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Mp news: एनएचएम के लोक सूचना अधिकारी पर पुलिस कर सकती है कार्रवाई, जल्दबाजी में दी गलत जानकारी, हुई शिकायत

Sat, 10 Aug 2024 07:02 PM IST
संदीप तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: संदीप तिवारी Updated Sat, 10 Aug 2024 07:02 PM IST
सार

एनएचएम के लोक सूचना अधिकारी पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है। लोक सूचना अधिकारी पर जानकारी छुपाने और बाद में गलत जानकारी देने की शिकायत जबलपुर पुलिस अधीक्षक से की गई है।

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Police can take action against NHM's Public Information Officer, gave wrong information in haste, complaint ma
एनएचएम भोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी भोपाल स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के लोक सूचना अधिकारी पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है। लोक सूचना अधिकारी पर जानकारी छुपाने और बाद में गलत जानकारी देने की शिकायत जबलपुर पुलिस अधीक्षक से की गई है। दरअसल एनएचएम में अधिकारियों को आवंटित की गई गाड़ियां और उन गाड़ियों के टेंडर संबंधित जानकारी आरटीआई में मांगी गई थी, लेकिन यहां के लोक सूचना अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करते हुए जानकारी नहीं होने का लेटर आवेदक को भेज दिया। जब इस मामले में आवेदक ने मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक शिकायत कर दी और अमर उजाला ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित की और खबर जब अधिकारियों के पास पहुंची तो लोक सूचना अधिकारी को जमकर फटकार लगी और उन्होंने आवेदक के बगैर प्रथम अपील किए ही आनन-फानन में गलत जानकारी भेज दी। खास बात यह है कि एक ही जानकारी दो बार भेज दी। अब आरटीआई लगाने वाले आवेदक भैया साहू ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक (एसपी) से मामले में शिकायत की है और अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना होगा एनएचएम की एमडी प्रियंका दास इस तरह के गुमराह करने वाले अधिकारी पर क्या कार्रवाई करतीं हैं।
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अधिकारियों को आवंटित वाहनों के लिए यह है नियम
किसी भी शासकीय कार्यालय में अधिकारियों जो वाहन आवंटित किया जाता है उससे से जुड़ी समस्त जानकारी को रजिस्टर में दर्ज कर सुरक्षित रखा जाता है। इसी आधार पर ट्रैवल्स एजेंसियों को भुगतान किया जाता है। जिस ड्राइवर को जो वहन अलॉट होता है उसे ड्राइवर द्वारा लॉग बुक भरकर संधारित की जाती है जिससे वहन में खपत हुए ईंधन की राशि का भुगतान किया जाता है। जबकि एचएम में 100 से ज्यादा ट्रेवल्स की गाड़ियां लगाई गई है, लेकिन सूचना के अधिकार में मांगी गई जानकारी पर यहां के लोक सूचना अधिकारी ने जवाब में लिखा की जानकारी निरंक है यानी कोई जानकारी नहीं है l जानकारी मांगने वाले आवेदक ने जब इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक की और अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से उठाया तो अधिकारियों ने गलत जानकारी आवेदक को भेज दी। जबकि नियम के अनुसार एक बार जानकारी देने से मना करने पर अभ्यर्थी द्वारा दोबारा अपील किए जाने पर ही जानकारी दी जाती है।
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गाड़ियों के आवंटन में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका
जानकारी मांगने वाले भैया लाल साहू ने पुलिस अधीक्षक जबलपुर को शिकायत में लिखा है कि गाड़ियों के आवंटन की जानकारी मांगी गई तो लोक सूचना अधिकारी ने जवाब दिया कि जानकारी निरंक है। शिकायत के बाद जब लोक सूचना अधिकारी एवं उपसंचालक स्टोर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल द्वारा उक्त जानकारी मुझे उपलब्ध कराई गई तो जानकारी देख मैं आश्चर्यचकित रह गया की राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल एक शासकीय कार्यालय है जिसमें 100 से अधिक गाड़ियां अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आवंटित हैं जिसका खर्च शासकीय खजाने से वय होता है और यहां पर अगर आवंटित गाड़ियों में हो रहे खर्च की जानकारी संधारित नहीं की जाती जोकि शासकीय नियमों के विपरीत है। और यहां पर आवंटित गाड़ियों की जानकारी संधारित ना कर अनुमानित तरीके से गाड़ियों के खर्चे में न जाने कितने रूपयों का मनमाने तरीके से भुगतान किया जा रहा हैं। जिसमें ना जाने कितना भ्रष्टाचार कर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल मप्र को क्षति पहुंचाई जा रही होगी।
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जानबूझकर आवेदक को किया गुमराह
शाहू ने शिकायत में लिखा है कि अधिकारी एवं उपसंचालक स्टोर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भोपाल मप्र. के द्वारा 89 पृष्ठों की जानकारी प्रदाय की गई है। जिससे स्पष्ट होता है कि लोक सूचना अधिकारी दिनेश चंद सिंघी एवं उपसंचालक स्टोर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अधिकारी द्वारा पहले जानबूझकर आवेदक को गुमराह कर गलत जानकारी दी गई। जो की एक गंभीर विषय एवं अपराध है। लोक सूचना अधिकारी दिनेश चंद्र सिंघी एवं उपसंचालक स्टोर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन द्वारा सिविल सेवा अधिनियम की धारा 166 (ए) एवं167 के तहत कानून के निर्देशों की अवहेलना अवज्ञा, अपने पद का दुरुपयोग कर आवेदक से धोखाधड़ी कर विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार को छुपाने की नीयत से झूठी जानकारी प्रदान की गई।
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