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RSS Statement: देश को अभी जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत नहीं, पहले अध्ययन करना होगा
Sat, 22 Oct 2022 08:00 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अरविंद कुमार
Updated Sat, 22 Oct 2022 08:00 PM IST
सार
देश में जनसंख्या वृद्धि को रोकने के लिए सख्त कानून बनाए जाने को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहमत नहीं है। संघ की सोच है कि ऐसी नीति बनानी होगी, जिससे हमें नुकसान न हो। ऐसे में पहले कई बातों को ध्यान में रखना होगा।
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'जनसंख्या नियंत्रण कानून की जरूरत नहीं'
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सरकार को सलाह दी है कि जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने से पहले कुछ मुद्दों पर विचार करना चाहिए। संघ के मध्य भारत प्रांत के संघ चालक अशोक पांडेय ने कहा, साल 2025 तक मध्यप्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में संघ की शाखाएं लगाने का काम शुरू हो जाएगा। इसको लेकर संघ ने योजना तैयार कर ली है। संघ स्वावलंबन और पर्यावरण पर भी काम करेगा। तीन साल के लिए 240 विस्तारक संघ अलग-अलग स्थानों पर भेजेगा।
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संघ की प्रयागराज में हुई बैठक की जानकारी देते हुए अशोक पांडे ने कहा, घुसपैठ, धर्मांतरण और रोहिंग्या मुसलमान के कारण देश में मुसलमानों की संख्या बढ़ रही है। इसलिए सरकार ऐसी जनसंख्या नीति बनाए, जो सभी धर्मों और समाज के सभी वर्गों पर समान रूप से लागू हो। इसको लेकर उन्होंने पिछले दशकों में तेजी से बढ़ी मुलसमानों की आबादी को लेकर आंकड़े भी पेश किए। मार्च में संघ की प्रतिनिधि सभा में इसको लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
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संघ के सौ साल पूरे होने पर सभी जगहों पर शताब्दी विस्तारक निकलेंगे। देश के प्रांतों के साथ मध्यप्रदेश में भी शताब्दी विस्तारक निकलेंगे। अभी मध्य भारत प्रांत में 102 शताब्दी विस्तारक निकले हैं, जिन्हें एक साल में 200 तक पहुंचाया जाएगा। उधर, देश भर में तीन हजार शताब्दी विस्तारक निकले हैं और एक हजार विस्तारक और भी निकलेंगे।
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उन्होंने कहा, संघ के मध्य भारत प्रांत में संघ रचना के 1 हजार 814 ग्रामीण मंडल हैं। एक साल में यहां 150 नए मंडलों में काम शुरू हुआ है। वर्तमान में संघ के 820 मंडलों में शाखा और 260 मंडलों में साप्ताहिक मिलन के कार्यक्रम हो रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में 760 बस्तियों में से 550 बस्तियों में शाखा के जरिये या साप्ताहिक मिलन के माध्यम से संघ की गतिविधियों का प्रचार प्रसार किया जा रहा है।
