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एमपी: लाड़ली बहना योजना बंद कर दो, लेकिन गांव में परमाणु प्लांट मंजूर नहीं; रीवा में ग्रामीणों का विरोध तेज

Thu, 08 Oct 2026 07:13 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Anand Pawar Updated Thu, 08 Oct 2026 07:13 AM IST
सार

रीवा के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित 28 हजार करोड़ रुपए के परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट का ग्रामीण विरोध तेज हो गया है। ग्रामीणों ने जमीन सर्वे के लिए पहुंची ड्रिलिंग मशीनें लौटाईं और कहा- योजनाओं का लाभ छोड़ देंगे, लेकिन गांव में प्लांट नहीं लगने देंगे।
 

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MP: Villagers Intensify Protest Against Proposed Nuclear Plant in Rewa, Say Welfare Scheme Can Be Scrapped
परमाणु प्लांट का विरोध करते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रीवा  जिले के सिरमौर क्षेत्र में प्रस्तावित करीब 28 हजार करोड़ रुपए के परमाणु ऊर्जा प्रोजेक्ट को लेकर ग्रामीणों का विरोध अब गांवों की बैठकों तक पहुंच गया है। परियोजना के लिए जमीन की जांच और सर्वे करने पहुंची ड्रिलिंग मशीनों को ग्रामीणों ने वापस लौटा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि वे गांव में परमाणु प्लांट नहीं लगने देंगे। परियोजना के लिए जमीन की जांच और सर्वे की प्रक्रिया शुरू होने के बाद ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। उनका कहना है कि सरकार चाहे तो लाड़ली बहना की राशि बंद कर दे या राशन जैसी सुविधाएं रोक दे, लेकिन गांव की जमीन पर परमाणु संयंत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा। सिरमौर क्षेत्र के सरई कला गांव की ग्रामसभा ने भी परियोजना के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से खारिज कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि मामला केवल जमीन जाने तक सीमित नहीं है। परमाणु परियोजना से पानी, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता है। इसी वजह से ग्रामीण परियोजना का लगातार विरोध कर रहे हैं।
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परियोजना को लेकर प्रशासन की ओर से जमीन की स्थिति और ग्रामीणों की राय जानने की प्रक्रिया की जा रही है। रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा कि परियोजना को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों से चर्चा के बाद नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा। लोगों की चिंताओं और सुझावों पर भी विचार किया जाएगा। 
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चुटका परियोजना का भी विरोध
परमाणु परियोजनाओं को लेकर प्रदेश में विरोध का यह पहला मामला नहीं है। मंडला जिले में 1982 से प्रस्तावित चुटका परमाणु परियोजना का विरोध भी जारी है। इस परियोजना को वर्ष 2017 में 1400 मेगावाट की मंजूरी मिली थी, लेकिन अभी तक यह शुरुआती चरण से आगे नहीं बढ़ सकी है। मंडला में 119 परिवार गांव छोड़ चुके हैं, जबकि अन्य परिवार मुआवजे और परियोजना के विरोध को लेकर अपनी मांगें उठा रहे हैं।
 
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