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Navratri 2023: सपने में आई थी बिरसिंहपुर की मां बिरासनी, पूरी होती हैं मनोकामनाएं

Wed, 29 Mar 2023 10:30 PM IST
रवींद्र भजनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया Published by: रवींद्र भजनी Updated Wed, 29 Mar 2023 10:30 PM IST
सार

उमरिया जिले के बिरसिंहपुर में विराजित बिरासनी को मनोकामना पूरी करने वाली देवी माना जाता है। बताया जाता है कि धौकल नामक व्यक्ति को सपने में देवी ने दर्शन देकर खेत में मूर्ति होने की बात बताई थी। 
 

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Birsinghpur's mother Birasani came in dreams, wishes come true
बिरासिनी देवी पाली - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उमरिया जिले के पाली नगर में विराजित मां बिरासनी अपने अलौकिक स्वरूप और तेज के लिए जानी जाती हैं। उनके दरबार मे मन शांति और विश्वास से भर उठता है। कहा जाता है कि सैकड़ों वर्ष पूर्व बिरासिनी माता ने नगर के धौकल नामक व्यक्ति को सपने में दर्शन दिए थे। उससे कहा था कि मूर्ति एक खेत में है, जिसे लाकर स्थापित करना है। धौकल ने प्रतिमा को निकाला और छोटी-सी मढ़िया में स्थापित किया था। बाद में राजा बीरसिंह ने मंदिर बनवाया। 30 मार्च को जुआरा कलश यात्रा निकाली जाएगी। 

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बिरासिनी मंदिर की प्रतिमा कल्चुरी कालीन बताई जाती है। इसका निर्माण 10वीं सदी में कराए जाने की बात कही जाती है। काले पत्थर से निर्मित यह भव्य मूर्ति देशभर में महाकाली की गिनी-चुनी प्रतिमाओं में है, जिसमें माता की जिव्हा बाहर नहीं है। मंदिर के गर्भगृह में माता के पास ही भगवान हरिहर विराजमान हैं, जो आधे भगवान शिव और आधे भगवान विष्णु का स्वरूप हैं। मंदिर के गर्भगृह के चारों तरफ अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर परिसर में राधा-कृष्ण, मरही माता, भगवान जगन्नाथ और शनिदेव के छोटे-छोटे मंदिर हैं। 
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1989 में हुआ था मंदिर का जीर्णोद्धार
23 नवंबर 1989 को जगद्गुरु शंकराचार्य शारदा पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती की मौजूदगी में बिरासनी मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ था। उस समय स्थानीय लोगों की आर्थिक मदद से यह तैयार हुआ था। मंदिर का वास्तु विनायक हरिदास एनबीसीसी नई दिल्ली ने बनाया था। बिरासनी मंदिर का लोकार्पण 22 अप्रैल 1999 को जगद्गुरु शंकराचार्य पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के शुभाशीष से संपन्न हुआ था।
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स्वर्ण आभूषणों से होता है मां का भव्य श्रृंगार
चैत्र नवरात्र पर्व की अष्टमी तिथि पर बिरासिनी के दरबार में अठमाईन चढ़ाकर माता की पूजा-अर्चना की गई। मान्यता है कि अष्टमी तिथि को अठमाईन चढ़ाने से माता विशेष भोग के रूप में इसे ग्रहण करतीं है। मनोवांछित फल की प्राप्ति कराती है। अष्टमी पर ही मां का विशेष शृंगार भी होता है। माता बिरासनी के दरबार में विशेष आरती का आयोजन किया गया। 


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