{"_id":"67966b4c9d5388fd5303781b","slug":"nauguration-of-lokrang-utsav-governor-said-gana-and-tantra-should-work-together-for-the-preservation-of-fol-2025-01-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"लोकरंग उत्सव का शुभारंभ: राज्यपाल बोले- लोक कला, संस्कृति के संरक्षण के लिए गण और तंत्र मिलकर कार्य करे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लोकरंग उत्सव का शुभारंभ: राज्यपाल बोले- लोक कला, संस्कृति के संरक्षण के लिए गण और तंत्र मिलकर कार्य करे
Sun, 26 Jan 2025 10:35 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sun, 26 Jan 2025 10:35 PM IST
सार
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कार्यक्रम के दौरान साहित्यकारों को राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया और गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह के विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए।
विज्ञापन
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने लोकरंग कार्यक्रम का शुभारंभ किया
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भोपाल के रविंंद्र भवन में आयोजित लोकरंग उत्सव का उद्घाटन राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ें सदियों से मजबूत रही हैं और हमें इन्हें संरक्षित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। राज्यपाल ने लोक कला और संस्कृति के संरक्षण के प्रयासों में सरकार और समाज के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही, उन्होंने उपस्थित जनों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं भी दी। राज्यपाल ने कार्यक्रम के दौरान साहित्यकारों को राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया और गणतंत्र दिवस के मुख्य समारोह के विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए। इसके अतिरिक्त, संस्कृति विभाग द्वारा तैयार किए गए घुमंतु जनजातियों के भाषाकोष की वेबसाइट और पुस्तकों का लोकार्पण किया। उन्होंने दुर्लभ वाद्य यंत्रों की प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया और संस्कृति विभाग की जनजातीय और लोक कला के विविध पहलुओं पर आधारित आयोजनों की सराहना की।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार युवाओं और भावी पीढ़ी को जोड़ने के साथ-साथ सांस्कृतिक आयोजनों में जनजातीय एवं ग्रामीण अंचल की प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर रही है। उन्होंने प्रदेश में आयोजित खजुराहो नृत्य उत्सव, तानसेन समारोह, कुम्भ कत्थक और गीता पाठ जैसे आयोजनों का उल्लेख किया और इनकी सफलता की सराहना की।
500 से अधिक दुर्लभ वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति लगाई
राज्यपाल ने संस्कृति के विभिन्न आयामों को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों से राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीयता को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी संस्कृति का संरक्षण करने के लिए जनजातीय सेनानियों के शौर्य और बलिदान से प्रेरणा लें। इस दौरान प्रमुख सचिव संस्कृति और पर्यटन शिव शेखर शुक्ला ने लोकरंग उत्सव की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 500 से अधिक दुर्लभ वाद्ययंत्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है और 20 से अधिक राज्यों के कलाकार अपनी संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस, लेबनान, और जर्मनी की टीमें भी अपनी पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुत करेंगी। प्रमुख सचिव ने यह भी बताया कि 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां प्रदेश की हस्तकला, शिल्प और पाक कला का प्रदर्शन किया जा रहा है।
विज्ञापन
कला और संस्कृति की विभूतियां सम्मानित
राज्यपाल ने साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में सुदीर्घ साधना करने वाले विभूतियों को शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया। इस साल के राष्ट्रीय महात्मा गांधी सम्मान विवेकानंद नीडम ग्वालियर और भारत भारती शिक्षा समिति बैतूल को प्रदान किए गए। वहीं, राष्ट्रीय कबीर सम्मान श्री रामदरश मिश्र और राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान डॉ. देवेन्द्र दीपक को दिया गया। इसके अलावा, गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल परेड सैन्य दल श्रेणी के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को पहला, स्पेशल टास्क फोर्स को दूसरा और केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल को तीसरा स्थान मिला। असैन्य दल श्रेणी में भूतपूर्व सैनिक, एन.सी.सी. सीनियर बॉयज और सीनियर गर्ल्स को सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य सरकार के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण के प्रयासों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य सरकार युवाओं और भावी पीढ़ी को जोड़ने के साथ-साथ सांस्कृतिक आयोजनों में जनजातीय एवं ग्रामीण अंचल की प्रतिभाओं को मंच प्रदान कर रही है। उन्होंने प्रदेश में आयोजित खजुराहो नृत्य उत्सव, तानसेन समारोह, कुम्भ कत्थक और गीता पाठ जैसे आयोजनों का उल्लेख किया और इनकी सफलता की सराहना की।
विज्ञापन
500 से अधिक दुर्लभ वाद्ययंत्रों की प्रस्तुति लगाई
राज्यपाल ने संस्कृति के विभिन्न आयामों को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि सांस्कृतिक आयोजनों से राष्ट्रीय एकता और राष्ट्रीयता को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी संस्कृति का संरक्षण करने के लिए जनजातीय सेनानियों के शौर्य और बलिदान से प्रेरणा लें। इस दौरान प्रमुख सचिव संस्कृति और पर्यटन शिव शेखर शुक्ला ने लोकरंग उत्सव की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 500 से अधिक दुर्लभ वाद्ययंत्रों की प्रदर्शनी लगाई गई है और 20 से अधिक राज्यों के कलाकार अपनी संस्कृति का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस, लेबनान, और जर्मनी की टीमें भी अपनी पारंपरिक लोक नृत्य प्रस्तुत करेंगी। प्रमुख सचिव ने यह भी बताया कि 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां प्रदेश की हस्तकला, शिल्प और पाक कला का प्रदर्शन किया जा रहा है।
विज्ञापन
कला और संस्कृति की विभूतियां सम्मानित
राज्यपाल ने साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में सुदीर्घ साधना करने वाले विभूतियों को शॉल, श्रीफल और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया। इस साल के राष्ट्रीय महात्मा गांधी सम्मान विवेकानंद नीडम ग्वालियर और भारत भारती शिक्षा समिति बैतूल को प्रदान किए गए। वहीं, राष्ट्रीय कबीर सम्मान श्री रामदरश मिश्र और राष्ट्रीय मैथिलीशरण गुप्त सम्मान डॉ. देवेन्द्र दीपक को दिया गया। इसके अलावा, गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल परेड सैन्य दल श्रेणी के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को पहला, स्पेशल टास्क फोर्स को दूसरा और केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल को तीसरा स्थान मिला। असैन्य दल श्रेणी में भूतपूर्व सैनिक, एन.सी.सी. सीनियर बॉयज और सीनियर गर्ल्स को सम्मानित किया गया।
