा किसी इंसान की जान भी ले सकेगा। मैंने अपने रिश्तेदार और पड़ोसी का पंखा साफ करते वक्त गिरते देखा था। एक रिश्तेदार की ऐसे ही गिरने से रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। आएदिन पंखे से लटककर लोग सुसाइड कर रहे हैं। मैंने सोचा कि ऐसा पंखा बनाते हैं, जो आसानी से नीचे आ जाए और दोबारा ऊपर चले जाए। मैंने कई महीनों की रिसर्च के बाद पंखे के दो मॉड्यूल तैयार किए। जब ये सफल हुए तो इसका इसका फाइनल प्रोटोटाइप तैयार किया। इसके सिस्टम की कीमत 400 से 500 रुपये है।
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दरअसल इंदौर के एसजीएसआईटीएस के पूर्व प्रोफेसर व डायरेक्टर डॉ. पीके चांदे ने यह पंखा बनाया है। तीन साल की मेहनत के बाद यह पंखा तैयार हुआ है। प्रोफेसर डॉ. चांदे ने बताया कि 1892 में जर्मन इंजीनियर फिलिप एच डीएही ने सीलिंग फेन बनाया था, तब किसी ने भी नहीं सोचा होगा कि हवा देने वाला यह पंखा किसी इंसान की जान भी ले सकेगा। मैंने अपने रिश्तेदार और पड़ोसी का पंखा साफ करते वक्त गिरते देखा था। एक रिश्तेदार की ऐसे ही गिरने से रीढ़ की हड्डी टूट गई थी। आएदिन पंखे से लटककर लोग सुसाइड कर रहे हैं। मैंने सोचा कि ऐसा पंखा बनाते हैं, जो आसानी से नीचे आ जाए और दोबारा ऊपर चले जाए। मैंने कई महीनों की रिसर्च के बाद पंखे के दो मॉड्यूल तैयार किए। जब ये सफल हुए तो इसका इसका फाइनल प्रोटोटाइप तैयार किया। इसके सिस्टम की कीमत 400 से 500 रुपये है।
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एसजीएसआईटीएस की इन्क्यूबेशन लैब में लगी थ्रीडी प्रिंटिंग की मदद से तैयार हुआ है पंखा
- फोटो : सोशल मीडिया
पंखे को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति फांसी लगाने की कोशिश करेगा तो पंखा नीचे आ जाएगा। व्यक्ति के हटने के बाद वापस ऊपर चला जाएगा। यह पंखा एसजीएसआईटीएस के सीआईडीआई (इन्क्यूबेशन सेंटर) की मदद से तैयार किया है। यह पंखा तीन मैकेनिकल सिस्टम के जरिए काम करता है। पहला सिस्टम इलेक्ट्रिक कपलर, दूसरा सिस्टम ट्राई मोड्यूलर लॉक और तीसरा सिस्टम टेलिस्कोपिक पाइप है। इस पंखे में मुख्य सिस्टम मोड्यूलर लॉक है, जिससे पंखा झटके से नीचे नहीं गिरता। लॉक तीन बार खुलता है और वापस काम होने के बाद ऊपर जाकर बंद हो जाता है। पंखे का नाम सिम डिवाइस (सेफ ईजी इफेक्टिव मेंटेनेंस ऑफ सीलिंग फेन) रखा है। क्योंकि यह बहुत सुरक्षित है और इस्तेमाल में आसान है। इसका सिस्टम बनाने में वैसे तो तीन साल में 7 से 8 लाख रुपये खर्च हुए, लेकिन इसके सिस्टम की कीमत 400 से 500 रुपये है। प्रोफेसर डॉ. चांदे एसजीएसआईटीएस के डॉयरेक्टर के साथ ही मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट और एनएमआईएस के डॉयरेक्टर रह चुके हैं। आईआईएम इंदौर और जापान की यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के पद पर भी काम कर चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद सीएस माइंड नाम से स्टार्टअप शुरू किया है।
