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त्विषा शर्मा डेथ केस: समर्थ सिंह को नहीं मिली डिफॉल्ट बेल, कोर्ट ने कहा- 90 दिन में सीबीआई ने दाखिल किया चालान
Tue, 06 Oct 2026 08:30 AM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Tue, 06 Oct 2026 08:30 AM IST
सार
त्विषा शर्मा डेथ केस में आरोपी समर्थ सिंह को भोपाल कोर्ट से डिफॉल्ट बेल नहीं मिली। कोर्ट ने माना कि CBI ने गिरफ्तारी के 90 दिन के भीतर चालान दाखिल कर दिया था और उस पर संज्ञान भी लिया जा चुका है।
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त्विषा के पति समर्थ सिंह को अब सीबीआई रिमांड पर सौंपा गया है।
- फोटो : PTI
विस्तार
त्विषा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी समर्थ सिंह को भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय से डिफॉल्ट बेल नहीं मिली। सोमवार को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शोभना भलावे ने समर्थ सिंह की डिफॉल्ट जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सीबीआई ने तय 90 दिन की अवधि के भीतर चालान पेश कर दिया था। सीबीआई ने 17 अगस्त को चालान दाखिल किया था औरएडीजे कोर्ट इस पर संज्ञान भी ले चुकी है। समर्थ सिंह को 23 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इस तरह गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे होने से पहले ही चालान पेश कर दिया गया।
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माता-पिता की ओर से जमानत का विरोध
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जांच एजेंसी द्वारा चालान पेश करने और कोर्ट द्वारा उस पर संज्ञान लेने के बाद केवल कुछ दस्तावेज दाखिल नहीं होने या किसी सह-आरोपी के खिलाफ जांच जारी रहने के आधार पर चालान को अधूरा नहीं कहा जा सकता। सीबीआई की दलील थी कि अगर चालान के साथ कुछ दस्तावेज रिकॉर्ड पर नहीं हैं, तो इससे चालान अमान्य नहीं हो जाता। कोर्ट द्वारा चालान पर संज्ञान लिए जाने के बाद आरोपी को डिफॉल्ट बेल का अधिकार नहीं रहता। त्विषा शर्मा के माता-पिता की ओर से पेश अधिवक्ता अंकुर पांडे ने डिफॉल्ट बेल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने निर्धारित 90 दिन के भीतर ही चालान पेश कर दिया है और कोर्ट उस पर संज्ञान भी ले चुकी है।
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समर्थ सिंह की ओर से क्या दलील दी गई?
समर्थ सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने कहा कि सीबीआई ने चालान तो पेश किया है, लेकिन जांच को जानबूझकर अधूरा रखा गया है, ताकि आरोपी को जमानत का लाभ न मिल सके। इसलिए समर्थ सिंह को डिफॉल्ट बेल का लाभ मिलना चाहिए। बचाव पक्ष की ओर से यह भी दलील दी गई कि 17 अगस्त को सीबीआई ने जो रिपोर्ट दाखिल की, वह अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं थी। जांच अभी भी जारी है। इसी आधार पर 90 दिन में जांच पूरी नहीं होने का हवाला देते हुए डिफॉल्ट बेल की मांग की गई थी।
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माता-पिता की ओर से जमानत का विरोध
सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जांच एजेंसी द्वारा चालान पेश करने और कोर्ट द्वारा उस पर संज्ञान लेने के बाद केवल कुछ दस्तावेज दाखिल नहीं होने या किसी सह-आरोपी के खिलाफ जांच जारी रहने के आधार पर चालान को अधूरा नहीं कहा जा सकता। सीबीआई की दलील थी कि अगर चालान के साथ कुछ दस्तावेज रिकॉर्ड पर नहीं हैं, तो इससे चालान अमान्य नहीं हो जाता। कोर्ट द्वारा चालान पर संज्ञान लिए जाने के बाद आरोपी को डिफॉल्ट बेल का अधिकार नहीं रहता। त्विषा शर्मा के माता-पिता की ओर से पेश अधिवक्ता अंकुर पांडे ने डिफॉल्ट बेल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने निर्धारित 90 दिन के भीतर ही चालान पेश कर दिया है और कोर्ट उस पर संज्ञान भी ले चुकी है।
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समर्थ सिंह की ओर से क्या दलील दी गई?
समर्थ सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने कहा कि सीबीआई ने चालान तो पेश किया है, लेकिन जांच को जानबूझकर अधूरा रखा गया है, ताकि आरोपी को जमानत का लाभ न मिल सके। इसलिए समर्थ सिंह को डिफॉल्ट बेल का लाभ मिलना चाहिए। बचाव पक्ष की ओर से यह भी दलील दी गई कि 17 अगस्त को सीबीआई ने जो रिपोर्ट दाखिल की, वह अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं थी। जांच अभी भी जारी है। इसी आधार पर 90 दिन में जांच पूरी नहीं होने का हवाला देते हुए डिफॉल्ट बेल की मांग की गई थी।
