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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Anuppur News ›   Shahdol MP Himadri Singh and husband Narendra Singh Maravi's divorce has been approved.

एमपी: शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र मरावी के तलाक को मिली अदालती मंजूरी, पांच साल से रह रहे थे अलग

Mon, 14 Sep 2026 03:58 PM IST
अनूपपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अनूपपुर Published by: अनूपपुर ब्यूरो Updated Mon, 14 Sep 2026 03:58 PM IST
सार

शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी के विवाह विच्छेद को राजेंद्रग्राम जिला अदालत ने मंजूरी दे दी। दोनों करीब पांच वर्षों से अलग रह रहे थे। आपसी सहमति से तलाक की डिक्री जारी हुई। बेटी गिरिशा मां के साथ रहेगी और उसके पालन-पोषण, शिक्षा व अन्य खर्च हिमाद्री सिंह उठाएंगी।

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Shahdol MP Himadri Singh and husband Narendra Singh Maravi's divorce has been approved.
सांसद हिमाद्री सिंह और पति नरेंद्र सिंह मरावी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अनूपपुर जिले की राजेंद्रग्राम जिला अदालत ने शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह और उनके पति नरेंद्र सिंह मरावी के विवाह विच्छेद को मंजूरी दे दी है। अदालत ने दोनों की पारस्परिक सहमति से विवाह विच्छेद की डिक्री पारित की। दोनों का विवाह 23 नवंबर, 2017 को हिंदू रीति-रिवाज से राजेंद्रग्राम में हुआ था। शादी के बाद दोनों के बीच मतभेद उत्पन्न हो गए, जिसके कारण वे पिछले लगभग पांच वर्षों से अलग रह रहे थे।
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दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर कोई आरोप नहीं लगाया
शादी के बाद हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी राजेंद्रग्राम में साथ रहते थे। इस दौरान 20 जून, 2019 को उनकी बेटी का जन्म हुआ। बेटी के जन्म के बाद दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद शुरू हो गया। विवाद बढ़ने पर दोनों का आपस में मिलना-जुलना बंद हो गया और वे 5 मई, 2021 से अलग रहने लगे। अदालत में याचिका दाखिल कर सांसद हिमाद्री सिंह ने बताया कि दोनों के बीच अब साथ रहने की कोई संभावना नहीं बची है और उनका दांपत्य जीवन समाप्त हो चुका है। याचिका में दोनों ने आपसी सहमति से विवाह विच्छेद की इच्छा जताई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर कोई आरोप नहीं लगाया।
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बेटी की जिम्मेदारी और भरण-पोषण
अदालत के समक्ष दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि बेटी गिरिशा अपनी मां हिमाद्री सिंह के साथ ही रहेगी। बेटी के पालन-पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य और विवाह से जुड़े सभी खर्चों का वहन हिमाद्री सिंह स्वयं करेंगी। उन्होंने बताया कि वह अपने अथवा अपनी बेटी के लिए नरेंद्र सिंह मरावी से किसी भी प्रकार का भरण-पोषण या गुजारा भत्ता नहीं मांगेंगी। साथ ही दोनों पक्षों ने स्पष्ट किया कि विवाह के समय मिले उपहारों और आभूषणों को लेकर भी कोई विवाद नहीं है।


पुनर्विचार और सुलह के लिए दिया था छह महीने का समय
अदालत ने दोनों पक्षों को पुनर्विचार और सुलह के लिए छह महीने का समय दिया था। इस दौरान न्यायालय ने दोनों के बीच पुनर्मिलाप कराने की कोशिश की, लेकिन यह सफल नहीं हो सकी। छह महीने की अवधि पूरी होने के बाद दोनों ने न्यायालय को सूचित किया कि पति-पत्नी के रूप में साथ रहना संभव नहीं है और वे अपनी इच्छा से विवाह विच्छेद चाहते हैं। इसके बाद, अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत विवाह विच्छेद की डिक्री जारी कर दी। नरेंद्र सिंह मरावी ने बताया कि आपसी सहमति से यह निर्णय हुआ है, हालांकि उन्होंने अभी आदेश नहीं देखा है।

अधिवक्ता ने की आदेश की पुष्टि
नरेंद्र सिंह मरावी की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता विनोद सिंह बनाकर ने न्यायालय के आदेश की पुष्टि करते हुए बताया कि राजेंद्रग्राम न्यायालय ने पारस्परिक सहमति के आधार पर विवाह विच्छेद का आदेश जारी किया है। 
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