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जहरीली शराब कांड: सात साल में 60 से ज्यादा मौतों के बाद भी नहीं टूटा अवैध कारोबार का नेटवर्क

Sun, 06 Sep 2026 08:35 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Sun, 06 Sep 2026 08:35 PM IST
सार

उज्जैन, मुरैना, मंदसौर और भिंड में जहरीली शराब से हुई मौतों के बावजूद प्रदेश में अवैध शराब का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो सका है। हर घटना के बाद कार्रवाई और अभियान चलाए गए, लेकिन बार-बार सामने आ रहे मामलों ने शराब की सप्लाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Spurious liquor tragedy: Network of illicit trade remains unbroken despite over 60 deaths in seven years.
फाइल फोटो - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

प्रदेश में जहरीली और अवैध शराब का कारोबार कोई नई समस्या नहीं है। पिछले करीब सात वर्षों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें 60 से ज्यादा लोगों की जान चली गई। हर बड़ी घटना के बाद पुलिस और आबकारी विभाग ने कार्रवाई की, अधिकारियों पर भी गाज गिरी और सरकार ने कानून को सख्त किया। इसके बावजूद अवैध शराब बनाने और बेचने का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो सका। सरकार ने जहरीली शराब के खिलाफ कानून को और कठोर करते हुए मौत होने के मामलों में दोषी के लिए आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक के प्रावधान किए हैं। इसके बावजूद जमीन पर चुनौती बनी हुई है।
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उज्जैन से शुरू हुआ था सिलसिला
अक्तूबर 2020 में उज्जैन में जहरीली शराब से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। इस घटना में 16 लोगों की मौत हुई थी। विसरा जांच में कुछ मृतकों के शरीर में एथिल और मिथाइल अल्कोहल मिलने की बात सामने आई थी। घटना के बाद अवैध शराब के निर्माण और बिक्री के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई, लेकिन कुछ ही महीनों बाद प्रदेश को इससे भी बड़े शराब कांड का सामना करना पड़ा। 
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मुरैना में 24 मौतों से मचा हड़कंप
जनवरी 2021 में मुरैना के छैरा और मानपुर गांवों में जहरीली शराब पीने से 24 लोगों की मौत हुई थी। कई लोगों की तबीयत बिगड़ी और कुछ पीड़ितों की आंखों की रोशनी तक प्रभावित हुई। इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद नवंबर 2025 में 14 आरोपियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।

मंदसौर में भी गईं जानें
जुलाई 2021 में मंदसौर और आसपास के इलाकों में भी जहरीली शराब का मामला सामने आया। एसआईटी ने जांच के बाद इसे स्प्यूरियस लिकर से जुड़ी घटना माना था। उस समय करीब 11 मौतों की बात सामने आई थी। पुलिस ने दावा किया था कि शराब दूसरे राज्य से लाई गई थी। इससे अवैध शराब की सप्लाई और दूसरे राज्यों से होने वाली तस्करी रोकने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए। 

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2022 में भिंड में सामने आया मामला
जनवरी 2022 में भिंड के इंदुरखी गांव में कथित अवैध शराब पीने से चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि छह लोग बीमार हुए थे। पुलिस ने अवैध शराब बनाने के एक ठिकाने का पता लगाने का दावा किया। घटना के बाद सात पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और जांच के लिए एसआईटी बनाई गई।

केवल कार्रवाई से नहीं रुकेगा कारोबार
इन घटनाओं को देखें तो हर बार एक जैसा पैटर्न सामने आता है। घटना के बाद पुलिस और आबकारी विभाग सक्रिय होते हैं, शराब जब्त होती है, आरोपियों की गिरफ्तारी होती है और कई बार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होती है। लेकिन कुछ समय बाद किसी दूसरे जिले से फिर ऐसा मामला सामने आ जाता है। इससे सवाल उठता है कि कार्रवाई के बावजूद अवैध शराब की सप्लाई पर स्थायी रोक क्यों नहीं लग पा रही है।

अब फिर शुरू होगा अभियान : सक्सेना
प्रदेश के आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने कहा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोग लाइसेंसी दुकानदारों के बजाय गांवों में अनधिकृत लोगों से शराब क्यों खरीद रहे हैं और ये लोग शराब कैसे बेच रहे हैं, इसे लेकर निचले अमले को निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं तो कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ियां हैं। उन्हें दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। यदि पॉलिसी में कोई खामी होगी तो उसको भी ठीक करेंगे।
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