फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   IIT Indore teaching ancient Indian science in Sanskrit language

आईआईटी इंदौर संस्कृत में पढ़ा रहा गणित और विज्ञान के प्राचीन पाठ, दुनियाभर के 750 से ज्यादा छात्रों ने दिखाई रुचि

Sat, 29 Aug 2020 09:04 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: देव कश्यप Updated Sat, 29 Aug 2020 09:04 AM IST
विज्ञापन
IIT Indore teaching ancient Indian science in Sanskrit language
आईआईटी, इंदौर - फोटो : फाइल फोटो

देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में आमतौर पर गणित और विज्ञान की पढ़ाई अंग्रेजी में होती है लेकिन जरा उस कक्षा की कल्पना कीजिये जिसमें इन तकनीकी विषयों के प्राचीन पाठ संस्कृत में पढ़ाए जा रहे हों और शिक्षक से लेकर विद्यार्थी तक इसी भाषा में संवाद कर रहे हों। इंदौर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने इस कल्पना को साकार कर दिया है। 

विज्ञापन


आईआईटी इंदौर ने 15 दिनों का एक नया कोर्स शुरू किया है। 15 दिन के इस कोर्स में दुनियाभर के साढ़े सात सौ से ज्यादा लोग शामिल हो रहे हैं। आईआईटी इंदौर के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि 22 अगस्त से शुरू हुआ यह गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम (क्यूआईपी) अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) से प्रायोजित है। यह पाठ्यक्रम दो अक्टूबर तक चलेगा जिसमें कुल 62 घंटों की ऑनलाइन कक्षाएं होंगी।
विज्ञापन



हजारों वर्ष पुराने गणितज्ञ भास्कराचार्य के गणितीय ग्रंथ लीलावती सहित भारत के पुरातन वैज्ञानिक ग्रंथों को संस्कृत भाषा में पढ़ने और मूल रूप में समझने के लिए आईआईटी, इंदौर ने 15 दिन का एक विशेष ऑनलाइन कोर्स शुरू किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


गणितीय ग्रंथ लीलावती की रचना महान गणितज्ञ भास्कराचार्य ने अपनी बेटी के नाम पर की थी। संस्कृत भारती, मध्य क्षेत्रम सहित आईआईटी बॉम्बे और आईआईटी इंदौर के विषय विशेषज्ञ इस कोर्स के तहत लोगों को भारत के पुरातन साहित्य का ज्ञान संस्कृत में दे रहे हैं। संस्थान ने संस्कृत में धातु विज्ञान, खगोल विज्ञान, दवाओं और पौधों के विज्ञान को पढ़ाने के लिए 15 दिनों का कार्यक्रम तैयार किया है। इस पाठ्यक्रम के तहत छात्र अपने मूल रूपों में शास्त्रीय भारतीय वैज्ञानिक ग्रंथों का अध्ययन कर सकते हैं और प्राचीन भाषा में उनके बारे में समझ सकते हैं।

आईआईटी, इंदौर के कार्यवाहक निदेशक, प्रोफेसर नीलेश कुमार जैन ने शुक्रवार को पाठ्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि 'संस्कृत, एक प्राचीन भाषा है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अपना स्थान खोज रहा है और बाद में यह भविष्य की भाषा बन जाएगा। मुझे बहुत खुशी है कि हमने इस भाषा के साथ लोगों को फिर से जोड़ने के लिए यह पहल की है, न केवल एक शौक के रूप में, बल्कि एक आवश्यकता के रूप में, क्योंकि यह प्रौद्योगिकी के मिश्रण के साथ आता है।'

संस्थान में बायोसाइंसेज और बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर और इस पाठ्यक्रम के को-ऑर्डिनेटर प्रोफेसर गंती एस मूर्ति ने बताया कि 'प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक ग्रंथों पर चर्चा के लिए हमेशा एक अनुवादक की आवश्यकता होती है और अनुवाद में बहुत बार महत्वपूर्ण पहलुओं या बारीकियों को खो दिया जाता है। आईआईटी, इंदौर का यह कार्यक्रम सबसे पहले छात्रों को भाषा में समझाने के लिए पर्याप्त संस्कृत समझने में मदद करेगा, जिसके बाद वे दूसरे चरण में जाएंगे जहां वे संस्कृत में तकनीकी विषयों पर चर्चा कर सकते हैं, उसी भाषा में विशेषज्ञों द्वारा सुविधा प्रदान की जाएगी।

मूर्ति ने बताया कि स्तर दो के लिए प्रतिभागियों की तैयारियों का मूल्यांकन करने के लिए एक योग्यता परीक्षा आयोजित की जाएगी। जो पहले से ही संस्कृत से अच्छी तरह  वाकिफ हैं वे तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ सीधे दूसरे चरण में जा सकते हैं। संस्कृत में विचार-विमर्श में भाग लेना सभी छात्रों के लिए अनिवार्य है, और जो लोग इसमें फेल होंगे उन्हें पाठ्यक्रम पूरा करने का प्रमाणपत्र नहीं मिलेगा।

उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने दाखिला लिया है, उनमें से 30 फीसदी प्रभावशाली पेशेवर हैं। संस्थान के अधिकारियों का कहना है कि लगभग 50 फीसदी स्नातक और परास्नातक के छात्र हैं, जिनमें पीएचडी स्कॉलर और बाकी लोग हैं।

उन्होंने कहा कि 'पारंपरिक इंडिक वैज्ञानिक ग्रंथों में से अधिकांश जल संसाधनों का स्थाई प्रबंधन, कृषि, गणित, धातु, खगोल, चिकित्सा और पादप विज्ञान सहित अर्थशास्त्र जैसे भारत के अधिकांश पुरातन ग्रंथ संस्कृत में लिखे गए हैं। डॉ. मूर्ति ने कहा कि इन ग्रंथों के अध्ययन के लिए संस्कृत को समझना भारत की वैज्ञानिक विरासत को संरक्षित करने और आगे बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है।'


आईआईटी-इंदौर ने इस पाठ्यक्रम के लिए विशेषज्ञों का एक पैनल बनाया है, जिसमें संस्कार भारती के प्रमोद पंडित, मयूरी फड़के और प्रवीण वैष्णव पहले भाग के इंस्ट्रक्टर हैं। दूसरे भाग में टीम के तकनीकी विशेषज्ञ आईआईटी-बॉम्बे के प्रोफेसर के रामसुब्रमण्यम और डॉ. के महेश हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed