{"_id":"62021a93d8c6bf26c230e501","slug":"indore-corona-patients-are-decreasing-rapidly-but-there-is-also-concern-in-mind-that-the-situation-should-not-be-like-last-year-in-march-april","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंदौर: तेजी से घट रहे कोरोना मरीज मगर मन में चिंता यह भी कि मार्च-अप्रैल में पिछले साल जैसे न हो जाएं हालात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंदौर: तेजी से घट रहे कोरोना मरीज मगर मन में चिंता यह भी कि मार्च-अप्रैल में पिछले साल जैसे न हो जाएं हालात
Tue, 08 Feb 2022 12:54 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा
Updated Tue, 08 Feb 2022 12:54 PM IST
सार
इंदौर में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से घट रही है। बीते 24 घंटे में 335 नए मरीज मिले हैं, लेकिन मन में भय मार्च-अप्रैल का है। पिछले साल भी इन्हीं दो महीनों में हालात बिगड़े थे। इस कारण आंकड़े भले कम हो रहे हो लेकिन चिंता बरकरार है।
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कोरोना मरीजों की संख्या में आ रही है। धीरे-धीरे हालात सुधरने लगे हैं और अब नए मरीजों की संख्या साढ़े तीन सौ के पास पहुंच गई है। बीते 24 घंटे में 335 नए कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। तीन मरीजों की मौत भी हुई है।
दरअसल, इंदौर में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका अब निराधार साबित हो रही है। इस माह के सात दिनों में मरीजों की संख्या तेजी से घट रही है और अब तीन सौ के आसपास पहुंच गई है। सोमवार रात को जारी बुलेटिन में 335 नए मरीज मिले हैं। इनमें से तीन मरीजों की मौत भी हुई है। इसी तरह करीब 510 मरीज अस्पताल से घर भी गए। जो एक्टिव मरीज हैं उनमें भी ज्यादातर का इलाज घर में ही चल रहा है। इस लिहाज से फरवरी माह के पहले पखवाड़े में कोरोना के पीक पर रहने का दावा अब निराधार होता दिख रहा है, लेकिन कोरोना के पिछले इतिहास को देखते मन में डर अब भी बरकरार है।
सता रही मार्च-अप्रैल की चिंता
कोरोना का आंकड़ा भले कम हो रहा हो लेकिन अब चिंता ये सता रही है कि पिछले साल अप्रैल में जो हालात थे कहीं इस बार भी वैसा कुछ न हो जाए। पिछले साल भी मार्च के बाद ही कोरोना ने कोहराम मचाया था और इसी कारण यह भय सता रहा है। स्वास्थ्य विभाग भी कह रहा है कि कोरोना खत्म नहीं हुआ है। पिछले साल मार्च-अप्रैल में ही हालात बिगड़े थे और ज्यादा मरीज इन्हीं दो महीनों में आए थे। इस कारण इस बार भी सतर्क रहने की जरुरत है। इधर डॉक्टरों की मानें तो फरवरी माह के मध्य तक कोरोना मरीजों की संख्या बेहद कम हो जाएगी लेकिन सतर्कता रखनी पड़ेगी। प्रशासन पाबंदियों में छूट भले दे दे लेकिन नागिरकों को सावधानी रखनी होगी। पिछले साल भी फरवरी में हालात लगभग सामान्य थे लेकिन मार्च के बाद से एकदम हालात बिगड़े और किसी को संभलने का मौका नहीं मिला।
विज्ञापन
विज्ञापन
दरअसल, इंदौर में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका अब निराधार साबित हो रही है। इस माह के सात दिनों में मरीजों की संख्या तेजी से घट रही है और अब तीन सौ के आसपास पहुंच गई है। सोमवार रात को जारी बुलेटिन में 335 नए मरीज मिले हैं। इनमें से तीन मरीजों की मौत भी हुई है। इसी तरह करीब 510 मरीज अस्पताल से घर भी गए। जो एक्टिव मरीज हैं उनमें भी ज्यादातर का इलाज घर में ही चल रहा है। इस लिहाज से फरवरी माह के पहले पखवाड़े में कोरोना के पीक पर रहने का दावा अब निराधार होता दिख रहा है, लेकिन कोरोना के पिछले इतिहास को देखते मन में डर अब भी बरकरार है।
विज्ञापन
सता रही मार्च-अप्रैल की चिंता
कोरोना का आंकड़ा भले कम हो रहा हो लेकिन अब चिंता ये सता रही है कि पिछले साल अप्रैल में जो हालात थे कहीं इस बार भी वैसा कुछ न हो जाए। पिछले साल भी मार्च के बाद ही कोरोना ने कोहराम मचाया था और इसी कारण यह भय सता रहा है। स्वास्थ्य विभाग भी कह रहा है कि कोरोना खत्म नहीं हुआ है। पिछले साल मार्च-अप्रैल में ही हालात बिगड़े थे और ज्यादा मरीज इन्हीं दो महीनों में आए थे। इस कारण इस बार भी सतर्क रहने की जरुरत है। इधर डॉक्टरों की मानें तो फरवरी माह के मध्य तक कोरोना मरीजों की संख्या बेहद कम हो जाएगी लेकिन सतर्कता रखनी पड़ेगी। प्रशासन पाबंदियों में छूट भले दे दे लेकिन नागिरकों को सावधानी रखनी होगी। पिछले साल भी फरवरी में हालात लगभग सामान्य थे लेकिन मार्च के बाद से एकदम हालात बिगड़े और किसी को संभलने का मौका नहीं मिला।
विज्ञापन
