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एक अंगदाता से 4 मरीजों को नई जिंदगी: भोपाल से चेन्नई तक ग्रीन कॉरिडोर, हृदय-लीवर समेत चार अंगों का प्रत्यारोपण

Thu, 10 Sep 2026 07:16 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल Published by: Sandeep Kumar Tiwari Updated Thu, 10 Sep 2026 07:16 PM IST
सार

एम्स भोपाल में ब्रेन डेड 53 वर्षीय मरीज के अंगदान से चार मरीजों को जीवन की नई उम्मीद मिली। हृदय चेन्नई, लीवर इंदौर और दोनों किडनी भोपाल के मरीजों को दी गईं। अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए भोपाल-चेन्नई और भोपाल-इंदौर ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।

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New life for four patients from a single organ donor: Green corridor from Bhopal to Chennai; transplantation o
चिकित्सकों के साथ परिजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 एम्स भोपाल में ब्रेन हैमरेज से ब्रेन डेड हुए 53 वर्षीय मरीज के अंगदान से चार जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी मिली है। परिवार ने अपनों को खोने के दर्द के बीच अंगदान की सहमति दी। इसके बाद मरीज का हृदय चेन्नई, लीवर इंदौर और दोनों किडनी भोपाल के मरीजों को प्रत्यारोपण के लिए उपलब्ध कराई गईं।
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हृदय चेन्नई, लीवर इंदौर भेजा
53 वर्षीय मरीज को ब्रेन हैमरेज की गंभीर हालत में दूसरे अस्पताल से एम्स भोपाल रेफर किया गया था। करीब पांच दिन तक विशेषज्ञ डॉक्टरों ने इलाज किया, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल के तहत जांच के बाद मरीज को ब्रेन डेड घोषित किया गया। इसके बाद डॉक्टरों ने परिवार को अंगदान की प्रक्रिया और इससे दूसरे मरीजों को मिलने वाली जिंदगी के बारे में समझाया। परिजनों ने सहमति दी तो नियमानुसार अंगों का आवंटन किया गया। हृदय चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर अस्पताल और लीवर इंदौर के सीएचएल अस्पताल भेजा गया। दोनों किडनी भोपाल के जरूरतमंद मरीजों को दी गईं।
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चेन्नई तक ग्रीन कॉरिडोर, पुलिस ने संभाला रास्ता
हृदय को एम्स भोपाल से राजा भोज एयरपोर्ट तक पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। मध्यप्रदेश पुलिस ने पूरे मार्ग पर यातायात व्यवस्था संभाली, जिससे हृदय समय पर एयरपोर्ट पहुंचा और विशेष विमान से चेन्नई भेजा गया। वहीं लीवर को भोपाल से इंदौर पहुंचाने के लिए भी ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। प्रशासन और पुलिस के समन्वय से लीवर को समय पर सीएचएल अस्पताल पहुंचाया गया।
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अंगदाता को गार्ड ऑफ ऑनर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर अंगदाता को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद सभी चिकित्सकीय और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी कर पार्थिव शरीर पूरे सम्मान और गरिमा के साथ परिजनों को सौंप दिया गया।


 
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