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भोपाल में ई-कचरा बना जहरीला खतरा: एनजीटी ने मांगी जांच रिपोर्ट, खुले में जलाए जा रहे मोबाइल-कंप्यूटर से सीसा

Mon, 31 Aug 2026 06:25 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Mon, 31 Aug 2026 06:25 PM IST
सार

भोपाल में ई-कचरे के अवैज्ञानिक निस्तारण और खुले में जलाने के आरोपों पर एनजीटी सख्त हुआ है। अधिकरण ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर असर की जांच के लिए समिति गठित कर चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी।

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E-waste poses a toxic threat in Bhopal: NGT seeks investigation report, lead from mobile phones and computers
एनजीटी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भोपाल में बढ़ते ई-कचरे के निस्तारण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। शहर में मोबाइल, कंप्यूटर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कचरे को कथित तौर पर खुले में जलाने और अनधिकृत इकाइयों में असुरक्षित तरीके से तोड़ने-प्रसंस्करण करने के आरोपों की अब जांच होगी। अधिकरण ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित असर की तथ्यात्मक जांच के लिए समिति गठित कर चार सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। मामले की सुनवाई सोमवार को न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ के समक्ष हुई। नितिन सक्सेना की ओर से दायर आवेदन में भोपाल में ई-कचरे के कथित अनुचित निस्तारण, प्रसंस्करण और खुले में जलाने से जुड़े गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।
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वैज्ञानिक निस्तारण कम, अनधिकृत प्रसंस्करण पर सवाल
अधिकरण के सामने रखी गई सामग्री में दावा किया गया है कि भोपाल में पैदा होने वाले ई-कचरे के सीमित हिस्से का ही वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण हो रहा है। बाकी कचरे के अनधिकृत कबाड़ इकाइयों के जरिए असुरक्षित तरीके से प्रसंस्करण किए जाने का आरोप है। पुराने मोबाइल, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और उनके पुर्जों को तोड़ने या जलाने की प्रक्रिया अगर खुले में होती है तो इससे पर्यावरण में जहरीले तत्व पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
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खुले में जलाया ई-कचरा तो हवा से पानी-मिट्टी तक खतरा
एनजीटी के आदेश में दर्ज आरोपों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को खुले में जलाने या नष्ट करने से सीसा, पारा, कैडमियम और क्रोमियम जैसी भारी धातुएं निकल सकती हैं। इनके कारण हवा, पानी और मिट्टी के प्रदूषित होने की आशंका है। इसका असर मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।
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एमपी में ई-कचरे का आंकड़ा 10 गुना बढ़ने का दावा
आवेदन में मध्य प्रदेश में ई-कचरे की मात्रा तेजी से बढ़ने का भी उल्लेख किया गया है। इसमें दावा किया गया है कि राज्य में हर साल करीब 5 हजार मीट्रिक टन ई-कचरा निकल रहा है, जबकि 2019 में यह मात्रा करीब 500 मीट्रिक टन बताई गई थी।भोपाल के साथ इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे बड़े शहरों में भी ई-कचरे के बढ़ते उत्पादन का मुद्दा उठाया गया है।


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अब कई विभागों की जवाबदेही तय
एनजीटी ने मामले में भोपाल कलेक्टर, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव, नगर निगम आयुक्त, पर्यावरण विभाग, विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग और स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिवों को पक्षकार बनाया है। सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर ई-फाइलिंग के माध्यम से जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। पर्यावरण से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक जांच में शामिल मामले की वास्तविक स्थिति पता लगाने के लिए गठित समिति में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग, विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति को ई-कचरे के निस्तारण, प्रसंस्करण, खुले में जलाने और उससे पर्यावरण व जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव समेत आवेदन में उठाए गए सभी मुद्दों की जांच करनी होगी। साथ ही अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी भी देनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी।


 
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