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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal News ›   Tiger Migrated From Panna Tiger Reserve : More than thirty tigers left their homes, experts told Recent hunting is also the reason

पन्ना टाइगर रिजर्व से पलायन : तीस से ज्यादा बाघों ने छोड़ा अपना आशियाना, विशेषज्ञों ने बताई यह वजह

Wed, 03 Nov 2021 06:10 AM IST
योगेश साहू एजेंसी, भोपाल।
एजेंसी, भोपाल। Published by: योगेश साहू Updated Wed, 03 Nov 2021 06:10 AM IST
सार

वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसायटी ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते चार वर्षों में देश में 200 से अधिक बाघों की मौत हुई है। इनमें से 63 से ज्यादा बाघों का शिकार किया गया। 

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Tiger Migrated From Panna Tiger Reserve : More than thirty tigers left their homes, experts told Recent hunting is also the reason
बाघ - फोटो : amar ujala

विस्तार

नए क्षेत्रों की तलाश में 30 से ज्यादा बाघों ने पन्ना बाघ अभयारण्य को छोड़ा है। एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने कहा कि यह प्राकृतिक एवं स्वाभाविक प्रक्रिया है। 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या सबसे अधिक है। यहां कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुर और पन्ना टाइगर रिजर्व हैं। पन्ना टाइगर रिजर्व राजधानी भोपाल से करीब 330 किमी दूर स्थित है। 

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लगभग एक दशक पहले यहां एक भी बाघ नहीं बचा था जिसकी वजह से बाघ पुनरुत्पादन योजना शुरू की गई थी। बीते रविवार को पन्ना बाघ अभयारण्य से बाहर आए बाघ का कंकाल सतना जिले से बरामद किया गया। अभयारण्य के क्षेत्रीय निदेशक उत्तम कुमार शर्मा के मुताबिक प्रारंभिक जांच में पाया गया कि शिकारियों ने बाघ की हत्या की।
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यहां करीब 45 से 50 बाघ हैं और वहीं 20-25 एक वर्ष से कम आयु के शावक हैं। कुल मिलाकर पन्ना बाघ अभयारण्य में फिलहाल 70 बाघ हैं। जैसे-जैसे बाघों की संख्या बढ़ती है, वे नए क्षेत्रों की तलाश में बाहर निकलते हैं। पन्ना बाघ अभयारण्य से निकलने वाले बाघ चित्रकूट, बांधवगढ़ की ओर जाते हैं। सतना और नौरादेही अभयारण्य में पन्ना के ही बाघ हैं।
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बाघ हीरा की हत्या में तीन शिकारी गिरफ्तार
उत्तम कुमार शर्मा ने कहा कि रेडियो कॉलर लगे बाघ की मौत सतना में हुई है और उसकी पहचान संख्या पी234-31 है। उसे हीरा के नाम से जाना जाता था। उसका जन्म दो साल पहले हुआ था। वन विभाग के बयान के मुताबिक फिलहाल हीरा की मौत के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। शिकारियों की पहचान रामप्रकाश बागड़ी, कृष्ण कोल और मुन्ना के रूप में हुई है।

4 वर्षों में 200 से अधिक बाघों की मौत
वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसायटी ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते चार वर्षों में देश में 200 से अधिक बाघों की मौत हुई है। इनमें से 63 से ज्यादा बाघों का शिकार किया गया। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2017 में 116 और 2018 में 85 बाघों की मौत हुई है। साल 2016 में 120 बाघों की मौतें हुईं थीं, जो साल 2006 के बाद सबसे अधिक थी।


बाघों की मौत के मामले
इस साल अब तक मध्य प्रदेश में 31 बाघ, महाराष्ट्र में 21, कर्नाटक 13, यूपी 7, केरल 5, असम 5, छत्तीसगढ़ 3, बिहार 2 बाघों की मौत हुईं है। मध्य प्रदेश में बीते 6 सालों में 170 बाघों की जान जा चुकी है साल 2018 में जून में मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व से ओडिशा के सतकोसिया टाइगर रिजर्व भेजे गए बाघ महावीर का शव जंगल में पड़ा मिला था।

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