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मध्यप्रदेश: राहुल गांधी क्यों जा रहे बालाघाट? जागला से एमपी की आदिवासी सियासत को कितना बड़ा संदेश
Thu, 01 Oct 2026 07:11 AM IST
Anand Pawar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Anand Pawar
Updated Thu, 01 Oct 2026 07:11 AM IST
सार
राहुल गांधी 1 अक्टूबर को बालाघाट के जागला गांव पहुंचकर आदिवासी बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों से मुलाकात करेंगे। 13 दिन में उनके दूसरे मध्यप्रदेश दौरे के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं और आदिवासी इलाकों के मुद्दे फिर चर्चा में हैं।
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राहुल गांधी
- फोटो : credit
विस्तार
मध्यप्रदेश में 2028 के विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हैं, लेकिन आदिवासी वोटों को लेकर सियासी सक्रियता अभी से दिखाई देने लगी है। इसी कड़ी में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 1 अक्टूबर को बालाघाट के बैहर-बिरसा क्षेत्र के जागला गांव पहुंचेंगे। यहां वह आदिवासी बच्चों की मौत से प्रभावित परिवारों से मुलाकात करेंगे। राहुल का यह दौरा 13 दिन के भीतर मध्यप्रदेश का दूसरा दौरा है। इससे पहले 19 सितंबर को वह इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल हुए थे। जागला में राहुल गांधी के पहुंचने का प्रस्तावित समय दोपहर करीब 2:15 बजे है। करीब 45 मिनट तक वह प्रभावित परिवारों से बातचीत करेंगे। इसके बाद उनके मीडिया से बातचीत कर गोंदिया एयरपोर्ट रवाना होने का कार्यक्रम बताया गया है।
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बच्चों की मौत से शुरू हुई सियासी लड़ाई
बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का मामला पिछले कुछ महीनों से लगातार चर्चा में है। यहां 30 से अधिक बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया, खसरा, कुपोषण, एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर जांच और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठे हैं। हालांकि सभी मौतों को किसी एक बीमारी या कारण से जोड़ना उचित नहीं है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ लगातार उठाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी प्रभावित क्षेत्र और परिवारों तक पहुंचे हैं। कांग्रेस की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं और बच्चों की मौत के आंकड़ों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दूसरी ओर, सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों, जांच, उपचार और निगरानी के जरिए स्थिति संभालने के कदम उठाए हैं।
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ये भी पढ़ें- मध्यप्रदेश: राहुल का 13 दिन में कल दूसरी बार एमपी दौरा, बालाघाट में मृत आदिवासी बच्चों के परिजनों से मिलेंगे
राहुल के दौरे में उठेंगे आदिवासी बेल्ट के सवाल
राहुल गांधी की जागला यात्रा का फोकस सिर्फ मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस इस दौरे के जरिए आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण, बीमारी की रोकथाम और दूरदराज के गांवों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच जैसे मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाना चाहती है। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मध्यप्रदेश की करीब 22 फीसदी आबादी आदिवासी समुदाय से जुड़ी है और विधानसभा की 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
ये भी पढ़ें- मध्यप्रदेश भाजपा: नई टीम का बूथ कनेक्ट, देब-रेखा ने कार्यकर्ताओं के घर पहुंचकर साधा संवाद, कल अहम बैठक
2018 से 2023 तक बदला आदिवासी सीटों का गणित
आदिवासी सीटों का चुनावी महत्व पिछले दो विधानसभा चुनावों के आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। 2018 में कांग्रेस ने 47 एसटी आरक्षित सीटों में से 30 पर जीत दर्ज की थी। 2023 में भाजपा ने इन सीटों में 24 पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को 22 सीटें मिलीं और भारत आदिवासी पार्टी ने एक सीट जीती। ऐसे में राहुल गांधी का बालाघाट दौरा कांग्रेस के लिए सिर्फ एक स्थानीय घटना पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि आदिवासी इलाकों से जुड़े मुद्दों को प्रदेश की राजनीति में प्रमुखता देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
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बच्चों की मौत से शुरू हुई सियासी लड़ाई
बालाघाट के आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का मामला पिछले कुछ महीनों से लगातार चर्चा में है। यहां 30 से अधिक बच्चों की मौत की जानकारी सामने आई है। प्रभावित क्षेत्रों में मलेरिया, खसरा, कुपोषण, एनीमिया और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर जांच और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठे हैं। हालांकि सभी मौतों को किसी एक बीमारी या कारण से जोड़ना उचित नहीं है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को सरकार के खिलाफ लगातार उठाया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी प्रभावित क्षेत्र और परिवारों तक पहुंचे हैं। कांग्रेस की ओर से स्वास्थ्य सुविधाओं और बच्चों की मौत के आंकड़ों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दूसरी ओर, सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल टीमों, जांच, उपचार और निगरानी के जरिए स्थिति संभालने के कदम उठाए हैं।
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राहुल के दौरे में उठेंगे आदिवासी बेल्ट के सवाल
राहुल गांधी की जागला यात्रा का फोकस सिर्फ मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस इस दौरे के जरिए आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण, बीमारी की रोकथाम और दूरदराज के गांवों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच जैसे मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाना चाहती है। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मध्यप्रदेश की करीब 22 फीसदी आबादी आदिवासी समुदाय से जुड़ी है और विधानसभा की 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।
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2018 से 2023 तक बदला आदिवासी सीटों का गणित
आदिवासी सीटों का चुनावी महत्व पिछले दो विधानसभा चुनावों के आंकड़ों से भी समझा जा सकता है। 2018 में कांग्रेस ने 47 एसटी आरक्षित सीटों में से 30 पर जीत दर्ज की थी। 2023 में भाजपा ने इन सीटों में 24 पर जीत हासिल की, जबकि कांग्रेस को 22 सीटें मिलीं और भारत आदिवासी पार्टी ने एक सीट जीती। ऐसे में राहुल गांधी का बालाघाट दौरा कांग्रेस के लिए सिर्फ एक स्थानीय घटना पर प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि आदिवासी इलाकों से जुड़े मुद्दों को प्रदेश की राजनीति में प्रमुखता देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
