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Covid -19 vaccine : कोवैक्सीन के ट्रायल डोज से वॉलंटियर की मौत, परिजनों ने वैक्सीन पर उठाए सवाल

Sat, 09 Jan 2021 10:12 AM IST
दीप्ति मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: दीप्ति मिश्रा Updated Sat, 09 Jan 2021 10:12 AM IST
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Covid-19 vaccine : Volunteer die after nine day to take covaxin dose bhopal MP
कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : पिक्साबे

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भारत बायोटेक की कोविड वैक्सीन कोवैक्सीन का ट्रायल 7 जनवरी को पूरा हो गया। वहीं भोपाल के पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में 12 दिसंबर को कोवैक्सीन का ट्रायल टीका लगवाने वाले 47 वर्षीय वाॅलंटियर दीपक मरावी की 21 दिसंबर को मौत हो गई है। दीपक के परिवार ने कोविड वैक्सीन को लेकर सवाल उठाए हैं।

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45 साल के दीपक मरावी मजदूरी करते थे और टीला जमालपुरा की सूबेदार कॉलोनी में किराये के इसी एक कमरे में तीन बच्चों के साथ रहते थे। दीपक ने कोरोना वैक्सीन ट्रायल में हिस्सा लिया था। पहले डोज के बाद ही तबीयत खराब हो गई और अस्पताल पहुंचने से पहले दीपक की मौत हो गई। दीपक अपने घर में मृत मिले थे। 22 दिसंबर को उनके शव का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट में शव में जहर मिलने की पुष्टि हुई है।
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दीपक के 18 वर्षीय बेटे आकाश मरावी ने शुक्रवार को पिता की मौत की जानकारी दी। हालांकि, मौत कोवैक्सीन का टीका लगवाने से हुई या किसी अन्य कारण से इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद होगी। दीपक के शव का विसरा पुलिस को सौंप दिया गया है। पुलिस विसरे का कैमिकल एनालिसिस कराएगी। फिलहाल, पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
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आकाश ने बताया कि पिताजी दीपक मरावी को 19 दिसंबर को अचानक घबराहट, बैचेनी, जी मिचलाने के साथ उल्टियां होने लगी। लेकिन उन्होंने इसे सामान्य बीमारी समझकर उसका कहीं इलाज नहीं कराया।

आकाश के मुताबिक, डोज लगवाने के बाद से पिता ने मजदूरी पर जाना बंद कर दिया था। पापा कोरोना प्रोटोकॉल का पालन कर रहे थे। पिताजी की सेहत 19 दिसंबर को बिगड़ी थी। अस्पताल चलने को कहा था, लेकिन वे नहीं माने। 21 दिसंबर को जब उनका निधन हुआ, तब वे घर में अकेले थे। मां काम से बाहर गई थी और छोटा भाई बाहर खेल रहा था। हमने मौत की सूचना उसी दिन पीपुल्स कॉलेज को भेज दी थी। अगले दिन सुभाष नगर विश्राम घाट पर अंतिम संस्कार कर दिया था।

आकाश ने बताया कि डोज लगवाने के बाद सेहत का हाल जानने अस्पताल से फोन आते रहे। 21 दिसंबर को पिताजी के निधन की जानकारी लेने पीपुल्स प्रबंधन से तीन बार फोन आए। लेकिन संस्थान से कोई भी मिलने नहीं आया। पिताजी भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ित भी थे।

दूसरी डोज के लिए आया फोन
पीपुल्स मेडिकल कॉलेज की थर्ड फेज क्लीनिकल ट्रायल टीम ने शुक्रवार दोपहर को दीपक के मोबाइल फोन पर वैक्सीन के दूसरे डोज के लिए फोन किया। यह कॉल आकाश ने रिसीव किया। उन्होंने टीम को पिता के निधन की फिर से सूचना दी। इसके बाद एग्जीक्यूटिव ने कॉल डिसकनेक्ट कर दिया।

वालंटियर की मौत का हमारी वैक्सीन से संबंध नहीं : भारत बायोटेक
कोरोना वैक्सीन निर्माता भारत बायोटेक ने शनिवार को कहा कि भोपाल में एक वैक्सीन वालंटियर की मौत का उनके चिकित्सकीय परीक्षण से कोई संबंध नहीं है। हैदराबाद स्थित कंपनी ने कहा, भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज की तरफ से जारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का संभावित कारण हृदयाघात बताया गया है।

भोपाल पुलिस से मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हृदयाघात के लिए संदिग्ध तौर पर जहर देने का परिणाम माना गया है और इसे लेकर मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस जांच कर रही है।


वालंटियर के कोवाक्सिन वैक्सीन के तीसरे चरण के चिकित्सकीय परीक्षण की डोज लेने के सवाल पर कंपनी ने कहा कि वह इसकी पुष्टि नहीं कर सकती।

कंपनी ने कहा, हम इस बात की पुष्टि नहीं कर सकते कि वालंटियर ने अध्ययन के दौरान वैक्सीन की डोज ली थी या प्लेसबो की, क्योंकि यह परीक्षण पूरी तरह गोपनीय होता है।

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