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भोपाल में जुटे सफाईकर्मी: सरकार को आखिरी चेतावनी, नियमितीकरण करो, वरना कल से प्रदेशभर में काम बंद
Tue, 03 Nov 2026 02:55 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
Published by: Sandeep Kumar Tiwari
Updated Tue, 03 Nov 2026 02:55 PM IST
सार
सफाईकर्मी 25 हजार रुपये वेतन, नियमितीकरण और ठेका प्रथा खत्म करने की मांग पर अड़े हैं। भोपाल के शाहजाहानी पार्क में हुए प्रदेशव्यापी प्रदर्शन में सरकार को अंतिम ज्ञापन दिया गया। मांगें पूरी नहीं होने पर 4 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।
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सफाई कर्मचारियों का विरोध प्रदर्श
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल के शाहजाहानी पार्क में मंगलवार को प्रदेशभर के सफाईकर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर शक्ति प्रदर्शन किया। अखिल भारत सफाई मजदूर कांग्रेस ट्रेड यूनियन (7262) के बैनर तले हुए इस धरने में प्रदेश के 57 जिलों से कर्मचारी, महिला सफाईकर्मी और संगठन के पदाधिकारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि अब आश्वासन से काम नहीं चलेगा। सरकार ने मांगों पर निर्णय नहीं लिया तो 4 नवंबर से प्रदेश के नगरीय निकायों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मगन झांझोट ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए इसे सरकार को दिया गया अंतिम ज्ञापन बताया। उन्होंने कहा कि संगठन पिछले 20 से 25 साल से सफाईकर्मियों के हक और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है। इस दौरान प्रदेश में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की सरकारें आईं और गईं। संगठन ने मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को कई बार ज्ञापन दिए, मंचों पर उनका स्वागत और सम्मान भी किया, लेकिन कर्मचारियों की मूल समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
25 हजार वेतन और नियमितीकरण की प्रमुख मांग
सफाईकर्मियों की प्रमुख मांग है कि उनका मासिक वेतन बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया जाए और वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित किया जाए। इसके अलावा ठेका प्रथा बंद करने और कर्मचारी की मृत्यु होने पर पति या पत्नी में से एक को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग भी उठाई गई। मगन झांझोट ने कहा कि कर्मचारियों को मिलने वाली मौजूदा आर्थिक सहायता से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है। दीपावली पर बच्चों के कपड़े, मिठाई, घर की रंगाई-पुताई, किराना और दूध जैसी जरूरतों के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं होता। ऐसे में 25 हजार रुपये वेतन की मांग केवल बढ़ोतरी नहीं, बल्कि परिवारों की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी है।
अब संगठन नहीं, कर्मचारी खुद लेंगे आंदोलन का फैसला
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अब तक संगठन कर्मचारियों की ओर से आंदोलन की रणनीति तय करता रहा है, लेकिन इस बार फैसला प्रदेशभर से आए सफाईकर्मी खुद करेंगे। सरकार मांगें मानती है तो संगठन स्वागत, वंदन और अभिनंदन करेगा। यदि सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो कर्मचारी अपने स्तर पर आंदोलन की अगली रणनीति तय करेंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि दीपावली सरकार मनाएगी और सफाईकर्मी सड़कों पर रहकर अपनी मांगों के लिए संघर्ष करेंगे। संगठन का कहना है कि प्रदेश के 10 संभागों, 16 नगर निगमों और 374 नगरपालिकाओं के कर्मचारी इस आंदोलन से जुड़े हैं।
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यह भी पढ़ें-एमपी में तूफान मुरासु का असर: कहीं आंधी तो कहीं धूप, धनतेरस की खरीदारी पर बारिश का साया या मिलेगी राहत?
कचरा गाड़ियों से प्रचार पर भी उठा था सवाल
धरने से पहले सोमवार को नगर निगम की कचरा गाड़ियों में लगे लाउडस्पीकर से प्रदर्शन के प्रचार का मामला भी सामने आया था। इस पर निगम अधिकारियों तक शिकायत पहुंची थी। आपत्ति जताई गई कि कर्मचारियों की यूनियन के आंदोलन का प्रचार सरकारी कचरा गाड़ियों के माध्यम से नहीं किया जाना चाहिए।
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25 हजार वेतन और नियमितीकरण की प्रमुख मांग
सफाईकर्मियों की प्रमुख मांग है कि उनका मासिक वेतन बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया जाए और वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित किया जाए। इसके अलावा ठेका प्रथा बंद करने और कर्मचारी की मृत्यु होने पर पति या पत्नी में से एक को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग भी उठाई गई। मगन झांझोट ने कहा कि कर्मचारियों को मिलने वाली मौजूदा आर्थिक सहायता से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है। दीपावली पर बच्चों के कपड़े, मिठाई, घर की रंगाई-पुताई, किराना और दूध जैसी जरूरतों के लिए भी पर्याप्त पैसा नहीं होता। ऐसे में 25 हजार रुपये वेतन की मांग केवल बढ़ोतरी नहीं, बल्कि परिवारों की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी है।
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अब संगठन नहीं, कर्मचारी खुद लेंगे आंदोलन का फैसला
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अब तक संगठन कर्मचारियों की ओर से आंदोलन की रणनीति तय करता रहा है, लेकिन इस बार फैसला प्रदेशभर से आए सफाईकर्मी खुद करेंगे। सरकार मांगें मानती है तो संगठन स्वागत, वंदन और अभिनंदन करेगा। यदि सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो कर्मचारी अपने स्तर पर आंदोलन की अगली रणनीति तय करेंगे। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि दीपावली सरकार मनाएगी और सफाईकर्मी सड़कों पर रहकर अपनी मांगों के लिए संघर्ष करेंगे। संगठन का कहना है कि प्रदेश के 10 संभागों, 16 नगर निगमों और 374 नगरपालिकाओं के कर्मचारी इस आंदोलन से जुड़े हैं।
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कचरा गाड़ियों से प्रचार पर भी उठा था सवाल
धरने से पहले सोमवार को नगर निगम की कचरा गाड़ियों में लगे लाउडस्पीकर से प्रदर्शन के प्रचार का मामला भी सामने आया था। इस पर निगम अधिकारियों तक शिकायत पहुंची थी। आपत्ति जताई गई कि कर्मचारियों की यूनियन के आंदोलन का प्रचार सरकारी कचरा गाड़ियों के माध्यम से नहीं किया जाना चाहिए।
