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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Bhopal: No Direct Criminal Case Against Gazetted Police Officers, Prior Government Approval Made Mandatory

भोपाल: पुलिस अफसरों पर अब सीधी FIR आसान नहीं, शासकीय कार्य से जुड़ी शिकायत पर सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य

Sat, 12 Sep 2026 04:03 PM IST
भोपाल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: भोपाल ब्यूरो Updated Sat, 12 Sep 2026 04:03 PM IST
सार

मध्यप्रदेश में अब राजपत्रित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ पदीय दायित्व से जुड़े मामलों में सीधे आपराधिक कार्रवाई नहीं हो सकेगी। PHQ की नई गाइड लाइन के मुताबिक एफआईआर या अदालती कार्रवाई से पहले राज्य सरकार से अभियोजन की पूर्व स्वीकृति लेना जरूरी होगा।

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Bhopal: No Direct Criminal Case Against Gazetted Police Officers, Prior Government Approval Made Mandatory
पुलिस मुख्यालय, भोपाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश में सरकारी कामकाज से जुड़ी शिकायतों को लेकर राजपत्रित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीधे आपराधिक कार्रवाई करना अब आसान नहीं होगा। पुलिस मुख्यालय की नई गाइड लाइन के तहत पदीय दायित्व से जुड़े मामलों में एफआईआर या अदालती कार्रवाई से पहले राज्य सरकार से अभियोजन की पूर्व स्वीकृति लेना अनिवार्य किया गया है। पीएचक्यू ने प्रदेश की सभी जिला इकाइयों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।

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पद के दुरुपयोग की होगी जांच
पीएचक्यू की अपराध अनुसंधान शाखा की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार अब केवल शिकायत के आधार पर पुलिस अधिकारी के खिलाफ सीधे कार्रवाई नहीं की जाएगी। अभियोजन स्वीकृति देने से पहले शासन स्तर पर यह देखा जाएगा कि शिकायत वास्तव में पद के दुरुपयोग से संबंधित है या नहीं। यदि मामला अधिकारी के पदीय दायित्व और शासकीय कर्तव्य के निर्वहन से जुड़ा पाया जाता है तो अदालत द्वारा संज्ञान लेने से पहले शासन की अनुमति जरूरी होगी।
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हाईकोर्ट के आदेश का दिया गया हवाला
पीएचक्यू ने ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ के 19 जुलाई 2026 के आदेश का भी संदर्भ दिया है। इस मामले में बिना पूर्व अभियोजन स्वीकृति के दर्ज शिकायत के आधार पर हुई कार्रवाई को अदालत ने निरस्त कर दिया था। पीएचक्यू ने सभी जिला इकाइयों को इस निर्णय का गहन अध्ययन करने और जरूरत के अनुसार संबंधित न्यायिक दृष्टांतों का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं।
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दुर्भावनापूर्ण शिकायतों से होगी सुरक्षा
नई व्यवस्था को ड्यूटी के दौरान पुलिस अधिकारियों को दुर्भावनापूर्ण या बेबुनियाद शिकायतों से सुरक्षा देने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि पदीय कर्तव्य से जुड़े मामलों में सरकार की पूर्व स्वीकृति जरूरी होगी तो आम लोगों के लिए पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की न्यायिक प्रक्रिया अधिक जटिल हो सकती है। बहरहाल पीएचक्यू ने सभी जिला इकाइयों को नई व्यवस्था के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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