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इंदौर: युवती के धर्मांतरण की जबरन कोशिश करने वाले नौ आरोपियों को जमानत नहीं

Thu, 28 Jan 2021 10:48 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, इंदौर
पीटीआई, इंदौर Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 28 Jan 2021 10:48 PM IST
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Indore Court refuses to grant bail to nine accused forcibly attempting to convert a woman Christian
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

जबरन धर्मांतरण के खिलाफ मध्यप्रदेश सरकार के नए कानून के तहत यहां दो दिन पहले गिरफ्तार नौ आरोपियों को जमानत देने से जिला अदालत ने गुरुवार को इनकार कर दिया। इस मामले में पुलिस ने 25 वर्षीय हिंदू युवती की शिकायत पर मामला दर्ज करते हुए उसके माता-पिता समेत इन नौ लोगों को गिरफ्तार किया था।

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युवती का आरोप है कि ईसाई समुदाय के 'सत्प्रकाशन संचार केंद्र' में मंगलवार को गणतंत्र दिवस पर उसका धर्म जबरन बदलने की कोशिश की जा रही थी। खास बात यह है कि यह केंद्र भंवरकुआं थाने के ठीक पीछे है जहां पुलिस ने 'मध्यप्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2020' के संबद्ध प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यतींद्र कुमार गुरु ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद शिकायतकर्ता युवती के माता-पिता और सात अन्य लोगों की जमानत अर्जियां खारिज कर दीं। अदालत ने अपने आदेश में कहा, 'मामले में पेश तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए आरोपियों को जमानत का लाभ दिया जाना उचित प्रतीत नहीं होता है।'
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इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि आरोपी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से ताल्लुक रखने वाले हैं। बचाव पक्ष ने कहा कि सभी आरोपियों को झूठे मामले में फंसाया गया है और वे सत्प्रकाशन संचार केंद्र में केवल गणतंत्र दिवस मनाने के उद्देश्य से इकट्ठा हुए थे।

बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि घटनास्थल पर कोई भी ईसाई धर्मगुरु मौजूद नहीं था और ऐसे में किसी व्यक्ति को इस धर्म में शामिल कैसे किया जा सकता है?

माता-पिता की ही थी धर्म बदलवाने की साजिश

उधर, अभियोजन पक्ष के एक अधिकारी ने बताया कि 25 वर्षीय हिंदू युवती ने इस संबंध में एक मामला दर्ज कराया है। अभियोजन पक्ष ने बताया कि मामले के अनुसार कि उसके माता-पिता मंगलवार सुबह नानी के घर ले जाने का कथित झांसा दे उसे ईसाई समुदाय के सत्प्रकाशन संचार केंद्र में चल रही प्रार्थना सभा में ले गए था।

इंदौर शहर के पास स्थित गुजरखेड़ा गांव से ताल्लुक रखने वाली युवती की शिकायत के हवाले से प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि इस केंद्र में कुछ लड़कियों ने उसके हाथ-पैर खींचकर उसके साथ मारपीट की और वहां उसे एक हॉल में जबरन बैठाकर रखा गया। बता दें, इस मामले का एक वीडियो भी सामने आ चुका है।

युवती के हवाले से दर्ज कराई गई प्राथमिकी में यह भी लिखा गया कि वह हिंदू धर्म में जन्मी है, इसी धर्म का पालन करती है और ईसाई धर्म अपनाने की उसकी कोई इच्छा नहीं है। लेकिन उसके माता-पिता और सत्प्रकाशन संचार केंद्र में मौजूद ईसाई आयोजकों ने उसके धर्मांतरण की कथित तौर पर जबरिया कोशिश की।

केंद्र के निदेशक ने किया खारिज किए आरोप

उधर, सत्प्रकाशन संचार केंद्र के निदेशक फादर बाबू जोसफ ने इन आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि ईसाई समुदाय के एक समूह को मंगलवार को बैठक व प्रार्थना सभा के लिए केंद्र का हॉल दिया गया था। लेकिन कुछ असामाजिक तत्व धर्मांतरण गतिविधि चलने का आरोप लगाते हुए हॉल में बलपूर्वक घुस गए थे।

इस संबंध में एक वीडियो भी सामने आ चुका है जिसमें घटना के दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता केंद्र के परिसर में नारेबाजी करते नजर आए थे। दल की स्थानीय इकाई के प्रमुख तन्नू शर्मा का आरोप है कि यहां इंदौर के साथ खंडवा, झाबुआ, बुरहानपुर और अन्य जिलों के करीब 300 लोगों को धर्मान्तरण के लिए बुलाया गया था।

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