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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Son reunited with his family after 10 years through Instagram; spent his life washing utensils in Bengaluru

MP News: इंस्टाग्राम से 10 साल बाद अपनों से मिला बेटा; गलत ट्रेन में चढ़ा,बेंगलुरु में बर्तन धोकर बिताई जिंदगी

Thu, 10 Apr 2025 07:54 PM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पांढुर्णा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पांढुर्णा Published by: छिंदवाड़ा ब्यूरो Updated Thu, 10 Apr 2025 07:54 PM IST
सार

लवाना गांव का लक्ष्मण पंद्रे 2015 में गलती से बेंगलुरु पहुंच गया और दस साल तक लापता रहा। हाल ही में इंस्टाग्राम के जरिए वह परिवार से जुड़ा। पुलिस की मदद से उसे वापस लाया गया। घर लौटते ही भावुक माहौल बना और गांव में इस मिलन की चर्चा है। 

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Son reunited with his family after 10 years through Instagram; spent his life washing utensils in Bengaluru
घर लौटा युवक

विस्तार

पांढुर्णा तहसील के लवाना गांव का रहने वाला लक्ष्मण पंद्रे दस साल पहले रोजगार की तलाश में घर से निकला था। 9 जून 2015 को वह अपने दोस्तों के साथ हैदराबाद जाने के लिए निकला था, लेकिन पांढुर्णा रेलवे स्टेशन पर गलती से एक दूसरी ट्रेन में चढ़ गया। यह ट्रेन उसे सीधा बेंगलुरु ले गई। न भाषा आती थी, न कोई जान-पहचान। बेंगलुरु जैसे बड़े शहर में अकेले पहुंचकर लक्ष्मण पूरी तरह से असहाय था, लेकिन उसने हार नहीं मानी।

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काफी मशक्कत के बाद उसे एक होटल में बर्तन धोने का काम मिल गया। यहीं से उसकी जिंदगी की एक नई लड़ाई शुरू हुई। समय के साथ उसने कन्नड़ भाषा सीखी, अपना आधार कार्ड बनवाया और धीरे-धीरे बेंगलुरु को ही अपना घर बना लिया। उधर, लवाना गांव में परिवार वालों ने उसकी तलाश बंद कर दी थी। उन्हें यही विश्वास हो गया था कि लक्ष्मण अब कभी नहीं लौटेगा।
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लेकिन किस्मत ने एक नई कहानी लिखी। हाल ही में लक्ष्मण ने एक नया मोबाइल खरीदा और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करना शुरू किया। एक दिन उसे अपनी भतीजी वैशाली का नाम याद आया। उसने इंस्टाग्राम पर वैशाली को सर्च किया और उसकी प्रोफाइल भी मिल गई। फिर उसने मैसेज कर संपर्क साधा। पहले तो परिवार को यकीन नहीं हुआ, लेकिन जैसे-जैसे बात हुई, सब साफ हो गया कि यह वही लक्ष्मण है।

परिवार ने तुरंत पुलिस को इसकी जानकारी दी। पांढुर्णा थाना प्रभारी अजय मरकाम और एएसआई देवेंद्र कुमरे ने बेंगलुरु जाकर लक्ष्मण को ढूंढ निकाला और सकुशल गांव लाकर उसके परिजनों को सौंपा। जैसे ही लक्ष्मण घर पहुंचा, मां ने उसे गले से लगा लिया। पूरा परिवार भावुक हो उठा। गांव में इस पुनर्मिलन की कहानी हर जुबां पर है और लोग इसे एक चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं।

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